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कर्मचारियों को वापस रखने और कौशल रोजगार निगम को भंग करने की उठाई मांग
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने शिक्षा सदन में एकत्रित होकर वहां से डीसी कार्यालय तक रोष मार्च निकाला। आक्रोशित कर्मचारियों ने डीसी कार्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में नौकरी से हटाए तीन हजार कोविड कर्मचारियों को बहाल करने व कौशल रोजगार निगम को भंग करने की मांग उठाई। उन्होंने प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
इस मौके पर संघ के राज्य महासचिव सतीश सेठी व प्रेस प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि जब प्रदेश में कोरोना तेजी से फैल रहा था तब संक्रमितों का इलाज करने में स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की कमी के चलते लाचार था। सरकार की किरकिरी हो रही थी। उस संकट में इन प्रशिक्षित कोविड कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जनता की दिन-रात सेवा की। यह खुद भी संक्रमित हुए और अपने परिवारों को भी खतरे में डाला। परंतु सरकार जो उस समय इन्हें कोरोना योद्धा बताते हुए इनके सम्मान में फूल बरसा रही थी और थालियां बजा रही थी। मतलब निकलते ही इनके कार्य को भूल गई ओर एक झटके में नौकरी से बाहर करने का फरमान सुना दिया।
नगरपालिका कर्मचारी संघ के राज्य नेता सेवा राम व लोनिवि मेकेनिकल वर्कर के प्रधान संजीव ने कहा कि सरकार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने व समान काम समान वेतन लागू करने से पीछे हट गई है। आठ साल में कोई रेगुलर करने की पॉलसी नहीं बनाई। उल्टे ठेका प्रथा को मजबूत करते हुए कौशल रोजगार निगम का गठन कर दिया गया है। ऑल हरियाणा पॉवर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के नेता विनोद कुमार और विकास ने कहा कि आउटसोर्सिंग पॉलिसी दो में समान काम समान वेतन ले रहे कर्मचारियों को भी कौशल निगम में धकेलकर वेतन तक कम कर दिया है।
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एसकेएस वरिष्ठ उप प्रधान रामगोपाल व जिला सचिव महावीर पाई ने कहा कि निगम ने 180 पदों के लिए शैक्षिणक योग्यता व उनके वेतन की नोटिफिकेशन जारी की है। कई पद खत्म कर दिए गए हैं। नियुक्ति पत्र तक देने पर रोक लगा दी गई है। साल में 11 महीने के लिए ऑफर लेटर दिया जा रहा है। साफ है कि सरकार निगम के माध्यम से कर्मचारियों को गुलाम बनाकर रखना चाहती है। कौशल रोजगार निगम कर्मचारी के शोषण के साथ ही बेरोजगार युवाओं के लिए पक्की नौकरी के रास्ते भी बंद करेगा। इस मौके पर अन्य कर्मचारियों ने भी विचार रखे। प्रदर्शन को पवन कुमार, बलबीर हंसडेहर, हरपाल सिंह, विनोद कुमार, विकास वर्मा, निशा शर्मा, शिव कोड़ा आदि ने भी संबोधित किया।
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इस मौके पर संघ के राज्य महासचिव सतीश सेठी व प्रेस प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि जब प्रदेश में कोरोना तेजी से फैल रहा था तब संक्रमितों का इलाज करने में स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की कमी के चलते लाचार था। सरकार की किरकिरी हो रही थी। उस संकट में इन प्रशिक्षित कोविड कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जनता की दिन-रात सेवा की। यह खुद भी संक्रमित हुए और अपने परिवारों को भी खतरे में डाला। परंतु सरकार जो उस समय इन्हें कोरोना योद्धा बताते हुए इनके सम्मान में फूल बरसा रही थी और थालियां बजा रही थी। मतलब निकलते ही इनके कार्य को भूल गई ओर एक झटके में नौकरी से बाहर करने का फरमान सुना दिया।
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नगरपालिका कर्मचारी संघ के राज्य नेता सेवा राम व लोनिवि मेकेनिकल वर्कर के प्रधान संजीव ने कहा कि सरकार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने व समान काम समान वेतन लागू करने से पीछे हट गई है। आठ साल में कोई रेगुलर करने की पॉलसी नहीं बनाई। उल्टे ठेका प्रथा को मजबूत करते हुए कौशल रोजगार निगम का गठन कर दिया गया है। ऑल हरियाणा पॉवर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के नेता विनोद कुमार और विकास ने कहा कि आउटसोर्सिंग पॉलिसी दो में समान काम समान वेतन ले रहे कर्मचारियों को भी कौशल निगम में धकेलकर वेतन तक कम कर दिया है।
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एसकेएस वरिष्ठ उप प्रधान रामगोपाल व जिला सचिव महावीर पाई ने कहा कि निगम ने 180 पदों के लिए शैक्षिणक योग्यता व उनके वेतन की नोटिफिकेशन जारी की है। कई पद खत्म कर दिए गए हैं। नियुक्ति पत्र तक देने पर रोक लगा दी गई है। साल में 11 महीने के लिए ऑफर लेटर दिया जा रहा है। साफ है कि सरकार निगम के माध्यम से कर्मचारियों को गुलाम बनाकर रखना चाहती है। कौशल रोजगार निगम कर्मचारी के शोषण के साथ ही बेरोजगार युवाओं के लिए पक्की नौकरी के रास्ते भी बंद करेगा। इस मौके पर अन्य कर्मचारियों ने भी विचार रखे। प्रदर्शन को पवन कुमार, बलबीर हंसडेहर, हरपाल सिंह, विनोद कुमार, विकास वर्मा, निशा शर्मा, शिव कोड़ा आदि ने भी संबोधित किया।