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फर्जी निकला राबर्ट पैवेलियन का लैंड सर्टिफिकेट
अंबाला ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sun, 15 May 2016 01:19 AM IST
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लैंड पावेलियन
- फोटो : amar ujala
धोबीघाट के साथ की सरकारी लीज लैंड (करीबन 4.16 एकड़) सर्वे नंबर 164-सी (राबर्ट पैविलियन) का बनवाया गया सर्टिफिकेट जाली है। जिस विभाग से इस सर्टिफिकेट को जारी करवाया गया उस विभाग में इस जमीन से संबंधित कोई रिकार्ड ही नहीं है। इतना ही नहीं इस सर्टिफिकेट पर नायब तहसीलदार एवं रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर और मुहर भी जाली हैं।
यह खुलासा अंबाला पुलिस ने अपनी जांच में कर दिया है और अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में भी पेश कर दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब छह जून को होगी। दूसरी ओर इस मामले में एक निजी ट्रस्ट के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करने वाले रिटायर्ड मास्टर मदन लाल शर्मा ने भी अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। इसमें उन्होंने एक निजी ट्रस्ट पर करोड़ों रुपये लीज लैंड पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया है, जबकि निजी ट्रस्ट के सदस्यों की मानें तो ट्रस्ट पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
यह है घपलेबाजी का मामला
अदालत को याचिकाकर्ता ने बताया है कि ये मैदान अंग्रेजों ने फुटबाल खिलाड़ियों को दिया था और रिकार्ड में भी इसे राबर्ट पैवेलियन के नाम से जाना जाता है। आज भी वहां इसी नाम का बोर्ड भी अंकित है। साथ ही इसकी देखरेख का जिम्मा एक ट्रस्ट को दिया गया था। लेकिन कुछ लोगों ने ट्रस्ट से ट्रस्ट सोसायटी बना ली और रिकार्ड में छेड़छाड़ कर इस बेशकीमती सरकारी लीज की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
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याचिकाकर्ता ने बताया कि इसी कड़ी में इसी जमीन पर कब्जा कायम रखने की नीयत से नायब तहसीलदार एवं सब रजिस्ट्रार कार्यालय से एक लैंड सर्टिफिकेट जारी करवाया गया। अदालत को बताया गया कि इस सर्टिफिकेट को मिलीभगत से जाली ढंग से तैयार करवाया गया है। इसके बाद अदालत ने इस मामले में पुलिस से जांच रिपोर्ट मांगी थी। उल्लेखनीय है कि इस गड़बड़झाले के मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
पुलिस रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा
अंबाला पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने इस फर्जी लैंड सर्टिफिकेट मामले में संबंधित तत्कालीन नायब तहसील, पटवारी, शिकायतकर्ता व आरोपी ट्रस्ट सदस्यों के बयान दर्ज किए हैं। इतना ही नहीं इस मामले में पहले डीसी अंबाला के आदेश पर जिला राजस्व अधिकारी की ओर से की गई जांच रिपोर्ट का भी अवलोकन किया गया है। इसमें यह पाया गया है कि जो लैंड सर्टिफिकेट संबंधित जमीन का जारी करवाया गया है, उस पर न तो तिथि अंकित है और न ही क्रमांक नंबर।
दूसरी ओर पुलिस ने तत्कालीन नायब तहसीलदार व जिला राजस्व अधिकारी से इस मसले पर पूछताछ की। इसमें नायब तहसीलदार को जब पुलिस ने ये सर्टिफिकेट दिखाया गया तो उन्होंने साफ कहा कि न तो लैंड सर्टिफिकेट पर किए गए हस्ताक्षर उनके हैं और न ही मुहर। जबकि जिला राजस्व अधिकारी ने भी अपने बयानों में कहा है कि सभी तथ्यों को जांचने व पक्षों से पूछताछ के बाद ये सर्टिफिकेट जाली पाया गया है।
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यह खुलासा अंबाला पुलिस ने अपनी जांच में कर दिया है और अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में भी पेश कर दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब छह जून को होगी। दूसरी ओर इस मामले में एक निजी ट्रस्ट के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करने वाले रिटायर्ड मास्टर मदन लाल शर्मा ने भी अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। इसमें उन्होंने एक निजी ट्रस्ट पर करोड़ों रुपये लीज लैंड पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया है, जबकि निजी ट्रस्ट के सदस्यों की मानें तो ट्रस्ट पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
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यह है घपलेबाजी का मामला
अदालत को याचिकाकर्ता ने बताया है कि ये मैदान अंग्रेजों ने फुटबाल खिलाड़ियों को दिया था और रिकार्ड में भी इसे राबर्ट पैवेलियन के नाम से जाना जाता है। आज भी वहां इसी नाम का बोर्ड भी अंकित है। साथ ही इसकी देखरेख का जिम्मा एक ट्रस्ट को दिया गया था। लेकिन कुछ लोगों ने ट्रस्ट से ट्रस्ट सोसायटी बना ली और रिकार्ड में छेड़छाड़ कर इस बेशकीमती सरकारी लीज की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
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याचिकाकर्ता ने बताया कि इसी कड़ी में इसी जमीन पर कब्जा कायम रखने की नीयत से नायब तहसीलदार एवं सब रजिस्ट्रार कार्यालय से एक लैंड सर्टिफिकेट जारी करवाया गया। अदालत को बताया गया कि इस सर्टिफिकेट को मिलीभगत से जाली ढंग से तैयार करवाया गया है। इसके बाद अदालत ने इस मामले में पुलिस से जांच रिपोर्ट मांगी थी। उल्लेखनीय है कि इस गड़बड़झाले के मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
पुलिस रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा
अंबाला पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने इस फर्जी लैंड सर्टिफिकेट मामले में संबंधित तत्कालीन नायब तहसील, पटवारी, शिकायतकर्ता व आरोपी ट्रस्ट सदस्यों के बयान दर्ज किए हैं। इतना ही नहीं इस मामले में पहले डीसी अंबाला के आदेश पर जिला राजस्व अधिकारी की ओर से की गई जांच रिपोर्ट का भी अवलोकन किया गया है। इसमें यह पाया गया है कि जो लैंड सर्टिफिकेट संबंधित जमीन का जारी करवाया गया है, उस पर न तो तिथि अंकित है और न ही क्रमांक नंबर।
दूसरी ओर पुलिस ने तत्कालीन नायब तहसीलदार व जिला राजस्व अधिकारी से इस मसले पर पूछताछ की। इसमें नायब तहसीलदार को जब पुलिस ने ये सर्टिफिकेट दिखाया गया तो उन्होंने साफ कहा कि न तो लैंड सर्टिफिकेट पर किए गए हस्ताक्षर उनके हैं और न ही मुहर। जबकि जिला राजस्व अधिकारी ने भी अपने बयानों में कहा है कि सभी तथ्यों को जांचने व पक्षों से पूछताछ के बाद ये सर्टिफिकेट जाली पाया गया है।