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पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिंदू-मुस्लमान हुआ करता था
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‘सख्ती होना थोड़ा लाजिम है, पर पत्थर दिल होना ठीक नहीं, हिंदू मुस्लिम ठीक है, लेकिन कट्टर होना ठीक नहीं...’ सलमान जफर की इन पंक्तियों ने खूब तालियां बटौरी। मौका था छावनी के आर्य गर्ल्स कॉलेज में प्रिंसिपल नंद लाल मेमोरियल द्वारा आयोजित ऑल इंडिया त्रिभाषी कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का। इस मौके पर गृह मंत्री अनिल विज ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत करनी थी, लेकिन वह नहीं पहुंचे।
शाम को शुरू हुए सम्मेलन में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की। इस दौरान कवि नदीम फारुख ने पढ़ा कि ‘वक्त से और मिलने की हिमाकत न करों, वक्त इंसान को नीलाम भी कर देता है’। इसके अलावा अन्य कवियों ने भी प्रस्तुति देकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इस दौरान पद्म श्री डॉ. सुरजीत, खुशबू शर्मा, पद्मनी शर्मा, मुमताज नसीम, डॉ. नदीम, जनाब बिलाल सहारनपुरिया, सलमान जफर, नदीम फारूख नजीम, खुर्शीद हैदर, सुरजीत, इकबाल अश्हर ने अपनी प्रस्तुति दी। इस मौके पर आर्य गर्ल्स कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य, प्रिंसिपल नंद लाल शर्मा, चैरिटेबल ट्रस्ट अंबाला कैंट के प्रधान प्रभास पराशर, जनरल सचिव डॉ. नीरज पराशर, सांझ अंबाला की प्रधान वीरा सूरी सेन आदि मौजूद रहे।
मुजफ्फरनगर से खुर्शीद अहमद ने पढ़ा कि गैर परों पर, हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वहीं उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे।
सुरजीत फगवाड़ा ने कहा कि चांदनी नू मैं केहा, मेरा वी किदरे जिक्र कर, उसने केहा मैं की करां तो नेहर विच शामिल नहीं
दिल्ली से बलजिंद्र चौहान ने कहा कि उम्र भर तूर के, तीख न आया गया, इस तरह लगदां जिथे सारा सफर जाया गया
बिलाल सहारनपुरिया ने पढ़ा कि पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिंदू-मुस्लमान हुआ करता था।
इकबाल अश्हर ने पढ़ा कि न जाने कितने चिरागों को मिल गई शोहरत, एक आफताब के बेवक्त डूब जाने से
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शाम को शुरू हुए सम्मेलन में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की। इस दौरान कवि नदीम फारुख ने पढ़ा कि ‘वक्त से और मिलने की हिमाकत न करों, वक्त इंसान को नीलाम भी कर देता है’। इसके अलावा अन्य कवियों ने भी प्रस्तुति देकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इस दौरान पद्म श्री डॉ. सुरजीत, खुशबू शर्मा, पद्मनी शर्मा, मुमताज नसीम, डॉ. नदीम, जनाब बिलाल सहारनपुरिया, सलमान जफर, नदीम फारूख नजीम, खुर्शीद हैदर, सुरजीत, इकबाल अश्हर ने अपनी प्रस्तुति दी। इस मौके पर आर्य गर्ल्स कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य, प्रिंसिपल नंद लाल शर्मा, चैरिटेबल ट्रस्ट अंबाला कैंट के प्रधान प्रभास पराशर, जनरल सचिव डॉ. नीरज पराशर, सांझ अंबाला की प्रधान वीरा सूरी सेन आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर से खुर्शीद अहमद ने पढ़ा कि गैर परों पर, हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वहीं उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे।
सुरजीत फगवाड़ा ने कहा कि चांदनी नू मैं केहा, मेरा वी किदरे जिक्र कर, उसने केहा मैं की करां तो नेहर विच शामिल नहीं
दिल्ली से बलजिंद्र चौहान ने कहा कि उम्र भर तूर के, तीख न आया गया, इस तरह लगदां जिथे सारा सफर जाया गया
बिलाल सहारनपुरिया ने पढ़ा कि पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिंदू-मुस्लमान हुआ करता था।
इकबाल अश्हर ने पढ़ा कि न जाने कितने चिरागों को मिल गई शोहरत, एक आफताब के बेवक्त डूब जाने से