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बिगड़ी आबोहवा, निर्माण गतिविधियों पर रोक, उद्योगों को चेतावनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 02:15 AM IST
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Deteriorating climate, ban on construction activities, warning to industries
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। एनसीआर में शामिल करनाल शहर की बिगड़ती आबोहवा के मद्देनजर जिले में निर्माण कार्यों पर 21 नवंबर तक रोक लगा दी है। यह आदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बुधवार को जारी किए। इसकी बिल्डरों को भी सूचना भेज दी गई है। नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग को सड़कों पर पानी का नियमित छिड़काव करने को कहा गया है। वहीं उद्योगों में प्रतिबंधित फ्यूल का इस्तेमाल पकड़े जाने पर भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है।
इधर प्रदूषण बढ़ने से कई दिनों से ओपीडी में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज में पहले करीब 100 मरीज रोजाना जांच करवाने आते थे जबकि अब इनकी संख्या 150 के करीब पहुंच गई है। ऐसे ही हालात शहर के नागरिक अस्पताल के भी हैं। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण जैसे जनहित के कार्यों पर रोक नहीं होगी, लेकिन निर्माण कंपनी को धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव सहित अन्य इंतजाम करने होंगे। पुलिस विभाग को आदेश दिए गए हैं कि पेट्रोल और डीजल से चलने वाले 10 से 15 वर्ष पुराने प्रतिबंधित वाहनों की जांच और चालान करें। कृषि विभाग को पराली जलाने के मामले पूर्ण रूप से रोकने, कूड़ा-कचरा जलने पर सख्ती बरतने के निर्देशत दिए हैं।
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करनाल में बुधवार से निर्माण संबंधी गतिविधियां बंद करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश 21 नवंबर तक लागू रहेंगे। वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी शिकंजा कसा जाएगा। कहीं पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- शैलेंद्र अरोड़ा, उपमंडल अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरियाणा
497 किसानों पर 12.40 लाख जुर्माना
इस बार जिले के असंध खंड में सबसे अधिक 220 मामले आगजनी के पाए गए हैं। निसिंग में 186, घरौंडा खंड में 140, करनाल खंड में 97, नीलोखेड़ी में 84 और इंद्री में 36 मामले मिले। कृषि विभाग की ओर से धान के अवशेष जलाने वाले 497 किसानों पर 12.40 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। धान कटाई के सीजन में अब तक सेटेलाइट के जरिए जिले में आगजनी की 955 सूचनाएं मिलीं। हालांकि जांच में 152 स्थानों पर आगजनी नहीं पाई गई। पराली जलाने वाले 82 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज करवाए गए हैं।
- डॉ. आदित्य प्रताप डबास, उपनिदेशक कृषि विभाग
प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रखने पर दें ध्यान
करनाल शहर में बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम 2.5 औसतन 275, न्यूनतम 105 और अधिकतम 345 के स्तर पर आंका गया। पीएम 10 का स्तर औसतन 180, न्यूनतम 105 और अधिकतम 434 आंका गया है। सांस लेने के लिए यह आबोहवा खतरनाक है। नागरिकों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रखने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान दें।
- डॉ. राकेश भारद्वाज, प्राचार्य एवं पर्यावरणविद
ये बरतें एहतियात
- सांस के रोगी सुबह धूप निकलने के बाद ही घर से निकलें।
- सूर्यास्त के बाद घर से न निकलें।
- घर से बाहर जाने पर मास्क लगाएं।
- जरूरी न हो तो बुजुर्ग घर से बाहर न निकलें।
- निरंतर व्यायाम और योगा घर में ही करें।
सांस रोगियों की संख्या बढ़ी
पिछले कई दिनों से ओपीडी में सांस रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज में पहले करीब 100 मरीज रोजाना जांच करवाने आते थे लेकिन अब इन मरीजों की संख्या 150 के करीब पहुंच गई है। ऐसे ही हालात शहर के नागरिक अस्पताल में हैं।

कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में सांस के रोगियों को तो परेशानी हो ही रही है। स्वस्थ व्यक्ति पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इस दौरान हवा में काफी संख्या में प्रदूषित कण होते हैं। जो सांस लेने के दौरान हमारी सांस नली और फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और वह वहां पर जम जाते हैं। जिसका दुष्प्रभाव लंबे समय बाद देखने को मिलता है। इसलिए सांस रोगियों के साथ-साथ स्वस्थ व्यक्ति को भी प्रदूषण से बचाव करना चाहिए।
-डॉ. अभिनव डागर, सांस रोग विशेषज्ञ, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल
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