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अव्यवस्थाओं से दुखी डेयरी संचालकों ने किया धरना-प्रदर्शन
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। आखिरकार 17 साल बाद निगम व प्रशासन की बेरुखी का शिकार हो रहे डेयरी संचालकों का गुस्सा फूट ही पड़ा। सोमवार की सुबह 11 बजे गांव खतौली व कांवली के करीब दो दर्जन डेयरी संचालक निगम के बाहर एकत्रित हो गए। डेयरी कांप्लेक्स में शिफ्ट हुए संचालकों ने नारेबाजी कर जमकर भड़ास निकाली।
डेयरी संचालकों ने प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए निगम के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पूछा कि जब हमें 17 साल पहले शहर से बाहर का रास्ता दिखा दिया था तो शहर में जो डेयरियां चल रही हैं, उन्हें किस निगम अधिकारी का आशीर्वाद प्राप्त है। जबकि हमें निगम व स्थानीय प्रशासन ने शहर से गांव भेजकर एक बार भी मुड़कर नहीं देखा। डेयरी संचालकों का कहना है कि डेयरी कांप्लेक्स में न तो पानी की कोई निकासी का प्रबंध है न ही कोई सफाई कर्मचारी नियमित सफाई करने जा रहा है और न ही स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था विभाग द्वारा दी जा रही है।
डेयरी संचालकों ने कहा कि अगर जल्द ही समस्या का हल नहीं होता तो मजबूरन हमें परिवार सहित सड़कों पर उतरना पड़ेगा, जिससे कि 17 साल से कुंभकर्णी नींद में सोया नगर निगम नींद से जाग सके। इस मौके पर कांग्रेस पार्टी ने भी डेयरी संचालकों की मांग का समर्थन करते हुए प्रदर्शन में भाग लिया।
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हमें वर्ष 2004 में स्थानीय प्रशासन ने शहर को स्वच्छ बनाने के लिए सहयोग मांगा था कि शहर में चल रही डेयरियों को खतौली व कांवली में शिफ्ट किया जाएगा। जहां डेयरी संचालकों को शहर की तर्ज पर सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। लेकिन 17 सालों से हम नरक भरी जिंदगी जी रहे हैं। जबकि निगम के चहेते अभी भी शहर में बेधड़क डेयरियां चला रहे हैं। - कुलदीप सिंह गुल्लू, पूर्व प्रधान डेयरी संचालक यूनियन।
गांव कांवली में डेयरी कांप्लेक्स बने करीब डेढ़ दशक होने को है लेकिन अभी भी डेयरी संचालक प्रशासन द्वारा घोषित सुविधाओं का इंतजार कर रहा है। कांवली में न तो नाले बने हैं और बिजली के खंभों से लटकती बिजली की तारें हादसों को न्यौता दे रही हैं। जबकि प्रशासन ने हमें 17 साल पहले एक वादा किया था कि डेयरी कांप्लेक्स में हमें शहर जैसी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। - ऋषिपाल, उप प्रधान कांवली डेयरी संचालक यूनियन।
पिछले 17 सालों से विभाग की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। जब हमें शहर से बाहर निकाला गया था उस समय हमें स्थानीय प्रशासन ने कई सपने दिखाए थे। हमें उस समय बताया गया था कि अगर हम शहर से बाहर जाकर डेयरी चलाएंगे तो हमें न सिर्फ सभी सुविधाएं दी जाएंगी बल्कि हमारा कारोबार भी बढ़ेगा। आज इस बात को 17 साल हो गए लेकिन हमारे हालात दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। - राजा, डेयरी संचालक।
खतौली डेयरी कांप्लेेक्स की स्थिति तो ऐसी है कि अगर अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकल कर आकर देखें तो बाबू लोग 5 मिनट से ज्यादा डेयरियों में नहीं टिक सकते। फिर हम तो डेढ़ दशक से वहां रह रहे हैं। बरसात के मौसम में तो कांप्लेक्स की सड़कें भी लबालब भर जाती हैं। फिर न सड़क का पता चलता है न नाले का ऐसे में अगर कोई गिर जाए तो शायद मर ही न जाए। - मुलख राज, डेयरी संचालक।
जब से शहर से बाहर गए हैं तब से काम का बुरा हाल हो गया है। पहले सोचा था कि शायद शहर से बाहर जाकर काम में सुधार होगा। लेकिन यहां तो समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। आधे अधूरे नाले, लटकती बिजली की तारें किसी को भी अपना शिकार बना सकती हैं। कई बार शिकायत देने के बाद भी डेयरियों में आकर समस्या का समाधान करने की जहमत कोई अधिकारी उठाने को राजी नहीं है। - मोती लाल, डेयरी संचालक।
हम तो काम काजी आदमी हैं, दूूध निकाल कर बेचना ही हमारा कर्म है। यह तो विभाग की बेरुखी का नतीजा है कि आज हमें अपनी जायज मांगों को लेकर सांकेतिक धरना देना पड़ रहा है। अगर अब भी निगम कुंभकर्णी नींद से नहीं जागा तो अगला धरना निगम के बाहर नहीं बल्कि निगम आयुक्त के कमरे के बाहर होगा। - चमन लाल, डेयरी संचालक।
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अंबाला सिटी। आखिरकार 17 साल बाद निगम व प्रशासन की बेरुखी का शिकार हो रहे डेयरी संचालकों का गुस्सा फूट ही पड़ा। सोमवार की सुबह 11 बजे गांव खतौली व कांवली के करीब दो दर्जन डेयरी संचालक निगम के बाहर एकत्रित हो गए। डेयरी कांप्लेक्स में शिफ्ट हुए संचालकों ने नारेबाजी कर जमकर भड़ास निकाली।
डेयरी संचालकों ने प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए निगम के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पूछा कि जब हमें 17 साल पहले शहर से बाहर का रास्ता दिखा दिया था तो शहर में जो डेयरियां चल रही हैं, उन्हें किस निगम अधिकारी का आशीर्वाद प्राप्त है। जबकि हमें निगम व स्थानीय प्रशासन ने शहर से गांव भेजकर एक बार भी मुड़कर नहीं देखा। डेयरी संचालकों का कहना है कि डेयरी कांप्लेक्स में न तो पानी की कोई निकासी का प्रबंध है न ही कोई सफाई कर्मचारी नियमित सफाई करने जा रहा है और न ही स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था विभाग द्वारा दी जा रही है।
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डेयरी संचालकों ने कहा कि अगर जल्द ही समस्या का हल नहीं होता तो मजबूरन हमें परिवार सहित सड़कों पर उतरना पड़ेगा, जिससे कि 17 साल से कुंभकर्णी नींद में सोया नगर निगम नींद से जाग सके। इस मौके पर कांग्रेस पार्टी ने भी डेयरी संचालकों की मांग का समर्थन करते हुए प्रदर्शन में भाग लिया।
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हमें वर्ष 2004 में स्थानीय प्रशासन ने शहर को स्वच्छ बनाने के लिए सहयोग मांगा था कि शहर में चल रही डेयरियों को खतौली व कांवली में शिफ्ट किया जाएगा। जहां डेयरी संचालकों को शहर की तर्ज पर सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। लेकिन 17 सालों से हम नरक भरी जिंदगी जी रहे हैं। जबकि निगम के चहेते अभी भी शहर में बेधड़क डेयरियां चला रहे हैं। - कुलदीप सिंह गुल्लू, पूर्व प्रधान डेयरी संचालक यूनियन।
गांव कांवली में डेयरी कांप्लेक्स बने करीब डेढ़ दशक होने को है लेकिन अभी भी डेयरी संचालक प्रशासन द्वारा घोषित सुविधाओं का इंतजार कर रहा है। कांवली में न तो नाले बने हैं और बिजली के खंभों से लटकती बिजली की तारें हादसों को न्यौता दे रही हैं। जबकि प्रशासन ने हमें 17 साल पहले एक वादा किया था कि डेयरी कांप्लेक्स में हमें शहर जैसी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। - ऋषिपाल, उप प्रधान कांवली डेयरी संचालक यूनियन।
पिछले 17 सालों से विभाग की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। जब हमें शहर से बाहर निकाला गया था उस समय हमें स्थानीय प्रशासन ने कई सपने दिखाए थे। हमें उस समय बताया गया था कि अगर हम शहर से बाहर जाकर डेयरी चलाएंगे तो हमें न सिर्फ सभी सुविधाएं दी जाएंगी बल्कि हमारा कारोबार भी बढ़ेगा। आज इस बात को 17 साल हो गए लेकिन हमारे हालात दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। - राजा, डेयरी संचालक।
खतौली डेयरी कांप्लेेक्स की स्थिति तो ऐसी है कि अगर अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकल कर आकर देखें तो बाबू लोग 5 मिनट से ज्यादा डेयरियों में नहीं टिक सकते। फिर हम तो डेढ़ दशक से वहां रह रहे हैं। बरसात के मौसम में तो कांप्लेक्स की सड़कें भी लबालब भर जाती हैं। फिर न सड़क का पता चलता है न नाले का ऐसे में अगर कोई गिर जाए तो शायद मर ही न जाए। - मुलख राज, डेयरी संचालक।
जब से शहर से बाहर गए हैं तब से काम का बुरा हाल हो गया है। पहले सोचा था कि शायद शहर से बाहर जाकर काम में सुधार होगा। लेकिन यहां तो समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। आधे अधूरे नाले, लटकती बिजली की तारें किसी को भी अपना शिकार बना सकती हैं। कई बार शिकायत देने के बाद भी डेयरियों में आकर समस्या का समाधान करने की जहमत कोई अधिकारी उठाने को राजी नहीं है। - मोती लाल, डेयरी संचालक।
हम तो काम काजी आदमी हैं, दूूध निकाल कर बेचना ही हमारा कर्म है। यह तो विभाग की बेरुखी का नतीजा है कि आज हमें अपनी जायज मांगों को लेकर सांकेतिक धरना देना पड़ रहा है। अगर अब भी निगम कुंभकर्णी नींद से नहीं जागा तो अगला धरना निगम के बाहर नहीं बल्कि निगम आयुक्त के कमरे के बाहर होगा। - चमन लाल, डेयरी संचालक।