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किडनी फेल होने से हुई दूसरे कोरोना पॉजिटिव मरीज की पीजीआई में 8वें दिन मौत
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पीजीआई चंडीगढ़ सेक्टर 32 में कोरोना से जंग लड़ रही 62 वर्षीय संतोष शनिवार को हार गई। संतोष ने 8वें दिन उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। किडनी फैल होने के कारण शहर के रतनगढ़ निवासी संतोष की मौत हो गई। इस तरह अब अंबाला में कोरोना से कुल दो मौत हो चुकी हैं जबकि 11 कोरोना पॉजिटिव को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। एक का पीजीआई चंडीगढ़ -12 में उपचार चल रहा है। जिले की बात करें तो अभी तक जिले में 2447 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 2206 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। 230 सैंपल जांच के लिए शनिवार को भेजे गये हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की 96 मोबाइल टीमों ने अलग-अलग एरिया में जाकर शनिवार को कुल 28 हजार 957 मरीजों के स्वास्थ्य को जांच। इनमें से 15 के सैंपल लिये गये।
जिनकी मौत हुई दोनों 60 से ज्यादा उम्रदराज और गंभीर बीमारियों से थे ग्रस्ति
बता दें कि कोरोना से मारे गए राज्य और अंबाला के पहले मृतक हरजीत सिंह उम्रदराज तो थे ही साथ ही साथ उनके हृदय की भी बाईपास सर्जरी हो चुकी थी। इतना ही नहीं उनकी किडनी भी फेल हो गई थी। इसी तरह शनिवार को मृतक संतोष कुमारी को भी पिछले 15 साल से शुगर था और तीन साल से छावनी में उनकी डायलिसिस चल रही थी। सप्ताह में संतोष को तीन बार डायलिसिस करवानी पड़ रही थी। अलबत्ता दोनों की मौत में कोरोना का तो नाम हो गया लेकिन मौत का कारण किडनी फेल होना मुख्य रहा।
आज चंडीगढ़ में होगा अंतिम संस्कार
कोरोना पॉजिटिव संतोष का आज चंडीगढ़ में ही परिजनों की अगुवाई में अंतिम संस्कार किया जाएगा। शनिवार को परिवार के 5 सदस्य अंबाला से चंडीगढ़ रवाना हुए थे। इससे पहले हरजीत सिंह का भी चंडीगढ़ में ही अंतिम संस्कार हुआ था।
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42 साल का ठरवा निवासी अभी स्थिर
वहीं डायलिसिस वाले 42 साल के ठरवा निवासी व्यक्ति की हालत अभी स्थिर बनी हुई है। उसे 10 दिन पहले पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। वहीं पर उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इस मरीज को भी शुगर पिछले 15 साल से है और किडनी भी खराब हो चुकी हैं। हालांकि इसकी उम्र कम होने के कारण बचने की संभावनाएं स्वास्थ्य विभाग लगाए हुए है।
कंस्ट्रक्शन पर रोक, मजदूरों की रिपोर्ट आई नेगेटिव
वहीं छावनी में डाक्टरों के आवास बन रहे जिन छह मजदूरों की रैपिड टेस्ट रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी उसे थ्रोट टेस्ट की रिपोर्ट ने सिरे से नकार दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने राहत भरी सांस ली। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर यहां रह रहे 100 से ज्यादा सभी मजदूरों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए ताकि कहीं कोई चूक न हो सके। वहीं दूसरी और पीडब्ल्यूडी ने चौकसी बरतते हुए यहां पर कंस्ट्रक्शन का काम बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी जरूरी
कोरोना से जंग जितने के लिए मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी जरूरी है। 65 वर्षीय सलीम नूर जिसे वास्तव में कोरोना था उसने पीजीआई में आसानी से कोरोना को मात दे दी थी। हालांकि उसे बाद में दूसरी बीमारी के कारण भर्ती रहना पड़ा था। ऐसे मरीज जोकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं जैसे डायलिसिस वाले, ह्दय और कैंसर रोगी, एचआईवी इत्यादि ऐसे मरीजों को अपने घर से बाहर ऐसे हालात में नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बिल्कुल खत्म हो चुकी होती है। ऐसे मरीज बहुत दूर से भी कोई भी वायरस ग्रहण कर सकते हैं।
संतोष कुमारी की किडनी फेल होने के कारण मौत हो गई। हालांकि वह कोरोना से भी पीड़ित थी। शनिवार को हमने 234 सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज किसी भी हाल में घर से न निकलें।
डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन।
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जिनकी मौत हुई दोनों 60 से ज्यादा उम्रदराज और गंभीर बीमारियों से थे ग्रस्ति
बता दें कि कोरोना से मारे गए राज्य और अंबाला के पहले मृतक हरजीत सिंह उम्रदराज तो थे ही साथ ही साथ उनके हृदय की भी बाईपास सर्जरी हो चुकी थी। इतना ही नहीं उनकी किडनी भी फेल हो गई थी। इसी तरह शनिवार को मृतक संतोष कुमारी को भी पिछले 15 साल से शुगर था और तीन साल से छावनी में उनकी डायलिसिस चल रही थी। सप्ताह में संतोष को तीन बार डायलिसिस करवानी पड़ रही थी। अलबत्ता दोनों की मौत में कोरोना का तो नाम हो गया लेकिन मौत का कारण किडनी फेल होना मुख्य रहा।
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आज चंडीगढ़ में होगा अंतिम संस्कार
कोरोना पॉजिटिव संतोष का आज चंडीगढ़ में ही परिजनों की अगुवाई में अंतिम संस्कार किया जाएगा। शनिवार को परिवार के 5 सदस्य अंबाला से चंडीगढ़ रवाना हुए थे। इससे पहले हरजीत सिंह का भी चंडीगढ़ में ही अंतिम संस्कार हुआ था।
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42 साल का ठरवा निवासी अभी स्थिर
वहीं डायलिसिस वाले 42 साल के ठरवा निवासी व्यक्ति की हालत अभी स्थिर बनी हुई है। उसे 10 दिन पहले पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। वहीं पर उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इस मरीज को भी शुगर पिछले 15 साल से है और किडनी भी खराब हो चुकी हैं। हालांकि इसकी उम्र कम होने के कारण बचने की संभावनाएं स्वास्थ्य विभाग लगाए हुए है।
कंस्ट्रक्शन पर रोक, मजदूरों की रिपोर्ट आई नेगेटिव
वहीं छावनी में डाक्टरों के आवास बन रहे जिन छह मजदूरों की रैपिड टेस्ट रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी उसे थ्रोट टेस्ट की रिपोर्ट ने सिरे से नकार दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने राहत भरी सांस ली। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर यहां रह रहे 100 से ज्यादा सभी मजदूरों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए ताकि कहीं कोई चूक न हो सके। वहीं दूसरी और पीडब्ल्यूडी ने चौकसी बरतते हुए यहां पर कंस्ट्रक्शन का काम बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी जरूरी
कोरोना से जंग जितने के लिए मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी जरूरी है। 65 वर्षीय सलीम नूर जिसे वास्तव में कोरोना था उसने पीजीआई में आसानी से कोरोना को मात दे दी थी। हालांकि उसे बाद में दूसरी बीमारी के कारण भर्ती रहना पड़ा था। ऐसे मरीज जोकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं जैसे डायलिसिस वाले, ह्दय और कैंसर रोगी, एचआईवी इत्यादि ऐसे मरीजों को अपने घर से बाहर ऐसे हालात में नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बिल्कुल खत्म हो चुकी होती है। ऐसे मरीज बहुत दूर से भी कोई भी वायरस ग्रहण कर सकते हैं।
संतोष कुमारी की किडनी फेल होने के कारण मौत हो गई। हालांकि वह कोरोना से भी पीड़ित थी। शनिवार को हमने 234 सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज किसी भी हाल में घर से न निकलें।
डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन।