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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के खेल का खुलासा
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Fri, 25 Dec 2015 12:52 AM IST
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हरियाणा के सेहत मंत्री अनिल विज के शहर में जिला स्वास्थ्य महकमे से फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य महकमे के कर्मचारी बाहरी लोगों से मिलकर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी करवाते थे। इतना ही नहीं इस खेल में बड़े अफसरों की आंखों मे भी धूल झोंकी जाती थी।
फर्जीवाड़ा चलाने वाले गिरोह ये सदस्य सब डिविजिनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और चीफ मेडिकल अफसर (सीएमओ) की फर्जी मुहर तैयार कर जाली बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने का काम करते थे, लेकिन शक होने के बाद सीएमओ ने इस बड़े फर्जीवाड़े को पकड़ लिया और इसका खुलासा किया। इस मामले में पहले स्वास्थ्य महकमे के दो फार्मासिस्ट पकड़ में आ चुके हैं और अब तीन और लोगों की संलिप्तता इस फर्जीवाड़े में बताई जा रही है।
सीएमओ ने इस मामले में अब तीन आरोपियों के खिलाफ इलाका पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है। पुलिस ने अभी आरोपियों को हिरासत में नहीं लिया है, लेकिन सीएमओ की ओर से फर्जीवाड़े संबंधी दस्तावेजों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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इस तरह हुआ फर्जीवाड़े के खेल का खुलास
स्वास्थ्य महकमे के वे कर्मचारी जिनकी ड्यूटियां बर्थ एंड डेथ सर्टिफिकेट बनाने में लगती थी, वे लोग बाहरी एजेंटों के साथ मिलकर इस खेल को खेलते थे। दरअसल, ये खेल उन जन्म प्रमाण पत्रों में खेला जाता था, जिन्हे आवेदक समय पर नहीं बनवा पाते थे। निर्धारित समय सीमा से लेट होने वाले बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए लिए बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए किए गए आवेदन पर एसडीएम कार्यालय की जांच, सीएमओ कार्यालय व जनप्रतिनिधि की संस्तुति, पहचान पत्र, वोटर कार्ड, राशन कार्ड उपलब्ध करवाना इत्यादि कई औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता था। यानी संबंधित केस की एक विशेष फाइल तैयार होती थी और सघन जांच के बाद स्वास्थ्य महकमा संबंधित प्रार्थी को बर्थ सर्टिफिकेट जारी करता था। लेकिन इस तमाम प्रक्रिया में एक लंबा वक्त लगता था। इसलिए एजेंटों ने स्वास्थ्य महकमे के ही कर्मचारियों के साथ मिलकर जल्दी ऐसे जाली बर्थ सर्टिफिकेट बनाने का काम शुरू किया। एजेंट जानते थे कि इस काम में एसडीएम कार्यालय की वेरीफिकेशन और सीएमओ कार्यालय की संस्तुति में सबसे बड़ा पंगा पड़ता है और इसी चैनल पर फाइल कई दिनों तक लटकती है। इसलिए फर्जीवाड़ा करने वाले इस गिरोह के सदस्यों ने एसडीएम और सीएमओ की ही जाली मुहर तैयार करवा ली।
स्वास्थ्य महकमे के कर्मचारियों के साथ मिलकर एजेंट इन्ही एसडीएम और सीएमओ की फर्जी मुहर के बदौलत दोनों कार्यालयों की औपचारिकताओं को फटाफट निपटा कर फर्जी ढंग से सर्टिफिकेट जारी कर देते थे। सर्टिफिकेट परर एसडीएम और सीएमओ की मुहर तो फर्जी होती थी, साथ ही हस्ताक्षर भी फर्जी होते थे। इस तरह से ये गिरोह हजारों रुपये आवेदक से ऐंठकर उन्हें जल्द फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर देते थे और बर्थ एंड डेथ रजिस्टर में भी कटिंग कर आवेदक की जन्मतिथि व नाम दर्ज कर देते थे।
आरटीआई के जरिए पैदा हुआ शक
इस फर्जीवाड़े के खेल का खुलासा शायद ही हो पाता, लेकिन एक ग्रामीण द्वारा लगाई गई आरटीआई ने सीएमओ के जहन में ऐसा शक पैदा कर दिया कि इस मामले की जांच में जाते-जाते सीएमओ इस फर्जीवाड़े तक पहुंच गए। इस आरटीआई में इसी तरह से बने एक बर्थ सर्टिफिकेट की जानकारी मांगी गई थी। सीएमओ कार्यालय से जब आरटीआई का जवाब देते वक्त रिकार्ड को खंगाला गया तो फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का खेल सामने आया। उसके बाद सीएमओ ने सघन जांच करवाई और इसी तरह से बने पांच फर्जी सर्टिफिकेट पकड़े। जिसके बाद सीएमओ ने इसकी जानकारी डीसी व डीसीपी को देते हुए इस मामले की सघन जांच की मांग की। अब तक इस मामले में पांच लोग इस फर्जीवाड़े में लपेटे में आ चुके हैं। तीन के खिलाफ पुलिस ने अब केस दर्ज कर लिया है। लेकिन अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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स्वास्थ्य महकमा कई दिनों इस मामले की आंतरिक जांच करवा रहा था। जांच में पांच फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मिले। इसकी जानकारी डीसी व डीसीपी को दे दी गई थी। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है।
-डाक्टर विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला
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सीएमओ ने शिकायत दी थी कि एसडीएम व सीएमओ की फर्जी मुहर बनाकर बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इस मामले में उनकी शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अभी जांच कर रही है, जल्द ही आरोपी काबू किए जाएंगे।
-सब इंस्पेक्टर महल सिंह, जांच अधिकारी अंबाला पुलिस-
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फर्जीवाड़ा चलाने वाले गिरोह ये सदस्य सब डिविजिनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और चीफ मेडिकल अफसर (सीएमओ) की फर्जी मुहर तैयार कर जाली बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने का काम करते थे, लेकिन शक होने के बाद सीएमओ ने इस बड़े फर्जीवाड़े को पकड़ लिया और इसका खुलासा किया। इस मामले में पहले स्वास्थ्य महकमे के दो फार्मासिस्ट पकड़ में आ चुके हैं और अब तीन और लोगों की संलिप्तता इस फर्जीवाड़े में बताई जा रही है।
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सीएमओ ने इस मामले में अब तीन आरोपियों के खिलाफ इलाका पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है। पुलिस ने अभी आरोपियों को हिरासत में नहीं लिया है, लेकिन सीएमओ की ओर से फर्जीवाड़े संबंधी दस्तावेजों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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इस तरह हुआ फर्जीवाड़े के खेल का खुलास
स्वास्थ्य महकमे के वे कर्मचारी जिनकी ड्यूटियां बर्थ एंड डेथ सर्टिफिकेट बनाने में लगती थी, वे लोग बाहरी एजेंटों के साथ मिलकर इस खेल को खेलते थे। दरअसल, ये खेल उन जन्म प्रमाण पत्रों में खेला जाता था, जिन्हे आवेदक समय पर नहीं बनवा पाते थे। निर्धारित समय सीमा से लेट होने वाले बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए लिए बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए किए गए आवेदन पर एसडीएम कार्यालय की जांच, सीएमओ कार्यालय व जनप्रतिनिधि की संस्तुति, पहचान पत्र, वोटर कार्ड, राशन कार्ड उपलब्ध करवाना इत्यादि कई औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता था। यानी संबंधित केस की एक विशेष फाइल तैयार होती थी और सघन जांच के बाद स्वास्थ्य महकमा संबंधित प्रार्थी को बर्थ सर्टिफिकेट जारी करता था। लेकिन इस तमाम प्रक्रिया में एक लंबा वक्त लगता था। इसलिए एजेंटों ने स्वास्थ्य महकमे के ही कर्मचारियों के साथ मिलकर जल्दी ऐसे जाली बर्थ सर्टिफिकेट बनाने का काम शुरू किया। एजेंट जानते थे कि इस काम में एसडीएम कार्यालय की वेरीफिकेशन और सीएमओ कार्यालय की संस्तुति में सबसे बड़ा पंगा पड़ता है और इसी चैनल पर फाइल कई दिनों तक लटकती है। इसलिए फर्जीवाड़ा करने वाले इस गिरोह के सदस्यों ने एसडीएम और सीएमओ की ही जाली मुहर तैयार करवा ली।
स्वास्थ्य महकमे के कर्मचारियों के साथ मिलकर एजेंट इन्ही एसडीएम और सीएमओ की फर्जी मुहर के बदौलत दोनों कार्यालयों की औपचारिकताओं को फटाफट निपटा कर फर्जी ढंग से सर्टिफिकेट जारी कर देते थे। सर्टिफिकेट परर एसडीएम और सीएमओ की मुहर तो फर्जी होती थी, साथ ही हस्ताक्षर भी फर्जी होते थे। इस तरह से ये गिरोह हजारों रुपये आवेदक से ऐंठकर उन्हें जल्द फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर देते थे और बर्थ एंड डेथ रजिस्टर में भी कटिंग कर आवेदक की जन्मतिथि व नाम दर्ज कर देते थे।
आरटीआई के जरिए पैदा हुआ शक
इस फर्जीवाड़े के खेल का खुलासा शायद ही हो पाता, लेकिन एक ग्रामीण द्वारा लगाई गई आरटीआई ने सीएमओ के जहन में ऐसा शक पैदा कर दिया कि इस मामले की जांच में जाते-जाते सीएमओ इस फर्जीवाड़े तक पहुंच गए। इस आरटीआई में इसी तरह से बने एक बर्थ सर्टिफिकेट की जानकारी मांगी गई थी। सीएमओ कार्यालय से जब आरटीआई का जवाब देते वक्त रिकार्ड को खंगाला गया तो फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का खेल सामने आया। उसके बाद सीएमओ ने सघन जांच करवाई और इसी तरह से बने पांच फर्जी सर्टिफिकेट पकड़े। जिसके बाद सीएमओ ने इसकी जानकारी डीसी व डीसीपी को देते हुए इस मामले की सघन जांच की मांग की। अब तक इस मामले में पांच लोग इस फर्जीवाड़े में लपेटे में आ चुके हैं। तीन के खिलाफ पुलिस ने अब केस दर्ज कर लिया है। लेकिन अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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स्वास्थ्य महकमा कई दिनों इस मामले की आंतरिक जांच करवा रहा था। जांच में पांच फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मिले। इसकी जानकारी डीसी व डीसीपी को दे दी गई थी। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है।
-डाक्टर विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला
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सीएमओ ने शिकायत दी थी कि एसडीएम व सीएमओ की फर्जी मुहर बनाकर बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इस मामले में उनकी शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अभी जांच कर रही है, जल्द ही आरोपी काबू किए जाएंगे।
-सब इंस्पेक्टर महल सिंह, जांच अधिकारी अंबाला पुलिस-
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