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सूबे में बिजली कर्मियों की हड़ताल को लेकर पूरी तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट।
Updated Wed, 29 Jun 2016 12:24 AM IST
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हड़ताल
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अंबाला। अफसरों के गैरजिम्मेदारा रवैये के कारण बिजली कर्मियों की हड़ताल टल नहीं सकी। अधिकारियों का रवैया उकसाने वाला रहा। यह आरोप जिले के बिजली कर्मियों ने लगाया। उनका कहना था कि यदि अधिकारी संवेदनशीलता दिखाते तो हड़ताल टल सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कमेटी के निर्णय के अनुसार जिले में भी बिजली कर्मी मंगलवार रात से हड़ताल पर चले गए।
निगम का बढ़ रहा घाटा, सरकार को फिक्र नहीं
कमेटी के नेताओं ने कहा कि सोमवार को तीन घंटे पंचकूला में आला अफसरों से बातचीत हुई। लेकिन अफसरों का रुख कर्मचारियों के प्रति ठीक नहीं था। उनका रवैया कर्मचारियों को उकसाने वाला व आपत्तिजनक था। कर्मचारी नेताओं ने फिर भी बैठक में संयम बरता, लेकिन अफसर का रवैया कर्मचारियों व विभाग के हित में नहीं था। जबकि बिजली मंत्री भी बैठक में असहाय दिखाई दिए। इसलिए बातचीत सिरे नहीं चढ़ी और बिजली कर्मी मंगलवार रात दस बजे से हड़ताल पर चले गए।
नेताओं ने कहा कि सब डिवीजनों का निजीकरण न तो प्रदेश की जनता के हित में और न ही निगम, कर्मचारी के हित में है। उनके अनुसार निजीकरण से केवल ठेकेदारों का ही फायदा है। इन्हीं नीतियों के कारण ही बिजली निगमों का घाटा 450 करोड़ से बढ़कर 34,700 करोड़ के पार चला गया और कर्जा बढ़ कर 30 हजार करोड़ हो गया। इसके बावजूद सरकार निजीकरण के रास्ते पर चलना चाहती है। इसलिए कर्मचारियों ने हड़ताल का फैसला लिया है।
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माहौल खराब किया, तो बख्शे नहीं जाएंगे कर्मचारी
प्रशासन ने भी बिजली कर्मियों की हड़ताल से निपटने की रणनीति तैयार कर ली है। बिजली निगम के एसई वीके खुराना ने साफ कहा कि प्रदेश में एस्मा लगा है। यदि हड़ताल के दौरान कोई गड़बड़ी हुई तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैसे तो एस्मा के अंतर्गत हड़ताल ही अवैध है। इसलिए उन्होंने बिजली कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे हड़ताल की जिद छोड़कर सही माध्यम से अपनी लड़ाई लड़ें। एसई ने कहा कि अंबाला में निचली अदालत ने भी एक बिजली अफसर की याचिका पर आदेश जारी कर रखा है कि हड़ताल के दौरान कर्मचारी बिजली घरों से 500 मीटर दूरी पर रहेंगे। उनके अनुसार इन आदेशों की प्रति भी पुलिस और सीआईडी को उपलब्ध करवा दी गई है। एसई के अनुसार वैसे तो कर्मचारियों ने बिजली बाधित न करने की बात कही है। यदि इसके बाद भी वे ऐसा करते हैं, तो महकमे के पास अपनी पूरी वैकल्पिक व्यवस्था है।
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निगम का बढ़ रहा घाटा, सरकार को फिक्र नहीं
कमेटी के नेताओं ने कहा कि सोमवार को तीन घंटे पंचकूला में आला अफसरों से बातचीत हुई। लेकिन अफसरों का रुख कर्मचारियों के प्रति ठीक नहीं था। उनका रवैया कर्मचारियों को उकसाने वाला व आपत्तिजनक था। कर्मचारी नेताओं ने फिर भी बैठक में संयम बरता, लेकिन अफसर का रवैया कर्मचारियों व विभाग के हित में नहीं था। जबकि बिजली मंत्री भी बैठक में असहाय दिखाई दिए। इसलिए बातचीत सिरे नहीं चढ़ी और बिजली कर्मी मंगलवार रात दस बजे से हड़ताल पर चले गए।
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नेताओं ने कहा कि सब डिवीजनों का निजीकरण न तो प्रदेश की जनता के हित में और न ही निगम, कर्मचारी के हित में है। उनके अनुसार निजीकरण से केवल ठेकेदारों का ही फायदा है। इन्हीं नीतियों के कारण ही बिजली निगमों का घाटा 450 करोड़ से बढ़कर 34,700 करोड़ के पार चला गया और कर्जा बढ़ कर 30 हजार करोड़ हो गया। इसके बावजूद सरकार निजीकरण के रास्ते पर चलना चाहती है। इसलिए कर्मचारियों ने हड़ताल का फैसला लिया है।
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माहौल खराब किया, तो बख्शे नहीं जाएंगे कर्मचारी
प्रशासन ने भी बिजली कर्मियों की हड़ताल से निपटने की रणनीति तैयार कर ली है। बिजली निगम के एसई वीके खुराना ने साफ कहा कि प्रदेश में एस्मा लगा है। यदि हड़ताल के दौरान कोई गड़बड़ी हुई तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैसे तो एस्मा के अंतर्गत हड़ताल ही अवैध है। इसलिए उन्होंने बिजली कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे हड़ताल की जिद छोड़कर सही माध्यम से अपनी लड़ाई लड़ें। एसई ने कहा कि अंबाला में निचली अदालत ने भी एक बिजली अफसर की याचिका पर आदेश जारी कर रखा है कि हड़ताल के दौरान कर्मचारी बिजली घरों से 500 मीटर दूरी पर रहेंगे। उनके अनुसार इन आदेशों की प्रति भी पुलिस और सीआईडी को उपलब्ध करवा दी गई है। एसई के अनुसार वैसे तो कर्मचारियों ने बिजली बाधित न करने की बात कही है। यदि इसके बाद भी वे ऐसा करते हैं, तो महकमे के पास अपनी पूरी वैकल्पिक व्यवस्था है।