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Ambala News: हिट एंड रन कानून को वापस लेने के लिए प्रदर्शन
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हिट-एंड-रन कानून को वापस लेने और ड्राइवर कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग को लेकर दी ट्रांसपोर्
अंबाला सिटी। हिट एंड रन कानून को वापस लेने और ड्राइवर कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग पर द ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन हरियाणा ने राष्ट्रपति के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। यह कानून वापस नहीं लेने पर 16 फरवरी को देशभर में चक्का जाम करने की चेतावनी दी।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) से संबंधित द ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के राज्य उपप्रधान मुनीर और जिला सचिव हरदीप के नेतृत्व में वाहन चालक शिक्षा सदन से प्रदर्शन करते हुए डीसी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार कानून के अंतर्गत 10 साल की सजा व सात लाख रुपए जुर्माने को वापस नहीं लेती तो आने वाले चुनावों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
यूनियन के राज्य महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि भारी भरकम सजा व जुर्माने की वजह से ड्राइवरों के बीच डर बना हुआ है। देश व प्रदेश में अधिकतर दुर्घटनाओं के लिए सड़कों की खराब स्थिति, पृथक्करण की कमी, मौसम की स्थिति समेत कई अन्य कारक मुख्य जिम्मेवार होते हैं। यही नहीं सरकार ने नेशनल परमिट वाहनों में डबल ड्राइवर का प्रावधान भी हटा दिया है। ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के जिला कमेटी सदस्य हरपाल, सदीक मोहम्मद और फारुख, सीटू जिला प्रधान बाबू राम व उप प्रधान रमेश नन्हेड़ा ने संबोधित किया। प्रदर्शन में रोडवेज नेता इंद्र सिंह बधाना, रमेश श्योकंद व सर्वजीत सिंह, एसकेएस के नेता महावीर पाई, रविंद्र शर्मा, बलबीर, संदीप मेहता, सीटू नेता बरखा राम, निर्मल सिंह, राम दास व भूपिंद्र भी शामिल रहे।
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ज्ञापन के माध्यम से यह रही मुख्य मांग
ड्राइवरों पर 10 साल की सजा और सात लाख रुपए जुर्माने के कानून को वापस लेने। सभी ड्राइवरों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार लागू करने, दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु होने पर आश्रितों को 20 लाख रुपए व अपंगता की स्थिति में 10 लाख रुपए मुआवजा देने, बढ़ाए गए चालान के रेट वापस लेने, वाहनों से टोल टैक्स वसूलने पर रोक लगाने, ईएसआई व पीएफ लागू करने, 60 साल की उम्र के बाद दस हजार पेंशन लागू करने, केरल सरकार की तर्ज पर ड्राइवरों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग की गई है।
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सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) से संबंधित द ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के राज्य उपप्रधान मुनीर और जिला सचिव हरदीप के नेतृत्व में वाहन चालक शिक्षा सदन से प्रदर्शन करते हुए डीसी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार कानून के अंतर्गत 10 साल की सजा व सात लाख रुपए जुर्माने को वापस नहीं लेती तो आने वाले चुनावों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
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यूनियन के राज्य महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि भारी भरकम सजा व जुर्माने की वजह से ड्राइवरों के बीच डर बना हुआ है। देश व प्रदेश में अधिकतर दुर्घटनाओं के लिए सड़कों की खराब स्थिति, पृथक्करण की कमी, मौसम की स्थिति समेत कई अन्य कारक मुख्य जिम्मेवार होते हैं। यही नहीं सरकार ने नेशनल परमिट वाहनों में डबल ड्राइवर का प्रावधान भी हटा दिया है। ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के जिला कमेटी सदस्य हरपाल, सदीक मोहम्मद और फारुख, सीटू जिला प्रधान बाबू राम व उप प्रधान रमेश नन्हेड़ा ने संबोधित किया। प्रदर्शन में रोडवेज नेता इंद्र सिंह बधाना, रमेश श्योकंद व सर्वजीत सिंह, एसकेएस के नेता महावीर पाई, रविंद्र शर्मा, बलबीर, संदीप मेहता, सीटू नेता बरखा राम, निर्मल सिंह, राम दास व भूपिंद्र भी शामिल रहे।
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ज्ञापन के माध्यम से यह रही मुख्य मांग
ड्राइवरों पर 10 साल की सजा और सात लाख रुपए जुर्माने के कानून को वापस लेने। सभी ड्राइवरों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार लागू करने, दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु होने पर आश्रितों को 20 लाख रुपए व अपंगता की स्थिति में 10 लाख रुपए मुआवजा देने, बढ़ाए गए चालान के रेट वापस लेने, वाहनों से टोल टैक्स वसूलने पर रोक लगाने, ईएसआई व पीएफ लागू करने, 60 साल की उम्र के बाद दस हजार पेंशन लागू करने, केरल सरकार की तर्ज पर ड्राइवरों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग की गई है।