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परमल बिका नहीं मंडी में अब शुरू हुई बासमती की बेकद्री
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अनाज मंडियों में सरकारी धान की खरीद लगभग बंद हो चुकी है। परमल (मोटी धान)की सरकारी खरीद अभी तक पूरी भी नहीं हुई है कि अब मंडियों में बासमती धान की अलग-अलग किस्में आनी शुरू हो गई हैं। हालात यह हैं कि जहां किसानों को परमल किस्म के 1835 की बजाए 1600 से 1750 रुपये प्रति क्विंटल रेट मिल रहे हैं वहीं, बासमती की बेकद्री भी मंडियों में शुरू हो गई है। जिस बासमती के गत वर्ष 3300 से 3600 रुपये दाम थे इस बार बासमती 2400 से 2700 रुपये तक बिक रही है। हालात यह हैं कि यह रेट मिलने के कारण कई किसान तो अपनी धान मंडी तक लाने के बावजूद वापस ले जाने को मजबूर हैं। क्योंकि इस रेट में बचत तो दूर बासमती का ठेका और खर्चा भी पूरा नहीं हो पा रहा।
रात मंडी में बिताने का डर
मंगलवार को किसानों का मंडी में ठंड में रात बिताने की चिंता सताती रही क्योंकि दोपहर तो मंडी में सरकारी तो दूर प्राईवेट खरीदार भी नहीं आए थे। किसानों ने कहा कि यदि शाम को भी खरीदार नहीं आए तो यहीं पर रात बितानी पड़ेगी।
सुबह से आया हुआ हूं। अभी तक कोई भी धान की बोली नहीं लगाने आया। दोपहर हो चुकी है अगर शाम तक कोई नहीं आया तो अब रात भी ठंड में यहीं बितानी पड़ेगी।
जीत सिंह, दफरपुर
हमारी बासमती का रेट 2600 रुपये लगाया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 900 रुपये कम है। यह किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। इतने रेट में तो खर्चा भी पूरा नहीं होता।
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रण सिंह, चौड़मस्तुपर
मेरी बासमती 2930 रुपये लगी है। पिछले साल 3500 रुपये लगा था। इस बार तो रेट ज्यादा होना चाहिए था लेकिन इस बार तो 600 रुपये कम मिले। यदि ऐसा ही रहा तो आगे किसान बासमती लगाना ही छोड़ देंगे।
श्याम सिंह, भुडंगपुर।
किसान मंडी में धक्के खा रहे हैं। 2700 रुपये मेरी बासमती का रेट लगा है। इसीलिए मैंने तो इस रेट पर धान देने से इंकार कर दिया। कम से कम 3700 रुपये प्रति क्विंटल रेट होना चाहिए। 2700 रुपये में तो ठेके का खर्चा भी नहीं निकलता। यही रेट मिला तो हम अपनी जीरी वापस ही ले जाएंगे।
अशोक कुमार, ईमाइलपुर।
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रात मंडी में बिताने का डर
मंगलवार को किसानों का मंडी में ठंड में रात बिताने की चिंता सताती रही क्योंकि दोपहर तो मंडी में सरकारी तो दूर प्राईवेट खरीदार भी नहीं आए थे। किसानों ने कहा कि यदि शाम को भी खरीदार नहीं आए तो यहीं पर रात बितानी पड़ेगी।
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सुबह से आया हुआ हूं। अभी तक कोई भी धान की बोली नहीं लगाने आया। दोपहर हो चुकी है अगर शाम तक कोई नहीं आया तो अब रात भी ठंड में यहीं बितानी पड़ेगी।
जीत सिंह, दफरपुर
हमारी बासमती का रेट 2600 रुपये लगाया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 900 रुपये कम है। यह किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। इतने रेट में तो खर्चा भी पूरा नहीं होता।
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रण सिंह, चौड़मस्तुपर
मेरी बासमती 2930 रुपये लगी है। पिछले साल 3500 रुपये लगा था। इस बार तो रेट ज्यादा होना चाहिए था लेकिन इस बार तो 600 रुपये कम मिले। यदि ऐसा ही रहा तो आगे किसान बासमती लगाना ही छोड़ देंगे।
श्याम सिंह, भुडंगपुर।
किसान मंडी में धक्के खा रहे हैं। 2700 रुपये मेरी बासमती का रेट लगा है। इसीलिए मैंने तो इस रेट पर धान देने से इंकार कर दिया। कम से कम 3700 रुपये प्रति क्विंटल रेट होना चाहिए। 2700 रुपये में तो ठेके का खर्चा भी नहीं निकलता। यही रेट मिला तो हम अपनी जीरी वापस ही ले जाएंगे।
अशोक कुमार, ईमाइलपुर।