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10 साल बाद मंडे मार्केट को स्थाई ठिकाना, बिना योजना शिफ्टिंग पर बवाल
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न कोई पूर्व सूचना न प्लानिंग और कर दी गई मंडे मार्केट शिफ्ट। 10 साल से इधर से उधर अस्थाई तौर पर शिफ्ट हो रही मंडे मार्केट को सोमवार सुबह जैसे ही गांधी ग्राउंड के साथ बनाए गए पूर्व डंपिंग शेडों के नीचे हर सोमवार के लिए स्थाई रूप से शिफ्ट किया गया तो हंगामा हो गया। गुस्साए रेहड़ी-फड़ी वालों ने जगह नहीं मिलते देख क्लर्क सुरेंद्र राणा के साथ तू-तू , मैं-मैं की। यहां तक कि हाथापाई तक की नौबत गा गई। रेहड़ी-फड़ी वालों ने आरोप लगाए कि एक-एक रेहड़ी फड़ी वाले ने 10-10 बैंच लगाकर जगह पर कब्जा कर लिया है। नगर निगम के अधिकारी आई कार्ड या उन्हें किसी अन्य पहचान के आधार पर जगह अलॉट करें। लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं थी। जिसके हाथ जो लगा वहीं बैंच रखकर कब्जा कर लिया। कुछ लोगों ने बैंच न होने पर फोल्डिंग बिछाकर कब्जा कर लिया। जिसे क्लर्क ने पहले खुद उठाकर फेंक दिया लेकिन बाद में बढ़ते दबाव के चलते पहले दिन फोल्डिंग भी मजबूरी वश लगवाने पड़े।
पहले लोकल को दें प्राथमिकता
गुस्साए रेहड़ी-फड़ी वालों ने कहा कि बाहरी लोगों ने पूरी मार्केट पर कब्जा कर लिया है और लोकल को जगह नहीं मिली। कहा कि पहले प्रशासन लोकल को यहां प्राथमिकता दे उसके बाद दूसरों को। कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया कि पहले अंबाला छावनी फिर अंबाला शहर और तीसरे नंबर पर बाहरी राज्यों वालों को यहां जगह दी जाए।
चार होमगार्ड के साथ पहुंचा क्लर्क
इतने रेहड़ी-फड़ी वालों को शिफ्ट करने के लिए नगर परिषद के पास टीम का भी टोटा रहा, केवल चार होगार्ड को लेकर रेंट क्लर्क सुरेंद्र राणा मौके पर पहुंचा। यही कारण रहा कि रेहड़ी फड़ी वाले उसपर हावी नजर आए और विवाद ने तूल पकड़ लिया।
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चेहतों को पहले सूचना देने के आरोप
रेेहड़ी फड़ी वालों ने आरोप लगाए कि नगर परिषद ने पहले ही इस बारे में किसी को सूचना नहीं दी तो सुबह 5 बजे से ही बाहरी लोगों के बैंच नई रेहड़ी-फड़ी मार्केट में कैसे लग गए। कैसे एक के बाद एक करके एक ही व्यक्ति ने 10-10 बैंच लगाकर कब्जा किया।
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करीब 550 बैंचों की हुई व्यवस्था
इस नई मंडे मार्केट में पहले दिन करीब 550 बैंच लग सके। एक व्यक्ति को 2 बैंच लगाने के लिए अधिकारिक तौर पर जगह दी गई थी लेकिन पहले दिन इस तरह का नगर परिषद के पास कोई रिकार्ड नहीं था इसीलिए कई ने 5 से 10 बैंच लगाकर जगह पर कब्जा किया था। इस तरह करीब 150 से 200 व्यक्ति ही रेहड़ी मार्केट में शिफ्ट हो सके। जबकि मंडे मार्केट में आमतौर पर 900 से 1 हजार तक रेहड़ी-फड़ी वाले व्यापार करते हैं। अलबत्ता अभी भी 800 लोगों को स्थाई ठिकाना नहीं मिला और आधे से ज्यादा लोग सोमवार को भी गांधी ग्राउंड में ही कारोबार करते नजर आए।
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इस तरह हुई मंडे मार्केट की प्रथा शुरू
10 साल पहले सोमवार को बाजार बंद रहते थे। ऐसे में सोमवार के दिन कुछ दुकानदारों ने सेल बढ़ाने के उद्देश्य से इस दिन सस्ते रेट पर अपनी दुकानों के आगे फड़ी लगवाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह रिवाज बढ़ा और बाहर के लोग भी आने लगे। दुकानदारों ने दुकानों के आगे की जगह 1000 से 5 हजार रुपये तक में सोमवार को सामान बेचना शुरू कर दिया। इस तरह छावनी के सदर बाजार, बजाजा बाजार और चौड़ा बाजार में पूरी तरह से सोमवार को मंडे मार्केट का कब्जा होने लगा। विरोध हुआ और दुकानदारों ने सुरक्षा व्यवस्था और जाम और अपनी दुकानदारी ठप होने का हवाला देते हुए मंडे मार्केट को शहर से बाहर शिफ्ट करने की आवाज बुलंद की। इसी विरोध के चलते 2019 में पहली बार मंडे मार्केट गांधी ग्राउंड में शिफ्ट की गई। लेकिन यहां भी बरसात के चलते दुकानदार रेहड़ी-फड़ी नहीं लगा सकते। इसी कारण गांधी ग्राउंड के साथ बनाए गए कूड़ा डंपिंग सेंटर जोकि बंद हो चुका उसके शेड में इसे शिफ्ट करने का प्लान तैयार किया गया।
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गांधी ग्राउंड में बनाया जाना है साइक्लिंग ट्रैक
बता दें कि गांधी ग्राउंड में करीब 30 लाख रुपये की लागत से आमजनों के लिए साइक्लिंग ट्रैक (वेलड्रोम) बनाया जाना है। इसके लिए बजट भी पास हो चुका है। 2020 में मार्च तक उम्मीद लगाई जा रही है कि यह ट्रैक बनाकर पब्लिक को समर्पित कर दिया जाएगा। इसीलिए मंडे मार्केट अब गांधी ग्राउंड से शिफ्ट की गई। यह प्रोजेक्ट गृह मंत्री अनिल विज के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में से एक है। साइक्लिंग ट्रैक बनने के बाद शहरवासी रात को भी यहां साइक्लिंग कर सकेंगे।
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पहले लोकल को दें प्राथमिकता
गुस्साए रेहड़ी-फड़ी वालों ने कहा कि बाहरी लोगों ने पूरी मार्केट पर कब्जा कर लिया है और लोकल को जगह नहीं मिली। कहा कि पहले प्रशासन लोकल को यहां प्राथमिकता दे उसके बाद दूसरों को। कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया कि पहले अंबाला छावनी फिर अंबाला शहर और तीसरे नंबर पर बाहरी राज्यों वालों को यहां जगह दी जाए।
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चार होमगार्ड के साथ पहुंचा क्लर्क
इतने रेहड़ी-फड़ी वालों को शिफ्ट करने के लिए नगर परिषद के पास टीम का भी टोटा रहा, केवल चार होगार्ड को लेकर रेंट क्लर्क सुरेंद्र राणा मौके पर पहुंचा। यही कारण रहा कि रेहड़ी फड़ी वाले उसपर हावी नजर आए और विवाद ने तूल पकड़ लिया।
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चेहतों को पहले सूचना देने के आरोप
रेेहड़ी फड़ी वालों ने आरोप लगाए कि नगर परिषद ने पहले ही इस बारे में किसी को सूचना नहीं दी तो सुबह 5 बजे से ही बाहरी लोगों के बैंच नई रेहड़ी-फड़ी मार्केट में कैसे लग गए। कैसे एक के बाद एक करके एक ही व्यक्ति ने 10-10 बैंच लगाकर कब्जा किया।
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करीब 550 बैंचों की हुई व्यवस्था
इस नई मंडे मार्केट में पहले दिन करीब 550 बैंच लग सके। एक व्यक्ति को 2 बैंच लगाने के लिए अधिकारिक तौर पर जगह दी गई थी लेकिन पहले दिन इस तरह का नगर परिषद के पास कोई रिकार्ड नहीं था इसीलिए कई ने 5 से 10 बैंच लगाकर जगह पर कब्जा किया था। इस तरह करीब 150 से 200 व्यक्ति ही रेहड़ी मार्केट में शिफ्ट हो सके। जबकि मंडे मार्केट में आमतौर पर 900 से 1 हजार तक रेहड़ी-फड़ी वाले व्यापार करते हैं। अलबत्ता अभी भी 800 लोगों को स्थाई ठिकाना नहीं मिला और आधे से ज्यादा लोग सोमवार को भी गांधी ग्राउंड में ही कारोबार करते नजर आए।
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इस तरह हुई मंडे मार्केट की प्रथा शुरू
10 साल पहले सोमवार को बाजार बंद रहते थे। ऐसे में सोमवार के दिन कुछ दुकानदारों ने सेल बढ़ाने के उद्देश्य से इस दिन सस्ते रेट पर अपनी दुकानों के आगे फड़ी लगवाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह रिवाज बढ़ा और बाहर के लोग भी आने लगे। दुकानदारों ने दुकानों के आगे की जगह 1000 से 5 हजार रुपये तक में सोमवार को सामान बेचना शुरू कर दिया। इस तरह छावनी के सदर बाजार, बजाजा बाजार और चौड़ा बाजार में पूरी तरह से सोमवार को मंडे मार्केट का कब्जा होने लगा। विरोध हुआ और दुकानदारों ने सुरक्षा व्यवस्था और जाम और अपनी दुकानदारी ठप होने का हवाला देते हुए मंडे मार्केट को शहर से बाहर शिफ्ट करने की आवाज बुलंद की। इसी विरोध के चलते 2019 में पहली बार मंडे मार्केट गांधी ग्राउंड में शिफ्ट की गई। लेकिन यहां भी बरसात के चलते दुकानदार रेहड़ी-फड़ी नहीं लगा सकते। इसी कारण गांधी ग्राउंड के साथ बनाए गए कूड़ा डंपिंग सेंटर जोकि बंद हो चुका उसके शेड में इसे शिफ्ट करने का प्लान तैयार किया गया।
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गांधी ग्राउंड में बनाया जाना है साइक्लिंग ट्रैक
बता दें कि गांधी ग्राउंड में करीब 30 लाख रुपये की लागत से आमजनों के लिए साइक्लिंग ट्रैक (वेलड्रोम) बनाया जाना है। इसके लिए बजट भी पास हो चुका है। 2020 में मार्च तक उम्मीद लगाई जा रही है कि यह ट्रैक बनाकर पब्लिक को समर्पित कर दिया जाएगा। इसीलिए मंडे मार्केट अब गांधी ग्राउंड से शिफ्ट की गई। यह प्रोजेक्ट गृह मंत्री अनिल विज के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में से एक है। साइक्लिंग ट्रैक बनने के बाद शहरवासी रात को भी यहां साइक्लिंग कर सकेंगे।