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संक्रमित शवों के दाह संस्कार के लिए स्थापित किए जाएंगे सीएनजी-पीएनजी बेस ह्यूमन क्रीमिटोरियम
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कोरोना वायरस के विस्तार के साथ ही राज्य में संक्रमण से मरने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी वजह से राज्य सरकार ने संक्रमित शवों के दाह संस्कार की व्यवस्था के लिए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हर नगर निगम एरिया में सरकार ने ऐसे शवों के संस्कार के लिए सीएनजी/पीएनजी बेस ह्यूमन क्रीमिटोरियम स्थापित करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए चार एजेंसियों का चयन किया गया है। शमशान घाटों में भवन निर्माण के साथ मशीनों की सप्लाई और उन्हें स्थापित करने व टेस्टिंग का काम भी एजेंसियों को ही करना होगा। 45 दिन में ये क्रीमिटोरियम तैयार करने होंगे।
चिह्नित शमशानघाटों में इलेक्ट्रिक मशीनें लगाने का काम तुरंत शुरू हो इसके लिए सभी निकाय अधिकारियों को जरूरी आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। दरअसल राज्य सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया है ताकि कोरोना संक्रमित शवों के दाह संस्कार का कहीं भी विरोध न हो। ऐसे मरीजों के दाह संस्कार में काफी दिक्कतें आ रही हैं। संस्कार के विरोध को लेकर पुलिस व लोगों में तीखी झड़पें हो रही हैं। अंबाला कैंट में भी ऐसी घटना हो चुकी है।
इन एजेंसियों को दी सरकार ने जिम्मेदारी : राज्य सरकार की ओर से ह्यूमन क्रीमिटोरियम निर्माण के लिए चार एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए अर्बन लोकल बॉडी डिपार्टमेंट की ओर से ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किया गया था। टेंडर के जरिये ही झारखंड की मैसर्ज बीरेंद्र कुुमार गुप्ता, मोहाली की मैसर्ज कांता इलेक्टिकल्स इंडिया लिमिटेड, अंबाला के बराड़ा की मैसर्ज राधिका इंटरप्राइेजेज और दिल्ली की मैसर्ज कंसल कंस्ट्रक्शन कंपनी शामिल है। प्रत्येक ह्यूमन क्रीमिटोरियम के निर्माण के लिए रेट तय होने के बाद अब सभी नगर निगमों, नगर परिषदों व नगरपालिकाओं को ऐसे शमशानघाटों का चयन करने के आदेश दिए गए हैं जहां इन्हें जल्द स्थापित किया जा सके। सभी एजेंसियों को 45 दिन के भीतर इनका निर्माण करना होगा।
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दाह संस्कार से संक्रमण का खतरा : कोरोन संक्रमित शवों का लकड़ी से दाह संस्कार में संक्रमण का खतरा है। संस्कार करने वाले कर्मचारियों और पुजारी भी ऐसे शवों का संस्कार करवाने में कतराते हैं। चांदपुरा गांव में तो ग्रामीणों ने एक संदिग्ध मरीज के संस्कार पर कड़ा विरोध करते हुए पुलिस पर हमला कर दिया था। जान बचाने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग करनी पड़ी थी। इसके बाद 100 से ज्यादा लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से कई लोग अभी जेल में बंद है। लेकिन सीएनजी से चलित मशीनों से संक्रमण का खतरा दूर हो जाएगा साथ ही लोगों को भी विरोध नहीं करना पड़ेगा। मशीन से प्रत्येक शव के संस्कार में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। जबकि लकड़ी से शव को जलाने में मशक्कत करनी पड़ती है।
कोरोना से दो लोगों की हो चुकी है मौत : अंबाला में कोरोना से अभी तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि उपचार के दौरान दोनों मरीजों ने चंडीगढ़ में दम तोड़ा था। इसी वजह से इनके शवों का संस्कार भी वहीं कर दिया गया। इनमें एक बुजुर्ग कैंट की टिंबर मार्केट का था जबकि दूसरी बुुजुर्ग महिला सिटी के रत्नगढ़ की रहने वाली थी। यहां कोरोना मरीजों की संख्या का आंकड़ा 50 पार कर चुका है। हालांकि इनमें से ज्यादातर मरीज कोरोना को मात देकर तंदरुस्त हो चुके हैं।
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चिह्नित शमशानघाटों में इलेक्ट्रिक मशीनें लगाने का काम तुरंत शुरू हो इसके लिए सभी निकाय अधिकारियों को जरूरी आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। दरअसल राज्य सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया है ताकि कोरोना संक्रमित शवों के दाह संस्कार का कहीं भी विरोध न हो। ऐसे मरीजों के दाह संस्कार में काफी दिक्कतें आ रही हैं। संस्कार के विरोध को लेकर पुलिस व लोगों में तीखी झड़पें हो रही हैं। अंबाला कैंट में भी ऐसी घटना हो चुकी है।
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इन एजेंसियों को दी सरकार ने जिम्मेदारी : राज्य सरकार की ओर से ह्यूमन क्रीमिटोरियम निर्माण के लिए चार एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए अर्बन लोकल बॉडी डिपार्टमेंट की ओर से ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किया गया था। टेंडर के जरिये ही झारखंड की मैसर्ज बीरेंद्र कुुमार गुप्ता, मोहाली की मैसर्ज कांता इलेक्टिकल्स इंडिया लिमिटेड, अंबाला के बराड़ा की मैसर्ज राधिका इंटरप्राइेजेज और दिल्ली की मैसर्ज कंसल कंस्ट्रक्शन कंपनी शामिल है। प्रत्येक ह्यूमन क्रीमिटोरियम के निर्माण के लिए रेट तय होने के बाद अब सभी नगर निगमों, नगर परिषदों व नगरपालिकाओं को ऐसे शमशानघाटों का चयन करने के आदेश दिए गए हैं जहां इन्हें जल्द स्थापित किया जा सके। सभी एजेंसियों को 45 दिन के भीतर इनका निर्माण करना होगा।
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दाह संस्कार से संक्रमण का खतरा : कोरोन संक्रमित शवों का लकड़ी से दाह संस्कार में संक्रमण का खतरा है। संस्कार करने वाले कर्मचारियों और पुजारी भी ऐसे शवों का संस्कार करवाने में कतराते हैं। चांदपुरा गांव में तो ग्रामीणों ने एक संदिग्ध मरीज के संस्कार पर कड़ा विरोध करते हुए पुलिस पर हमला कर दिया था। जान बचाने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग करनी पड़ी थी। इसके बाद 100 से ज्यादा लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से कई लोग अभी जेल में बंद है। लेकिन सीएनजी से चलित मशीनों से संक्रमण का खतरा दूर हो जाएगा साथ ही लोगों को भी विरोध नहीं करना पड़ेगा। मशीन से प्रत्येक शव के संस्कार में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। जबकि लकड़ी से शव को जलाने में मशक्कत करनी पड़ती है।
कोरोना से दो लोगों की हो चुकी है मौत : अंबाला में कोरोना से अभी तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि उपचार के दौरान दोनों मरीजों ने चंडीगढ़ में दम तोड़ा था। इसी वजह से इनके शवों का संस्कार भी वहीं कर दिया गया। इनमें एक बुजुर्ग कैंट की टिंबर मार्केट का था जबकि दूसरी बुुजुर्ग महिला सिटी के रत्नगढ़ की रहने वाली थी। यहां कोरोना मरीजों की संख्या का आंकड़ा 50 पार कर चुका है। हालांकि इनमें से ज्यादातर मरीज कोरोना को मात देकर तंदरुस्त हो चुके हैं।