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Ambala News: रोजाना 30 युवा सेना में भर्ती के लिए लगाते हैं दाैड़
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अंबाला छावनी स्थित डिफेंस एन्क्लेव में कमलेश रानी अपने बेटों के साथ बलिदानी पति सूबेदार रणबीर
अंबाला। बोह गांव के डिफेंस एनक्लेव में पूर्व सैनिकों के कई परिवार रहते हैं। इस एनक्लेव को बलिदानी सूबेदार रणबीर सिंह के क्षेत्र के रूप में भी पहचाना जाता है। यहां पर सरकारी स्कूल का मैदान है। इसी मैदान में युवा दौड़ लगाते हैं। इसके अलावा डिफेंस काॅलोनी में पंचायती बाग के नाम से मैदान है।
इस मैदान में करीब 30 युवा सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं। क्षेत्र में 70 के लगभग सेवानिवृत सैनिक हैं। सूबेदार रणबीर सिंह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों के फेंके ग्रेनेड के हमले में बलिदान हो गए थे। सेना में जाने की तैयारी करने वाले युवाओं को इस गांव में सेवानिवृत्त फौजी मार्गदर्शन करते हैं।
ऑपरेशन रक्षक में दिया था बलिदान
कमलेश रानी के अनुसार 2008 में उनके पति जम्मू में तैनात थे। सेना की ओर से आतंकवादियों से निपटने के लिए कुपवाड़ा में ऑपरेशन रक्षक चलाया था। उन्हें पता लगा कि जंगल में आतंकवादी छिपे हैं। उनके पति सूबेदार इंचार्ज थे, जिनके साथ तीन सिपाही और एक नायब सूबेदार थे। इस ऑपरेशन में जवानों ने चार आतंकवादियों को मार गिराया और एक आतंकी को पकड़ लिया। इसके बाद छिपे बैठे अन्य आतंकवादियों ने सेना की टुकड़ी पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस हमले में अन्य सैनिकों के साथ उनके पति ने बलिदान दे दिया। पत्नी कमलेश रानी ने बताती हैं कि वह मूलरूप से यमुनानगर के मुस्तफाबाद स्थित गांव गुंदयाना के निवासी हैं।
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17 साल बाद भी नहीं लगी प्रतिमा
बलिदानी सूबेदार रणबीर सिंह के बेटे प्रिंस बताते हैं कि उनके पिता को 17 साल हो गए हैं शहीद हुए लेकिन आज तक प्रशासन की ओर से उनके पिता के नाम से न तो कोई प्रतिमा लगाई और न ही कोई द्वार बनाया। किसी सड़क का नाम भी पिता के नाम पर नहीं रखा।
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इस मैदान में करीब 30 युवा सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं। क्षेत्र में 70 के लगभग सेवानिवृत सैनिक हैं। सूबेदार रणबीर सिंह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों के फेंके ग्रेनेड के हमले में बलिदान हो गए थे। सेना में जाने की तैयारी करने वाले युवाओं को इस गांव में सेवानिवृत्त फौजी मार्गदर्शन करते हैं।
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ऑपरेशन रक्षक में दिया था बलिदान
कमलेश रानी के अनुसार 2008 में उनके पति जम्मू में तैनात थे। सेना की ओर से आतंकवादियों से निपटने के लिए कुपवाड़ा में ऑपरेशन रक्षक चलाया था। उन्हें पता लगा कि जंगल में आतंकवादी छिपे हैं। उनके पति सूबेदार इंचार्ज थे, जिनके साथ तीन सिपाही और एक नायब सूबेदार थे। इस ऑपरेशन में जवानों ने चार आतंकवादियों को मार गिराया और एक आतंकी को पकड़ लिया। इसके बाद छिपे बैठे अन्य आतंकवादियों ने सेना की टुकड़ी पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस हमले में अन्य सैनिकों के साथ उनके पति ने बलिदान दे दिया। पत्नी कमलेश रानी ने बताती हैं कि वह मूलरूप से यमुनानगर के मुस्तफाबाद स्थित गांव गुंदयाना के निवासी हैं।
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17 साल बाद भी नहीं लगी प्रतिमा
बलिदानी सूबेदार रणबीर सिंह के बेटे प्रिंस बताते हैं कि उनके पिता को 17 साल हो गए हैं शहीद हुए लेकिन आज तक प्रशासन की ओर से उनके पिता के नाम से न तो कोई प्रतिमा लगाई और न ही कोई द्वार बनाया। किसी सड़क का नाम भी पिता के नाम पर नहीं रखा।