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19 करोड़ डोर टू डोर पर खर्च, 1200 कर्मचारियों की फौज अलग फिर भी यह हैं स्वच्छ अंबाला की तस्वीरें
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डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन पर नगर निगम ने वर्ष 2018 में 19 करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन 60 प्रतिशत घरों से एक भी दिन कूड़ा नहीं उठा। ठेकेदार ने इसके लिए 220 कर्मचारी ट्विन सिटी में लगाने का दावा किया था। ठेकेदार के इन कर्मचारियों के अलावा शहर और छावनी की सफाई के लिए 1200 कर्मचारी निगम के अलग से रहे। लेकिन गंदगी है कि साफ होने का नाम ही नहीं ले रही। दरअसल डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन ठेकेदार को ठेका देने के बाद किसी भी शिकायत की नगर निगम के अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। लिहाजा ठेकेदार का हौसला बढ़ता गया। हालात यह रहे कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा अंबाला डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का महाघोटाला कहने के बाद हुई जांच रिपोर्ट को भी रफा-दफा कर दिया गया। लिहाजा एक भी दिन ऐसा नहीं आया जब अंबाला में स्वच्छता देखने को मिली हो।
अब विज से ही आस
चाहे शहर नगर निगम की बात हो फिर छावनी परिषद सभी जगह गंदगी ही गंदगी है। अधिकारियों ने गंदगी के मामले पर मौन धारण कर लिया है। एक महीने से पहले ही स्वच्छता एप की हवा निकल गई और यह बनाए जाने के बावजूद लोगों को कूड़े से निजात नहीं मिली। अलबत्ता अब लोगों को केवल अनिल विज से ही आस बची है कि कब उनकी दृष्टि अपने जिले के निगम पर पड़ेगी और कब निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की कुंभकर्णी नींद टूटेगी।
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अब विज से ही आस
चाहे शहर नगर निगम की बात हो फिर छावनी परिषद सभी जगह गंदगी ही गंदगी है। अधिकारियों ने गंदगी के मामले पर मौन धारण कर लिया है। एक महीने से पहले ही स्वच्छता एप की हवा निकल गई और यह बनाए जाने के बावजूद लोगों को कूड़े से निजात नहीं मिली। अलबत्ता अब लोगों को केवल अनिल विज से ही आस बची है कि कब उनकी दृष्टि अपने जिले के निगम पर पड़ेगी और कब निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की कुंभकर्णी नींद टूटेगी।
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