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Ambala News: डीईईओ कार्यालय पर प्रदर्शन, खाना न बनाने की चेतावनी
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अंबाला सिटी। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए दोपहर का खाना बनाने वाली वर्कर्स वेतन को तरस रही हैं। अपने गुस्से व रोष को जाहिर करने के लिए मंगलवार को उन्होंने शिक्षा सदन पर प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर जिला प्रधान ललिता खन्ना के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में मांग की गई कि बढ़ती महंगाई के चलते मात्र सात हजार रुपये महीना में घर चलाना मुश्किल है। इसलिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये दिया जाए। मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव सोनिया ने कहा कि वर्कर्स को एक तो बहुत कम वेतन मिलता है, ऊपर से वह भी समय पर नहीं मिलता और जब मिलता है तो वह भी टुकड़ों में कभी राज्य शेयर व कभी केंद्र शेयर दिया जाता है।
यही नहीं यह कम वेतन भी साल में केवल दस महीनों का ही दिया जाता है। यह केंद्र व प्रदेश की बीजेपी सरकारों का गरीब महिलाओं के साथ घोर अन्याय है। इसलिए साल के पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। यूनियन नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि उनकी मांगो को जल्द लागू नहीं किया गया तो 9 जुलाई को वर्कर्स स्कूलों में खाना नहीं बनाएंगी।
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यह प्रदर्शन जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर जिला प्रधान ललिता खन्ना के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में मांग की गई कि बढ़ती महंगाई के चलते मात्र सात हजार रुपये महीना में घर चलाना मुश्किल है। इसलिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये दिया जाए। मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव सोनिया ने कहा कि वर्कर्स को एक तो बहुत कम वेतन मिलता है, ऊपर से वह भी समय पर नहीं मिलता और जब मिलता है तो वह भी टुकड़ों में कभी राज्य शेयर व कभी केंद्र शेयर दिया जाता है।
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यही नहीं यह कम वेतन भी साल में केवल दस महीनों का ही दिया जाता है। यह केंद्र व प्रदेश की बीजेपी सरकारों का गरीब महिलाओं के साथ घोर अन्याय है। इसलिए साल के पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। यूनियन नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि उनकी मांगो को जल्द लागू नहीं किया गया तो 9 जुलाई को वर्कर्स स्कूलों में खाना नहीं बनाएंगी।
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