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अब कुरुक्षेत्र नहीं बल्कि दिल्ली की लैब में जांचे जाएंगे सैंपल
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ट्विन सिटी में चल रहे विकास कार्यों में इस्तेमाल हो रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का सच अब उजागर होगा। क्योंकि यूएलबी ने एनआईटी (कुरुक्षेत्र) की बजाय अब सभी निर्माण कार्यों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली की श्रीराम व पीडब्ल्यूडी की अपनी लैब में भेजने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। क्योंकि बड़ी दिक्कत श्रीराम लैब को लेकर है। यहां कोई भी सैंपल पास होने की गारंटी नहीं है। ऐसी स्थिति में न केवल ठेकेदारों से रिकवरी होगी बल्कि ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जाएगी। नगर परिषद के ईओ विनोद नेहरा ने जांच के लिए सैंपल दिल्ली भेजने की बात कही है। नगर निगम व नगर परिषद की इंजीनियरिंग ब्रांच के अधिकारियों को भी इस फरमान से अवगत करवाया गया है।
50-50 फीसदी भेजे जाएंगे सैंपल
विकास कार्यों में इस्तेमाल निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल दो हिस्सों में भेजे जाएंगे। सभी कार्यों के 50 फीसदी सैंपल दिल्ली स्थित श्री राम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च और 50 फीसदी पीडब्लयूडी (बीएंडआर) की लैब में भेजे जाएंगे। यूएलबी की ओर से इस सिलसिले में नगर निगम व नगर परिषद अधिकारियों को नए फरमान से अवगत करवाया गया है। अधिकारियों को ये व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। नए फरमान से से ठेकेदारों को कड़ाके की ठंड में पसीना आया हुआ है।
यहां चल रहा था सेटिंग का खेल
ट्विन सिटी में होने वाले विकास कार्यों के सैंपल की गुणवत्ता जांचने के लिए पहले उन्हें कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्राद्यौगिकी संस्थान (एनआईटी) में भेजा जाता था। हैरत की बात है कि यहां कभी किसी ठेकेदार का कोई सैंपल फेल नहीं हुआ। बताते हैं कि यहां सेटिंग का खेल चल रहा था। इसकी भनक सरकार को लग गई। सेटिंग को तोड़ने के लिए ही नया फरमान जारी किया गया। आमतौर पर लोग विकास कार्यों में इस्तेेमाल निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते रहे हैं। पिछले दिनों महेशनगर में बन रहे एक नाले की सामग्री की गुणवत्ता पर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए थे। तब नप अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर नाले का निर्माण कार्य रुकवा दिया था।
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900 करोड़ के चल रहे हैं विकास कार्य
ट्विन सिटी में अभी करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें से कई योजनाएं तो 200 करोड़ रूपये से ज्यादा की हैं। नप अधिकारियों क मानें तो इन सभी योजनाओं में इस्तेेमाल हो रही निर्माण सामग्री के सैंपल जांच के लिए श्री राम व पीडब्ल्यूडी की लैब में भेजे जाएंगे। इसी वजह से छोटे से लेकर बड़ा ठेकेदार नए फरमान से परेशान है। क्योंकि सैंपल फेल होने की स्थिति में ठेकेदार पर मोटी रिकवरी पड़ना तय है।
यह बिल्कुल सही है कि विकास कार्यों में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच अब दिल्ली व पीडब्ल्यूडी की लैब में होगी। विकास कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल होने की शिकायतों के अंबार लग रहे थे। मुझे लगता है कि इसी आधार पर यूएलबी ने सामग्री की जांच एनआईटी की बजाय दूसरी जगह से करवाने का फैसला लिया है। सैंपल फेल होने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई तो तय है।
विनोद नेहरा, ईओ, नगर परिषद, अंबाला कैंट
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50-50 फीसदी भेजे जाएंगे सैंपल
विकास कार्यों में इस्तेमाल निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल दो हिस्सों में भेजे जाएंगे। सभी कार्यों के 50 फीसदी सैंपल दिल्ली स्थित श्री राम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च और 50 फीसदी पीडब्लयूडी (बीएंडआर) की लैब में भेजे जाएंगे। यूएलबी की ओर से इस सिलसिले में नगर निगम व नगर परिषद अधिकारियों को नए फरमान से अवगत करवाया गया है। अधिकारियों को ये व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। नए फरमान से से ठेकेदारों को कड़ाके की ठंड में पसीना आया हुआ है।
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यहां चल रहा था सेटिंग का खेल
ट्विन सिटी में होने वाले विकास कार्यों के सैंपल की गुणवत्ता जांचने के लिए पहले उन्हें कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्राद्यौगिकी संस्थान (एनआईटी) में भेजा जाता था। हैरत की बात है कि यहां कभी किसी ठेकेदार का कोई सैंपल फेल नहीं हुआ। बताते हैं कि यहां सेटिंग का खेल चल रहा था। इसकी भनक सरकार को लग गई। सेटिंग को तोड़ने के लिए ही नया फरमान जारी किया गया। आमतौर पर लोग विकास कार्यों में इस्तेेमाल निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते रहे हैं। पिछले दिनों महेशनगर में बन रहे एक नाले की सामग्री की गुणवत्ता पर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए थे। तब नप अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर नाले का निर्माण कार्य रुकवा दिया था।
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900 करोड़ के चल रहे हैं विकास कार्य
ट्विन सिटी में अभी करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें से कई योजनाएं तो 200 करोड़ रूपये से ज्यादा की हैं। नप अधिकारियों क मानें तो इन सभी योजनाओं में इस्तेेमाल हो रही निर्माण सामग्री के सैंपल जांच के लिए श्री राम व पीडब्ल्यूडी की लैब में भेजे जाएंगे। इसी वजह से छोटे से लेकर बड़ा ठेकेदार नए फरमान से परेशान है। क्योंकि सैंपल फेल होने की स्थिति में ठेकेदार पर मोटी रिकवरी पड़ना तय है।
यह बिल्कुल सही है कि विकास कार्यों में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच अब दिल्ली व पीडब्ल्यूडी की लैब में होगी। विकास कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल होने की शिकायतों के अंबार लग रहे थे। मुझे लगता है कि इसी आधार पर यूएलबी ने सामग्री की जांच एनआईटी की बजाय दूसरी जगह से करवाने का फैसला लिया है। सैंपल फेल होने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई तो तय है।
विनोद नेहरा, ईओ, नगर परिषद, अंबाला कैंट