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मुश्किलों को पार कर वतन वापसी को बेकरार
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हंगरी के बॉर्डर पर खड़े हर्ष और उसके अन्य साथी
- फोटो : Ambala
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नारायणगढ़। रूस द्वारा यूक्रेन पर किये गये हमले के बाद वहां मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रहे नारायणगढ़ के छात्र मुश्किलों को पार कर वतन वापसी के लिए बेकरार हैं। विपरीत परिस्थितियों के बाद कोई रोमानिया में तो कोई दूतावास में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। सुरक्षित जगहों पर शरण लेने की सूचना मिलने पर परिजनों ने भी राहत की सांस ली है।
वर्ष 2017 में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने गये छात्र हषवर्धन के पिता अधिवक्ता लाजपता भारांपुर ने बताया कि उनका बेटा अपने मामा के बेटे अरविंदर तथा मौसी के लड़के नरेन नरवाल व अन्य छात्रों के साथ ओडेसा से 1200 किलोमीटर दूर रेल में हंगरी बार्डर के निकट पहुंच गया था। वहां पर उनका इमीग्रेशन कार्ड भी बन गया था, लेकिन हंगरी बार्डर पर कर्मचारियों ने उनके कार्ड पर मोहर लगाने के लिए 100 से 150 डालर तक की डिमांड की थी। लाजपत के अनुसार उसके बेटे ने बताया कि पैसे देने के उपरांत भी उन कर्मचारियों द्वारा कार्ड पर मोहर न लगाये जाने की सूचना अन्य छात्रों से मिल गई थी। इस पर उन कर्मचारियों ने सारी रात उन्हें वहीं बार्डर पर खड़े रखा। बाद में उनका बेटा व अन्य छात्र बस द्वारा हंगरी के दूसरे बार्डर पर पहुंच गये, जहां पर अब वे भारतीय दूतावास से संपर्क करेंगें। लाजपत ने बताया कि उन्हें यह खुशी है कि जैसे भी हो उनका पुत्र व अन्य साथी अब सुरक्षित जोन में हैं और वे जल्द ही अपने परिवार के पास आ जाएंगे।
इसी प्रकार नारायणगढ़ निवासी प्रवीन वर्मा ने बताया कि उनका पुत्र अभिषेक वर्मा भी अपने कुछ साथियों के साथ शनिवार को बस में यूक्रेन के बार्डर चरनोविस्की पहुंच गया था, जहां से 16 घंटे का सफर तय कर सुकिवीया लैंड होते हुये रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचा है, जहां से जहाज की व्यवस्था होने पर शीघ्र ही वे वतन वापसी करेंगे। उन्होंने भी इस बात पर खुशी जताते हुये कहा कि परमात्मा का शुक्र है कि वे सही सलामत अपने वतन वापस आ रहे हैं।
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नारायणगढ़ हुड्डा सेक्टर-4 निवासी अशोक सैनी ने बताया कि उनका पुत्र हर्ष सैनी व उनके एक संबंधी की लड़की निधि सैनी आज से तीन दिन पूर्व जब ओडेसा में धमाके शुरू हुये थे तो वे अपने अन्य छात्रों के साथ मालडोवा के रास्ते यूक्रेन से निकल गये थे और अब रोमानिया में जहाज का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है जल्द उनकी वतन वापसी होगी।
दूसरी ओर यूक्रेन के खारकीव में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रहे नारायणगढ़ वासी नमन बंसल तथा अभय गुप्ता के अभिभावक वहां की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। नमन के अभिभावक विजय बंसल ने बताया कि जहां पर उनका पुत्र रह रहा है, वहां पर बेसमेंट के नीचे बंकर बने हुये हैं और खतरे का सायरन बजते ही वे बंकरों में चले जाते हैं। विजय बंसल के अनुसार उनके पुत्र ने उन्हें फोन पर बताया कि वे सुरक्षित हैं तथा फिलहाल खाने पीने का कोई संकट नहीं है।
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वर्ष 2017 में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने गये छात्र हषवर्धन के पिता अधिवक्ता लाजपता भारांपुर ने बताया कि उनका बेटा अपने मामा के बेटे अरविंदर तथा मौसी के लड़के नरेन नरवाल व अन्य छात्रों के साथ ओडेसा से 1200 किलोमीटर दूर रेल में हंगरी बार्डर के निकट पहुंच गया था। वहां पर उनका इमीग्रेशन कार्ड भी बन गया था, लेकिन हंगरी बार्डर पर कर्मचारियों ने उनके कार्ड पर मोहर लगाने के लिए 100 से 150 डालर तक की डिमांड की थी। लाजपत के अनुसार उसके बेटे ने बताया कि पैसे देने के उपरांत भी उन कर्मचारियों द्वारा कार्ड पर मोहर न लगाये जाने की सूचना अन्य छात्रों से मिल गई थी। इस पर उन कर्मचारियों ने सारी रात उन्हें वहीं बार्डर पर खड़े रखा। बाद में उनका बेटा व अन्य छात्र बस द्वारा हंगरी के दूसरे बार्डर पर पहुंच गये, जहां पर अब वे भारतीय दूतावास से संपर्क करेंगें। लाजपत ने बताया कि उन्हें यह खुशी है कि जैसे भी हो उनका पुत्र व अन्य साथी अब सुरक्षित जोन में हैं और वे जल्द ही अपने परिवार के पास आ जाएंगे।
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इसी प्रकार नारायणगढ़ निवासी प्रवीन वर्मा ने बताया कि उनका पुत्र अभिषेक वर्मा भी अपने कुछ साथियों के साथ शनिवार को बस में यूक्रेन के बार्डर चरनोविस्की पहुंच गया था, जहां से 16 घंटे का सफर तय कर सुकिवीया लैंड होते हुये रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचा है, जहां से जहाज की व्यवस्था होने पर शीघ्र ही वे वतन वापसी करेंगे। उन्होंने भी इस बात पर खुशी जताते हुये कहा कि परमात्मा का शुक्र है कि वे सही सलामत अपने वतन वापस आ रहे हैं।
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नारायणगढ़ हुड्डा सेक्टर-4 निवासी अशोक सैनी ने बताया कि उनका पुत्र हर्ष सैनी व उनके एक संबंधी की लड़की निधि सैनी आज से तीन दिन पूर्व जब ओडेसा में धमाके शुरू हुये थे तो वे अपने अन्य छात्रों के साथ मालडोवा के रास्ते यूक्रेन से निकल गये थे और अब रोमानिया में जहाज का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है जल्द उनकी वतन वापसी होगी।
दूसरी ओर यूक्रेन के खारकीव में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रहे नारायणगढ़ वासी नमन बंसल तथा अभय गुप्ता के अभिभावक वहां की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। नमन के अभिभावक विजय बंसल ने बताया कि जहां पर उनका पुत्र रह रहा है, वहां पर बेसमेंट के नीचे बंकर बने हुये हैं और खतरे का सायरन बजते ही वे बंकरों में चले जाते हैं। विजय बंसल के अनुसार उनके पुत्र ने उन्हें फोन पर बताया कि वे सुरक्षित हैं तथा फिलहाल खाने पीने का कोई संकट नहीं है।