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Ambala News: शिशु मृत्यु दर को कम करने के प्रयास शुरू
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सीएमओ कार्यालय अंबाला। आर्काइव
अंबाला सिटी। जिला में शिशु मृत्यु दर का करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयास तेज करेगा। संकल्प प्रोजेक्ट के तहत यह कार्य किया जा रहा है। अब सरकारी ही नहीं बल्कि निजी अस्पतालों के डाॅक्टरों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस प्रशिक्षण में चिकित्सक यह पता लगाएंगे कि गर्भावस्था के 20 सप्ताह के भीतर शिशु की मौत के क्या कारण हैं। कारणों को जानने के बाद अपनी जांच प्रक्रिया में बदलाव किया जाएा। वर्तमान में अंबाला की शिशु मृत्यु दर पर गौर करें तो गर्भधारण के 20 सप्ताह के भीतर प्रति एक हजार बच्चों में से 14 बच्चों की मौत हो जाती है। इस मृत्यु दर के आंकड़े को 10 से भी कम लाने का निदेशालय ने स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य दिया है।
20 सप्ताह में मरने वाले अधिक
गर्भधारण के 20 सप्ताह के भीतर मरने वाले बच्चों की मृत्यु दर अधिक होती है। इसलिए सबसे पहले इन मामलों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में हुई बच्चे की मौत की भी पूर्णत: जांच होगी। कई बार निजी व नागरिक अस्पतालों में मृत्युदर एक सामान हो जाती है। जबकि दोनों ही स्थानों पर मृत्यु दर कम होनी चाहिए। बच्चों की मृत्यु दर कम होने से माताओं की सेहत में भी सुधार आएगा।
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हाल ही में बना था एमएसएनसीयू
शिशु के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए सिटी नागरिक अस्पताल की ओर से एमएसएनसीयू वार्ड बनाया है। इस वार्ड में माता अपने शिशु के साथ ही निजी वार्ड में रह सकती है। इससे शिशु को उसकी मां का स्पर्श मिलता रहे। डब्ल्यूएचओ की मानें तो माता के पास रहने से बच्चा भी जल्दी स्वस्थ हो जाता है।
वर्जन
विभाग ने इस बार शिशु मृत्यु दर कम करने का लक्ष्य 10 से भी कम रखा है। इसी को आधार बनाते हुए प्राइवेट और निजी अस्पतालों चिकित्सकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी।
-डॉ.सुखप्रीत सिंह, जिला नोडल अधिकारी एमएसएनसीयू अंबाला।
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इस प्रशिक्षण में चिकित्सक यह पता लगाएंगे कि गर्भावस्था के 20 सप्ताह के भीतर शिशु की मौत के क्या कारण हैं। कारणों को जानने के बाद अपनी जांच प्रक्रिया में बदलाव किया जाएा। वर्तमान में अंबाला की शिशु मृत्यु दर पर गौर करें तो गर्भधारण के 20 सप्ताह के भीतर प्रति एक हजार बच्चों में से 14 बच्चों की मौत हो जाती है। इस मृत्यु दर के आंकड़े को 10 से भी कम लाने का निदेशालय ने स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य दिया है।
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20 सप्ताह में मरने वाले अधिक
गर्भधारण के 20 सप्ताह के भीतर मरने वाले बच्चों की मृत्यु दर अधिक होती है। इसलिए सबसे पहले इन मामलों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में हुई बच्चे की मौत की भी पूर्णत: जांच होगी। कई बार निजी व नागरिक अस्पतालों में मृत्युदर एक सामान हो जाती है। जबकि दोनों ही स्थानों पर मृत्यु दर कम होनी चाहिए। बच्चों की मृत्यु दर कम होने से माताओं की सेहत में भी सुधार आएगा।
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हाल ही में बना था एमएसएनसीयू
शिशु के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए सिटी नागरिक अस्पताल की ओर से एमएसएनसीयू वार्ड बनाया है। इस वार्ड में माता अपने शिशु के साथ ही निजी वार्ड में रह सकती है। इससे शिशु को उसकी मां का स्पर्श मिलता रहे। डब्ल्यूएचओ की मानें तो माता के पास रहने से बच्चा भी जल्दी स्वस्थ हो जाता है।
वर्जन
विभाग ने इस बार शिशु मृत्यु दर कम करने का लक्ष्य 10 से भी कम रखा है। इसी को आधार बनाते हुए प्राइवेट और निजी अस्पतालों चिकित्सकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी।
-डॉ.सुखप्रीत सिंह, जिला नोडल अधिकारी एमएसएनसीयू अंबाला।