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Ambala News: अदालत ने खारिज की हरियाणा लाइव स्टॉक बोर्ड की अपील, किसान को मिलेगी बकाया राशि
Sat, 25 Jul 2026 06:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 25 Jul 2026 06:05 AM IST
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अंबाला सिटी। अदालत ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत देरी से सब्सिडी देने के मामले में हरियाणा लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड को करारा झटका दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अरविंद कुमार बांसुल की अदालत ने निचले कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए बोर्ड की अपील को खारिज कर दिया और पीड़ित किसान के हक में फैसला सुनाया है।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि किसी लाभार्थी ने योजना के आधार पर कदम उठाया है और निवेश किया है, तो सरकार या बोर्ड किसी योजना को भूतलक्षी प्रभाव से बंद करके उसके अधिकार नहीं छीन सकता। अस्थायी रूप से बजट न मिलना किसी पात्र लाभार्थी का हक मारने का आधार नहीं बन सकता।
क्या है पूरा मामला
अंबाला जिले की बराड़ा तहसील के गांव कालपी निवासी किसान ऋषिपाल ने वर्ष 2013-14 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 10 लाख रुपये के ऋण से डेयरी फार्म स्थापित किया था। योजना के नियमों के अनुसार, लाभार्थी किसान को लागत पर कुल 50 फीसदी सब्सिडी मिलनी थी। इसमें से 25 प्रतिशत सब्सिडी पशुपालन विभाग और 25 प्रतिशत हरियाणा लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड को जारी करनी थी।
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किसान ऋषिपाल को 27 जून 2016 को पशुपालन विभाग द्वारा तो उनकी 25 प्रतिशत की हिस्सा राशि जारी कर दी गई, लेकिन लाइव स्टॉक बोर्ड ने अपने हिस्से की 25 फीसदी सब्सिडी (2,61,250 रुपये) रोक ली। बार-बार गुहार लगाने और कानूनी नोटिस देने के बाद भी जब राशि नहीं मिली, तो किसान ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। ब्यूरो
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बोर्ड की दलीलें कोर्ट में नहीं टिकीं
पिछली सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कंवल कुमार की अदालत ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ हरियाणा लाइव स्टॉक बोर्ड और पशुपालन विभाग ने जिला अदालत में प्रथम अपील दायर की। बोर्ड के वकील ने दलील दी कि वर्ष 2014-15 में सरकार ने योजना बंद कर दी थी और बजट न मिलने के कारण सब्सिडी जारी नहीं की जा सकी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से नकार दिया।
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अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि किसी लाभार्थी ने योजना के आधार पर कदम उठाया है और निवेश किया है, तो सरकार या बोर्ड किसी योजना को भूतलक्षी प्रभाव से बंद करके उसके अधिकार नहीं छीन सकता। अस्थायी रूप से बजट न मिलना किसी पात्र लाभार्थी का हक मारने का आधार नहीं बन सकता।
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क्या है पूरा मामला
अंबाला जिले की बराड़ा तहसील के गांव कालपी निवासी किसान ऋषिपाल ने वर्ष 2013-14 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 10 लाख रुपये के ऋण से डेयरी फार्म स्थापित किया था। योजना के नियमों के अनुसार, लाभार्थी किसान को लागत पर कुल 50 फीसदी सब्सिडी मिलनी थी। इसमें से 25 प्रतिशत सब्सिडी पशुपालन विभाग और 25 प्रतिशत हरियाणा लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड को जारी करनी थी।
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किसान ऋषिपाल को 27 जून 2016 को पशुपालन विभाग द्वारा तो उनकी 25 प्रतिशत की हिस्सा राशि जारी कर दी गई, लेकिन लाइव स्टॉक बोर्ड ने अपने हिस्से की 25 फीसदी सब्सिडी (2,61,250 रुपये) रोक ली। बार-बार गुहार लगाने और कानूनी नोटिस देने के बाद भी जब राशि नहीं मिली, तो किसान ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। ब्यूरो
बोर्ड की दलीलें कोर्ट में नहीं टिकीं
पिछली सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कंवल कुमार की अदालत ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ हरियाणा लाइव स्टॉक बोर्ड और पशुपालन विभाग ने जिला अदालत में प्रथम अपील दायर की। बोर्ड के वकील ने दलील दी कि वर्ष 2014-15 में सरकार ने योजना बंद कर दी थी और बजट न मिलने के कारण सब्सिडी जारी नहीं की जा सकी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से नकार दिया।