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श्रमिक स्पेशल ट्रेन में व्यक्ति की मौत, कोरोना की दहशत के चलते 2 घंटे नहीं उतारा शव
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लुधियाना से अकबरपुर के लिए चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सफर कर रहे एक व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो गई। ट्रेन के कैंट स्टेशन पहुंचने पर जब प्रवासी श्रमिक की जांच की गई तो रेलवे डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पूछताछ के पास मृतक के पारिवारिक सदस्य के पास कोरोना जांच दस्तावेज नहीं थे, इसलिए जांच अधिकारी ने शव उतारने से इंकार कर दिया। इसके बाद ट्रेन में हड़कंप की स्थिति बच गई। कोरोना जांच का कोई दस्तावेज नहीं होने के कारण सभी सहम गए कि कहीं उसकी मौत कोरोना से तो नहीं हुई है। अलबत्ता ट्रेन लगभग 2 घंटे तक स्टेशन पर ही खड़ी रही। शव को स्वास्थ्य विभाग की टीम अपने साथ जिला नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया जहां उसका कोरोना टेस्ट किया जाएगा।
प्लेटफार्म नंबर दो पर रूकी थी ट्रेन वहीं डाक्टर ने की जांच
दरअसल ट्रेन नंबर 04426 लुधियाना-अकबरपुर मंगलवार शाम करीब 6 बजे लुधियाना रेलवे स्टेशन से अकबरपुर के लिए रवाना हुई थी। ट्रेन में लगभग 1100 प्रवासी श्रमिक सफर कर रहे थे। लेकिन एस-11 कोच में बैठे एक यात्री की अचानक तबीयत खराब हो गई। इस कोच में करीब 54 यात्री थे। लुधियाना से चलने के बाद ट्रेन का अस्थाई ठहराव कैंट रेलवे स्टेशन पर था। इसलिए बीमार यात्री को बीच रास्ते उपचार नहीं मिल सका। ट्रेन के कैंट स्टेशन पहुंची। स्टेशन मास्टर ने रेलवे डॉक्टर को संदेश भेजा कि ट्रेन में एक व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो गई है। कुछ ही देर में रेलवे डाक्टर प्लेटफार्म 2 पर पहुंच गए। जब उन्होंने बीमार व्यक्ति की जांच की तो उसे मृत घोषित कर दिया।
जीआरपी ने शव उठाने से किया इंकार
कोरोना की दहशत के कारण प्रवासी श्रमिक का शव 2 घंटे तक ट्रेन में ही पड़ा रहा। जांच अधिकारी ने बताया कि मृतक के पारिवारिक सदस्यों के पास कोरोना की जांच को लेकर स्वास्थय विभाग का कोई भी पहचान पत्र नहीं था, इसलिए रेलवे डाक्टर को जानकारी दी गई कि वह कोरोना की जांच करे, लेकिन रेलवे डाक्टर ने जांच करने से इंकार कर दिया। इसके बाद मामले की जानकारी डीसी कार्यालय और फिर सिविल अस्पताल में दी गई। इसके बाद शव को ट्रेन से उतारा गया और ट्रेन रात 9 बजकर 50 मिनट पर रवाना हुई।
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सफर करने से पहले स्वास्थ्य जांच जरूरी
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सफर करने वाले प्रवासी श्रमिकों को ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कराना और सिविल अस्पताल से कोरोना जांच करवाना अनिवार्य है। बिना स्वास्थ्य जांच के किसी भी श्रमिक को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं है। लेकिन लुधियाना से अकबरपुर के लिए चली ट्रेन में अधिकांश लोगों के पास कोरोना जांच से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं था।
लुधियाना से अंबाला पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक डेडबॉडी की सूचना मिली थी। रेलवे डाक्टर ने जांच के बाद प्रवासी श्रमिक को मृत घोषित किया था। मृतक की न तो कोरोना जांच हुई थी और न ही परिवार के पास स्वास्थ्य जांच का कोई प्रमाण पत्र था, इसलिए शव उतारने के लिए कोरोना जांच जरूरी समझी गई। इसकी जानकारी डीसी कार्यालय में दी गई थी।
धर्मबीर सिंह, जांच अधिकारी जीआरपी।
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प्लेटफार्म नंबर दो पर रूकी थी ट्रेन वहीं डाक्टर ने की जांच
दरअसल ट्रेन नंबर 04426 लुधियाना-अकबरपुर मंगलवार शाम करीब 6 बजे लुधियाना रेलवे स्टेशन से अकबरपुर के लिए रवाना हुई थी। ट्रेन में लगभग 1100 प्रवासी श्रमिक सफर कर रहे थे। लेकिन एस-11 कोच में बैठे एक यात्री की अचानक तबीयत खराब हो गई। इस कोच में करीब 54 यात्री थे। लुधियाना से चलने के बाद ट्रेन का अस्थाई ठहराव कैंट रेलवे स्टेशन पर था। इसलिए बीमार यात्री को बीच रास्ते उपचार नहीं मिल सका। ट्रेन के कैंट स्टेशन पहुंची। स्टेशन मास्टर ने रेलवे डॉक्टर को संदेश भेजा कि ट्रेन में एक व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो गई है। कुछ ही देर में रेलवे डाक्टर प्लेटफार्म 2 पर पहुंच गए। जब उन्होंने बीमार व्यक्ति की जांच की तो उसे मृत घोषित कर दिया।
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जीआरपी ने शव उठाने से किया इंकार
कोरोना की दहशत के कारण प्रवासी श्रमिक का शव 2 घंटे तक ट्रेन में ही पड़ा रहा। जांच अधिकारी ने बताया कि मृतक के पारिवारिक सदस्यों के पास कोरोना की जांच को लेकर स्वास्थय विभाग का कोई भी पहचान पत्र नहीं था, इसलिए रेलवे डाक्टर को जानकारी दी गई कि वह कोरोना की जांच करे, लेकिन रेलवे डाक्टर ने जांच करने से इंकार कर दिया। इसके बाद मामले की जानकारी डीसी कार्यालय और फिर सिविल अस्पताल में दी गई। इसके बाद शव को ट्रेन से उतारा गया और ट्रेन रात 9 बजकर 50 मिनट पर रवाना हुई।
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सफर करने से पहले स्वास्थ्य जांच जरूरी
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सफर करने वाले प्रवासी श्रमिकों को ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कराना और सिविल अस्पताल से कोरोना जांच करवाना अनिवार्य है। बिना स्वास्थ्य जांच के किसी भी श्रमिक को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं है। लेकिन लुधियाना से अकबरपुर के लिए चली ट्रेन में अधिकांश लोगों के पास कोरोना जांच से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं था।
लुधियाना से अंबाला पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक डेडबॉडी की सूचना मिली थी। रेलवे डाक्टर ने जांच के बाद प्रवासी श्रमिक को मृत घोषित किया था। मृतक की न तो कोरोना जांच हुई थी और न ही परिवार के पास स्वास्थ्य जांच का कोई प्रमाण पत्र था, इसलिए शव उतारने के लिए कोरोना जांच जरूरी समझी गई। इसकी जानकारी डीसी कार्यालय में दी गई थी।
धर्मबीर सिंह, जांच अधिकारी जीआरपी।