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Ambala News: मुआवजे में गड़बड़ी में अधिकारियों समेत नौ पर शिकायत दर्ज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Oct 2023 01:02 AM IST
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Complaint filed against nine including officers for irregularities in compensation
अंबाला। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने 9.70 करोड़ के बढ़े भूमि मुआवजे के फर्जी वितरण में अंबाला के जिला राजस्व अधिकारी कैप्टन विनोद शर्मा समेत दो डीआरओ और एक नायब तहसीलदार सहित नौ लोगों पर शिकायत दर्ज की है। ये मुआवजा वर्ष 2015 में बांटा गया था।
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इसमें विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) के फैसलों का हवाला दिया था, जो हरियाणा में भूमि अधिग्रहण मानदंडों से जुड़े नहीं थे। अंबाला के सेक्टर नौ और 10 के विकास के लिए सरकार ने 1980 के दशक में भूमि अधिग्रहण किया था। इसके बाद मुआवजा दिया। मुआवजे को हाईकोर्ट के आदेश काे आधार बनाकर बढ़ाया गया। बाद में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई थी, जिसे खारिज कर दिया था।
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ईडी ने लगाए ये आरोप

मामले में यह भी सामने आया कि पूर्व डीआरओ एमएस सांगवान, तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी (एलएओ), पंचकूला ने ''''अपात्र'''' लाभार्थियों बलजीत कौर और अन्य को 1.39 करोड़ रुपये के बढ़े मुआवजे की मंजूरी के लिए वर्कशीट भेज दी। ईडी ने आरोप लगाया कि इस मामले में धूप सिंह, जिन्हें एलएओ कार्यालय में नायब तहसीलदार के रूप में नियुक्त किया था। अपने कार्यकाल के बाद भी अपने पद पर बने रहे और बिना किसी अधिकार के गणना और सिफारिश पत्र पर हस्ताक्षर किए।
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एक अन्य मामले में एलएओ कार्यालय में तत्कालीन कानूनगो राजबीर सिंह ने बलजीत सिंह और अन्य के लिए 1.10 करोड़ और 8.60 करोड़ रुपये की बढ़ी मुआवजे की वर्कशीट पर कार्रवाई की और धूप सिंह को भेज दिया। उन्होंने इसे आगे कमल नयन को सत्यापित करने के लिए चिह्नित किया। ईडी ने कहा कि वर्तमान अंबाला डीआरओ कैप्टन विनोद शर्मा जो उस समय पंचकूला में एलएओ थे, ने संबंधित अयोग्य लाभार्थियों को बढ़े मुआवजे का वितरण किया। इस मामले में अपराध की आय के रूप में आरोपियों की 9.45 करोड़ रुपये की संपत्ति और बैंक एफडी संलग्न की।
एक लाभार्थी ने तहसीलदार को जमा कराए 42.19 लाख

इस मामले में ईडी ने आरोप लगाया कि सभी तथ्यों, विशेषकर एसएलपी की जांच करना सांगवान का काम था। उन्होंने कार्यकाल की समाप्ति के बाद भी धूप सिंह को पद पर रहने दिया। राजबीर ने ईडी को बताया कि सांगवान ने ही उन्हें गलत एसएलपी करने का निर्देश दिए थे। जांच के दौरान फर्जी वितरण के छह लाभार्थियों की मृत्यु हो गई, इसलिए उन्हें आरोपी के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया है। इसके अलावा, 10 में से केवल एक लाभार्थी तरणदीप सिंह ने रिकवरी नोटिस प्राप्त होने पर अब तक 42.19 लाख रुपये तहसीलदार, अंबाला को वापस कर दिए हैं।









जब यह मामला सामने आया तब एफआईआर दर्ज की गई थी। मेरा भी नाम इसमें था। इसके बाद मामला विजिलेंस में गया। जांच हुई तो मुझे दोषी नहीं माना। चालान भी पेश हो गया। विभागीय जांच में भी उन पर आरोप सिद्ध नहीं हुए। यह बात मैंने प्रवर्तन निदेशालय को बताई थी। अब अगर वह कोर्ट में पूछेंगे तो वे अपनी बेगुनाही के सुबूत दिखा दूंगा। अंतिम चालान में आरोपियों की सूची से मेरा नाम निकाल दिया है। इस चालान को कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया। इसलिए ईडी को आरोपियों में मेरा नाम नहीं देना चाहिए। जब मेरा नाम शेड्यूल ऑफिस या एफआईआर में है ही नहीं तो ईडी को मेरा नाम अन्य आरोपियों के साथ नहीं देना चाहिए था।
-कैप्टन विनोद शर्मा, जिला राजस्व अधिकारी, अंबाला
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