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Ambala News: कोच दयाराम 70 साल की उम्र में बच्चों को सिखा रहे कुश्ती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2024 06:16 AM IST
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Coach Dayaram is teaching wrestling to children at the age of 70.
महावीर अखाड़ा के कोच दयानंद।
संदीप कुमार
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अंबाला। बचपन में फुटबाल से शुरू हुआ सफर कुश्ती तक पहुंचा, जुनून ऐसा जागा की फुटबाल छोड़ कुश्ती अपना ली। सरकारी नौकरी के साथ साथ कश्मीर से कन्याकुमारी तक सैकड़ों दंगल लड़े, अधिकतर में जीत मिली और कम में हारे।
कुश्ती का जज्बा ऐसा कि नौकरी के दौरान ही खिलाड़ियों को दांव पेंच सिखाने शुरू कर दिए। यह कहानी है 70 वर्षीय दयाराम की। इन्हें 30 वर्ष हो गए हैं, छावनी के बारह क्राॅस रोड स्थित महावीर अखाड़ा में बच्चों को कुश्ती के दांव पेच के गुर सिखाते हुए। उनके सिखाए हुए बहुत से बच्चे हरियाणा अखाड़ा चैंपियनशिप में स्वर्ण, कांस्य और सिल्वर पदक जीत चुके हैं।
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कमजोर की मदद करने से शुरू हुई कुश्ती
कोच दयाराम बताते हैं कि वह फुटबाल के बहुत अच्छे खिलाड़ी थे। उन्होंने देखा कि कुछ लोग कमजोर को बदमाशी दिखा रहे थे। यह बात उनके दिल में बैठ गई कि ताकत के बिना कुछ भी नहीं है। इसके बाद उन्होंने हनुमान अखाड़ा के गुरु जुगल किशोर से कुश्ती सीखी। इसके बाद व दंगल में भाग लेने लग गए। इस दौरान उनकी पोस्टल विभाग में नौकरी लग गई। नौकरी के दौरान अधिकारियों ने काफी मदद की और वह प्रैक्टिस के साथ साथ कुश्ती के लिए जयपुर, शोलापुर, मुंबई, गोवा, लखनऊ व अन्य जगह गए। जहां पर उन्होंने ऑल इंडिया की तरफ से कुश्ती लड़ी और जीत हासिल की। कई बार वह चंडीगढ़ में होने वाले ईनामी दंगल में गए और कुश्ती लड़ी। इसके बाद वह पोस्टल विभाग से सब पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त हो गए।
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मजबूरी में युवा छोड़ देते हैं कुश्ती
उन्होने बताया कि ग्वाल मंडी, खटीक मंडी, वाल्मीकि बस्ती से कई पहलवान निकलते हैं। यहां से आने वाले कई बच्चों को वह तैयार तो करते हैं। मगर विडंबना यह है कि गरीबी और मजबूरी के चलते युवा बीच में ही कुश्ती छोड़ देते है और उनके माता पिता उन्हें काम पर लगा देते हैं। वर्ष 2017-18 के दौरान छावनी में हरियाणा अखाड़ा चैंपियनशिप हुई थी। इसमें उनके अखाड़ा से सुमित ने एक स्वर्ण, एक कांस्य राॅक्सी और सिल्वर भी राॅक्सी ने जीता। इससे पहले हुई प्रतियोगिता में विक्की ने सिल्वर पदक जीता था। वहीं गृहमंत्री अनिल विज के खेलमंत्री रहते अंबाला छावनी में इनामी दंगल हुआ था। इस दंगल में उनके अखाड़ा के पहलवान रॉक्सी ने दिल्ली के पहलवान को हराकर हनुमान जी की गदा जीती थी।

महावीर अखाड़ा के कोच दयानंद।

महावीर अखाड़ा के कोच दयानंद।

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