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बलिदान और त्याग का प्रतीक है ईद-उल-अजहा : सैयद खान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jun 2025 02:08 AM IST
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Eid-ul-Azha is a symbol of sacrifice and renunciation: Syed Khan
अंबाला सिटी। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर शहर की सभी प्रमुख मस्जिदों हजरत साई तवक्कल शाह, मस्जिद लक्खी शाह, मस्जिद मक्का, मस्जिद मदीना कोर्ट रोड, मस्जिद बादशाही बाग, मस्जिद नसीर-उल-ओलिया नसीरपुर, मस्जिद उस्मानी जंडली, मस्जिद ईदगाह में नमाज अदा की।
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नमाज अदा करने के बाद अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन सोसायटी के जिला सदर सैयद अहमद खान ने सभी अंबालावासियों को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की मुबारकबाद दी। यह हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद दिलाता है और मुसलमानों को अल्लाह की राह में त्याग और समर्पण के महत्व को याद दिलाता है।
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धूमधाम और श्रद्धा से मनाई बकरीद

नारायणगढ़। देशभर में शनिवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार बड़ी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया। इस पावन अवसर पर जामा मस्जिद अजीजिया में शहर ही नहीं बल्कि आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग ईद की नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज से पूर्व मस्जिद के इमाम हाफिज मतलूब ने लोगों को संबोधित करते हुए कुर्बानी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुर्बानी एक धार्मिक कर्तव्य है। इसे पूरी सावधानी और सच्ची नीयत के साथ अदा किया जाना चाहिए।
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अंबाला। छावनी की जामा मस्जिद में ईद-उल-जुहा बकरीद का पर्व धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में मुसलिम समाज के लोग एकत्रित हुए। इसके बाद मस्जिद के इमाम मौलाना असगर काजमी ने ईद की नमाज पढ़ाई। इसके बाद उन्होंने लोगों के अमन और शांति की दुआ की। मौलाना मौलाना असगर काजमी ने कहा कि हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। किसी की भी धार्मिक भावना को आहत नहीं करना चाहिए।


अंबाला। छावनी की जामा मस्जिद में ईद-उल-जुहा बकरीद का पर्व धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में मुसलिम समाज के लोग एकत्रित हुए। इसके बाद मस्जिद के इमाम मौलाना असगर काजमी ने ईद की नमाज पढ़ाई। इसके बाद उन्होंने लोगों के अमन और शांति की दुआ की। मौलाना मौलाना असगर काजमी ने कहा कि हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। किसी की भी धार्मिक भावना को आहत नहीं करना चाहिए।
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