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Ambala News: किसान आंदोलन खत्म होने के बाद भी पटरी पर नहीं आ रही ट्रेनों की लेटलतीफी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2024 05:31 AM IST
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Delay in trains not coming back on track even after farmers movement ends
ट्रेन के इंतजार में यूटीएस काउंटर के पास बैठे यात्री। संवाद
अंबाला। किसानों को अंबाला-लुधियाना रेल सेक्शन के शंभू रेलवे स्टेशन के नजदीक रेलवे ट्रैक से हटे आठ दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद वंदे भारत सहित मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की चाल सुधर नहीं पाई है जो कि दो से तीन घंटे की देरी से गंतव्य स्टेशनों पर पहुंच रही हैं। वहीं स्पेशल ट्रेनों का संचालन भी पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। न इन ट्रेनों के आने की सही जानकारी मिलती है और न जाने की। रेलवे ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को देखते हुए लगभग 10 स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की थी, जबकि कुछ अन्य स्पेशल ट्रेनों के संचालन का यात्री बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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करीब एक माह तक चले किसान आंदोलन के बाद उम्मीद की जा रही थी कि ट्रेनों का संचालन अब सुचारु हो जाएगा, लेकिन एक सप्ताह बाद ट्रेनों की घंटों लेटलतीफी से रेलयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को भी वंदे भारत सहित अधिकतर ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। ट्रेन नंबर-22440 कटरा-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस 2.20 घंटे और ट्रेन नंबर-22477 नई दिल्ली-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस 50 मिनट की देरी से अंबाला स्टेशन पर पहुंची। इसी प्रकार ट्रेन नंबर 04652 अमृतसर-जयनगर स्पेशल तीन घंटे, 12752 जम्मूतवी-नांदेड़ हमसफर चार घंटे, 14673 जयनगर-अमृतसर शहीद एक्सप्रेस 4.30 घंटे, 12715 नांदेड़-अमृतसर सचखंड एक्सप्रेस 1.30 घंटे, 15903 डिबरूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस 7.30 घंटे, 11077 पूना-जम्मूतवी झेलम एक्सप्रेस चार घंटे की देरी से गंतव्य स्टेशन पर पहुंची।
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ट्रेनों के देरी से चलने से न सिर्फ यात्रियों को परेशानी हो रही है बल्कि रेलवे को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।समस्या के समाधान को लेकर रेलवे अधिकारी लगातार मंथन कर रहे हैं कि वंदे भारत सहित अन्य ट्रेनों की चाल को किस प्रकार सुधारा जाए। इसके लिए पहले आउटर पर खड़े होने वाली ट्रेनों को बिना रुके अब प्लेटफार्म पर भेजना और पांच मिनट की जगह दो मिनट का ठहराव देकर ट्रेनों को गंंतव्य की तरफ भेजना अहम है। लेकिन कोशिशों के बाद भी ट्रेनें सही समय पर नहीं दौड़ पा रहीं। अगर वंदे भारत को समय पर चलाने की कोशिश की जाती है तो इसके पीछे आने वाली सात से आठ ट्रेनों पर असर पड़ जाता है और वो लेट हो जाती हैं।
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34 दिन चले किसान आंदोलन से ट्रेनों का संचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। अधिकांश ट्रेनें अब समय सारिणी अनुसार चलाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अभी कुछ के समय को लेकर परेशानी आ रही है। समस्या के समाधान के लिए विभागीय अधिकारी प्रयासरत हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर दौड़ती नजर आएंगी।

नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।
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ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान चल रही नौ जोड़ी स्पेशल ट्रेनें भी चार से पांच घंटे लेट



संवाद न्यूज एजेंसी



अंबाला। रेलवे ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को देखते हुए मई माह के पहले हफ्ते में ही नौ जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की थी, लेकिन किसान आंदोलन के कारण इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन गड़बड़ा गया था। इनमें से आधी से ज्यादा ट्रेनों को धूरी-जाखल के रास्ते चलाया गया तो कुछ को चंडीगढ़-साहनेवाल के रास्ते गंतव्य स्टेशन की तरफ भेजा गया।



रेलवे के अनुसार ट्रेन नंबर 04623/24 वाराणसी-कटरा-वाराणसी, 05005/06 गोरखपुर-अमृतसर-गोरखपुर स्पेशल, 04529/30 वाराणसी-बठिंडा-वाराणसी, 04679/80 गुवाहाटी-कटरा-गुवाहाटी, 05655/56 जम्मू-गोवाहाटी-जम्मू, 04681/82 कोलकाता-जम्मूतवी-कोलकाता ,09097/98 मुंबई-कटरा-मुंबई, 04075/76 नई दिल्ली-कटरा-नई दिलली, 05049/50 छपरा-अमृतसर-छपरा का संचालन किया जा रहा है। लेकिन इन ट्रेनों के समय पर संचालन को लेकर अभी रेलवे माथापच्ची कर रहा है क्योंकि ये सभी ट्रेनें भी चार से पांच घंटे की देरी से गंतव्य स्टेशनों पर पहुंच रही हैं।



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