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Ambala News: परीक्षा परिणाम सुधरे, प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी बनी चुनौती
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अंबाला सिटी। जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कई वर्षों से सरकारी स्कूलों में जेबीटी की भर्ती नहीं हुई। यही नहीं तबादले से कई शिक्षक एक से दूसरे जिलों में भी चले गए।
इससे जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी भी पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को एक ही शिक्षक पढ़ा रहा है। इन शिक्षक पर ही स्कूल में क्लर्क, बीएलओ, मिड डे मील इंचार्ज से लेकर पढ़ाई करवाने तक का जिम्मा है।
सरकार ने स्कूलों में पीजीटी और टीजीटी शिक्षकों की संख्या तो बढ़ाई है, लेकिन जेबीटी की संख्या कम ही बढ़ी। अभी भी जिले में 400 से ज्यादा पद स्कूलों में रिक्त पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की ज्यादा कमी है। जिले की बात करें तो 450 से ज्यादा राजकीय प्राथमिक विद्यालय हैं।
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शिक्षकों के तबादले बनी समस्या
बीते अप्रैल में 2017 बैच के शिक्षकों का तबादला हुआ था। इससे जिले से काफी शिक्षक दूसरे जिलों में चले गए थे। अंबाला खंड वन से ही करीब 150 से 200 शिक्षकों का तबादला हो गया था। तबादले के बाद कई स्कूलों में दो और कई में एक ही शिक्षक रह गया। उस दौरान करीब 72 स्कूल ऐसे थे, जहां शिक्षकों की कमी हो गई थी। इनमें से कई स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं बचा था, हालांकि ऐसे स्कूलों में विभाग ने दूसरे स्कूलों से शिक्षकों को अस्थायी तौर पर लगाया गया था, वहीं अब चुनाव आ गया है। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में भी लग गई है। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी। वहीं, बीते माह में राजकीय स्कूलों में टीजीटी व पीजीटी भर्ती हुए हैं, जिससे 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम भी सुधरा है।
वर्जन
सरकार जानबूझकर राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रही है। स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। राजकीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की ज्यादा कमी है। कई जगहों पर एक से पांचवीं तक कक्षाओं को एक ही शिक्षक पढ़ा रहा है।
रविंद्र सिंह, सेवानिवृत्त, खंड शिक्षा अधिकारी।
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इससे जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी भी पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को एक ही शिक्षक पढ़ा रहा है। इन शिक्षक पर ही स्कूल में क्लर्क, बीएलओ, मिड डे मील इंचार्ज से लेकर पढ़ाई करवाने तक का जिम्मा है।
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सरकार ने स्कूलों में पीजीटी और टीजीटी शिक्षकों की संख्या तो बढ़ाई है, लेकिन जेबीटी की संख्या कम ही बढ़ी। अभी भी जिले में 400 से ज्यादा पद स्कूलों में रिक्त पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की ज्यादा कमी है। जिले की बात करें तो 450 से ज्यादा राजकीय प्राथमिक विद्यालय हैं।
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शिक्षकों के तबादले बनी समस्या
बीते अप्रैल में 2017 बैच के शिक्षकों का तबादला हुआ था। इससे जिले से काफी शिक्षक दूसरे जिलों में चले गए थे। अंबाला खंड वन से ही करीब 150 से 200 शिक्षकों का तबादला हो गया था। तबादले के बाद कई स्कूलों में दो और कई में एक ही शिक्षक रह गया। उस दौरान करीब 72 स्कूल ऐसे थे, जहां शिक्षकों की कमी हो गई थी। इनमें से कई स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं बचा था, हालांकि ऐसे स्कूलों में विभाग ने दूसरे स्कूलों से शिक्षकों को अस्थायी तौर पर लगाया गया था, वहीं अब चुनाव आ गया है। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में भी लग गई है। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी। वहीं, बीते माह में राजकीय स्कूलों में टीजीटी व पीजीटी भर्ती हुए हैं, जिससे 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम भी सुधरा है।
वर्जन
सरकार जानबूझकर राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रही है। स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। राजकीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की ज्यादा कमी है। कई जगहों पर एक से पांचवीं तक कक्षाओं को एक ही शिक्षक पढ़ा रहा है।
रविंद्र सिंह, सेवानिवृत्त, खंड शिक्षा अधिकारी।