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नगर परिषद पर जुर्माना, ईओ को किया तलब
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। नगर परिषद ने कोर्ट के आदेश के 3 साल बाद भी याची को दुकान अलॉट नहीं की। मामले में अब सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मुकेश कुमार की अदालत नेनगर परिषद पर 3 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इतना ही नहीं ईओ नगर परिषद को कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर 2 जुलाई से पहले अपना जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने पर क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए?
दरअसल अंबाला छावनी महेश नगर की रहने वाली प्रोमिला देवी का खोखा 1994 में नगर परिषद की टीम तो तोड़ा था। इसके बाद महिला ने इस खोखे के बदले नगर परिषद से दुकान अलॉट करने की मांग की थी। सुनवाई नहीं होने पर प्रोमिला ने सिविल कोर्ट में केस दायर किया। वहां से नगर परिषद की टीम केस जीत की गई। महिला ने इसके बाद सेशन कोर्ट में याचिका डाली। कोर्ट ने इस मामले में महिला का पक्ष सही पाया और महिला को 23 मई 2018 को दुकान अलॉट करने के आदेश जारी कर दिए। कोर्ट के आदेश नहीं माने गए। महिला ने कोर्ट के आदेश के पालन के लिए याचिका दायर की।
कोर्ट ने याचिका पर कार्रवाई करते हुए नगर परिषद की बुलेरो और जेसीबी को अटैच करने के आदेश जारी कर दिए। अप्रैल में 2021 में नगर परिषद के दोनों वाहन कोर्ट के आदेशों पर अटैच कर दिए गए। वाहन को छुड़ाने के लिए अधिकारियों ने कोर्ट से अपील की। कोर्ट को बताया कि हमारी इस मामले में कोई गलती नहीं है क्योंकि जब कोर्ट ने आदेश जारी किए थे तब नगर निगम था और अब यह नगर परिषद हो चुका है। इस पर याची के वकील पुनीत सरपोल और नरेंद्र शर्मा ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम हो या नगर परिषद, बात एक ही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनकर नप पर 3 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए डिस्ट्रिक लीगल सर्विस अथॉरेटी में जमा करवाने और ईओ को व्यक्तिगत रूप से 2 जुलाई से पहले पेश होने के आदेश जारी कर दिए।
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अंबाला। नगर परिषद ने कोर्ट के आदेश के 3 साल बाद भी याची को दुकान अलॉट नहीं की। मामले में अब सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मुकेश कुमार की अदालत नेनगर परिषद पर 3 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इतना ही नहीं ईओ नगर परिषद को कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर 2 जुलाई से पहले अपना जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने पर क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए?
दरअसल अंबाला छावनी महेश नगर की रहने वाली प्रोमिला देवी का खोखा 1994 में नगर परिषद की टीम तो तोड़ा था। इसके बाद महिला ने इस खोखे के बदले नगर परिषद से दुकान अलॉट करने की मांग की थी। सुनवाई नहीं होने पर प्रोमिला ने सिविल कोर्ट में केस दायर किया। वहां से नगर परिषद की टीम केस जीत की गई। महिला ने इसके बाद सेशन कोर्ट में याचिका डाली। कोर्ट ने इस मामले में महिला का पक्ष सही पाया और महिला को 23 मई 2018 को दुकान अलॉट करने के आदेश जारी कर दिए। कोर्ट के आदेश नहीं माने गए। महिला ने कोर्ट के आदेश के पालन के लिए याचिका दायर की।
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कोर्ट ने याचिका पर कार्रवाई करते हुए नगर परिषद की बुलेरो और जेसीबी को अटैच करने के आदेश जारी कर दिए। अप्रैल में 2021 में नगर परिषद के दोनों वाहन कोर्ट के आदेशों पर अटैच कर दिए गए। वाहन को छुड़ाने के लिए अधिकारियों ने कोर्ट से अपील की। कोर्ट को बताया कि हमारी इस मामले में कोई गलती नहीं है क्योंकि जब कोर्ट ने आदेश जारी किए थे तब नगर निगम था और अब यह नगर परिषद हो चुका है। इस पर याची के वकील पुनीत सरपोल और नरेंद्र शर्मा ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम हो या नगर परिषद, बात एक ही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनकर नप पर 3 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए डिस्ट्रिक लीगल सर्विस अथॉरेटी में जमा करवाने और ईओ को व्यक्तिगत रूप से 2 जुलाई से पहले पेश होने के आदेश जारी कर दिए।
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