फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   civic

प्रिंस मामले में नया खुलासा , डेंगू नहीं स्क्रब टाइफस से हुई मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2019 01:51 AM IST
विज्ञापन
civic
उगाला गांव के प्रिंस की मौत स्क्रब टाइफस की वजह से हुई थी। इस बुखार के लक्षण डेंगू के रोग के समान ही होते हैं। यह बीमारी पिस्सुओं की वजह से फैलती है। आमतौर पर इस बीमारी का पिस्सू जापान, इंडोनेशिया व थाइलैंड जैसे देशों में पाया जाता है। प्रिंस मुस्तफाबाद की अनाज मंडी में काम करता था। हो सकता है कि सफाई करते समय वहां उसे इस बीमारी के वाहक पिस्सू ने काट लिया हो। हालांकि अभी तक हरियाणा, हिमाचल, पंजाब व उत्तर प्रदेश में इस बीमारी के बेहद कम मामले ही सामने आए हैं। सीएचसी इंचार्ज डॉ. बीरबल ने प्रिंस की मौत स्क्रब टाइफस से होने की पुष्टि की है। पीजीआई से आई रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने यह दावा किया है। प्रिंस करीब 13 दिन तक इस बुखार से पीड़ित रहा। कंपकंपी के साथ उसे तेज बुखार की शिकायत थी। इससे उसे खांसी, गले में खरास, सिर दर्द रहा। प्रिंस का इलाज पहले थाना छप्पर के अस्पताल में हुआ। उसके बाद परिजन उसे अंबाला व पीजीआई व सेक्टर-32 के सरकारी अस्पताल में ले गए थे। पीजीआई में उपचार के दौरान ही प्रिंस की मौत हो गई थी।
विज्ञापन

डेंगू बुखार की तरह ही होते हैं लक्षण : बीरबल
डॉ. बीरबल ने बताया कि डेंगू रोगी व स्क्रब टाइफस के मरीज के लक्षण एक समान ही होते हैं। कंपकंपी के साथ तेज बुखार, गले व बदन में दर्द, कुल्हों के ऊपर गिल्टियां, शरीर पर काले धब्बे, थकान, शरीर का अकड़ जाना, खांसी व उल्टी होना है। अगर किसी को ऐसे लक्षण मिलते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करवाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह बीमारी जीवाणु संक्रामक है। स्क्रब टाइफस होने पर पांच दिन बाद शरीर पर दाने पड़ जाते हैं। यमुनानगर स्वास्थ्य विभाग की टीम को मुस्तफाबाद में उस जगह का मुआयना करना चाहिए जहां पर प्रिंस काम करता था। उस जगह पर पिस्सुओं के मारने की दवाई का भी छिड़काव करवाना चाहिए ताकि किसी को यह न काट जाएं। ऐसे में लोगों में बीमारी के फैल सकती है।
विज्ञापन

तेजी से घटती है प्लेटलेट्स की संख्या
स्क्रब टाइफस नाम की बीमारी के कई मामले सामने आ रहे हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। पिस्सू के काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है सुसुगा : छोटा व खतरनाक और मुशी मतलब माइट। इसकी वजह से लीवर, दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में पहुंच जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन्हें ज्यादा खतरा : पहाड़ी इलाके, जंगल और खेतों के आस-पास ये पिस्सू ज्यादा पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घने घास के पास इस पिस्सू के काटने का खतरा रहता है।

ये हैं बीमारी के लक्षण
पिस्सू के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार (102-103 डिग्री फारेनहाइट), सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। इसका समय रहते इलाज न हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते जिससे वह बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed