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Ambala News: औद्योगिक क्षेत्र में डेढ़ माह बाद शुरू होगा चहारदीवारी का निर्माण
Sat, 13 Sep 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:31 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। औद्योगिक क्षेत्र में मानसून काे देखते हुए पहले ही चहारदीवारी बनाने की योजना बना ली गई थी लेकिन प्रक्रिया इतनी धीमी रही कि काम शुरू ही नहीं हो सका। इस चहारदीवारी के लिए बाकायदा आईआईटी रुड़की से विशेष डिजायन तैयार कराया गया था। दीवार पर काम कराने को एचएसआईआईडीसी ने दो महीने से पहले ही प्रक्रिया भी शुरू कर दी, पर यह काम नहीं हो सका। अब बताया जा रहा है कि लगभग डेढ़ माह बाद चहारदीवारी बनाने का काम शुरू किया जाएगा, इसके बाद अगले मानसून में औद्योगिक क्षेत्र में कारोबारियों काे कम से कम नदियों से आने वाले जलभराव की समस्या से नहीं गुजरना होगा।
13.55 करोड़ रुपये की आएगी लागत
आईआईटी रुड़की के विशेष दल ने अंबाला कैंट के औद्योगिक क्षेत्र में कुछ समय पहले ही दौरा किया था, इसके बाद उन्होंने चहारदीवारी के डिजाइन और उसमें प्रयोग होने वाली सामग्री को साझा किया था, इसके तहत चहारदीवारी को आरसीसी मैटेरियल का बनाया जाना प्रस्तावित है। इस चहारदीवारी को बनाने में एचएसआईआईडीसी 13.55 करोड़ रुपये खर्च करेगा। अधिकारियों की मानें तो दो माह पहले टेंडर जारी कर दिया गया था, जिसमें 21 एजेंसियों ने अपनी रुचि दिखाई थी। अब एचएसआईआईडीसी के मुख्यालय स्तर से इस परियोजना को स्वीकृति मिलनी है। इसके बाद ही यहां पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
ईंटों की दीवार नहीं है कामयाब, इस बार भी टूटी
एचएसआईआईडीसी के इंजीनियर बताते हैं कि जिस प्रकार से वर्ष 2023 व वर्तमान में टांगरी नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया है उस परिस्थिति में औद्योगिक क्षेत्र को विशेष आरसीसी की दीवार ही बचा सकती है। नदी में जलस्तर के रिकाॅर्ड टूट रहे हैं। इस बार भी औद्योगिक क्षेत्र में कुछ लोगों ने बाढ़ से बचाव के लिए दीवारें करा रखी थीं मगर पानी के बहाव ने उन्हें तोड़ दिया। यहां पर ईंटों की दीवार कामयाब नहीं है, इसीलिए आईआईटी के विशेषज्ञों ने भी आरसीसी की दीवार को उपयुक्त बताया है। इस दीवार के बनने के बाद क्षेत्र के भीतर एचएसआईआईडीसी के क्षेत्र में लगे तीन पंप जलभराव को नियंत्रित कर सकते हैं। वहीं नदी के पानी के क्षेत्र में जाने का रास्ता भी पीछे से नहीं बनेगा। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई अभी भी क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई है, क्योंकि लोगों का आरोप है कि राजमार्ग के बनने से औद्योगिक क्षेत्र नीचा हो गया, जिससे मुख्य मार्ग से भी जलभराव हो सकता है।
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हमारी कोशिश है कि औद्योगिक क्षेत्र की चहारदीवारी के काम को जल्द से जल्द शुरू कराया जाए। हमें उम्मीद है कि डेढ़ माह तक काम को शुरू करा दिया जाएगा।-- अजय बंसल, डीजीएम, एचएसआईआईडीसी
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अंबाला। औद्योगिक क्षेत्र में मानसून काे देखते हुए पहले ही चहारदीवारी बनाने की योजना बना ली गई थी लेकिन प्रक्रिया इतनी धीमी रही कि काम शुरू ही नहीं हो सका। इस चहारदीवारी के लिए बाकायदा आईआईटी रुड़की से विशेष डिजायन तैयार कराया गया था। दीवार पर काम कराने को एचएसआईआईडीसी ने दो महीने से पहले ही प्रक्रिया भी शुरू कर दी, पर यह काम नहीं हो सका। अब बताया जा रहा है कि लगभग डेढ़ माह बाद चहारदीवारी बनाने का काम शुरू किया जाएगा, इसके बाद अगले मानसून में औद्योगिक क्षेत्र में कारोबारियों काे कम से कम नदियों से आने वाले जलभराव की समस्या से नहीं गुजरना होगा।
13.55 करोड़ रुपये की आएगी लागत
आईआईटी रुड़की के विशेष दल ने अंबाला कैंट के औद्योगिक क्षेत्र में कुछ समय पहले ही दौरा किया था, इसके बाद उन्होंने चहारदीवारी के डिजाइन और उसमें प्रयोग होने वाली सामग्री को साझा किया था, इसके तहत चहारदीवारी को आरसीसी मैटेरियल का बनाया जाना प्रस्तावित है। इस चहारदीवारी को बनाने में एचएसआईआईडीसी 13.55 करोड़ रुपये खर्च करेगा। अधिकारियों की मानें तो दो माह पहले टेंडर जारी कर दिया गया था, जिसमें 21 एजेंसियों ने अपनी रुचि दिखाई थी। अब एचएसआईआईडीसी के मुख्यालय स्तर से इस परियोजना को स्वीकृति मिलनी है। इसके बाद ही यहां पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
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ईंटों की दीवार नहीं है कामयाब, इस बार भी टूटी
एचएसआईआईडीसी के इंजीनियर बताते हैं कि जिस प्रकार से वर्ष 2023 व वर्तमान में टांगरी नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया है उस परिस्थिति में औद्योगिक क्षेत्र को विशेष आरसीसी की दीवार ही बचा सकती है। नदी में जलस्तर के रिकाॅर्ड टूट रहे हैं। इस बार भी औद्योगिक क्षेत्र में कुछ लोगों ने बाढ़ से बचाव के लिए दीवारें करा रखी थीं मगर पानी के बहाव ने उन्हें तोड़ दिया। यहां पर ईंटों की दीवार कामयाब नहीं है, इसीलिए आईआईटी के विशेषज्ञों ने भी आरसीसी की दीवार को उपयुक्त बताया है। इस दीवार के बनने के बाद क्षेत्र के भीतर एचएसआईआईडीसी के क्षेत्र में लगे तीन पंप जलभराव को नियंत्रित कर सकते हैं। वहीं नदी के पानी के क्षेत्र में जाने का रास्ता भी पीछे से नहीं बनेगा। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई अभी भी क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई है, क्योंकि लोगों का आरोप है कि राजमार्ग के बनने से औद्योगिक क्षेत्र नीचा हो गया, जिससे मुख्य मार्ग से भी जलभराव हो सकता है।
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हमारी कोशिश है कि औद्योगिक क्षेत्र की चहारदीवारी के काम को जल्द से जल्द शुरू कराया जाए। हमें उम्मीद है कि डेढ़ माह तक काम को शुरू करा दिया जाएगा।