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Ambala News: आंगनबाड़ी केंद्रों में जांचा जाएगा बच्चों का स्वास्थ्य
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सीएमओ कार्यालय अंबाला। आर्काइव
अंबाला सिटी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलाें के बाद आंगनबाड़ी केंद्राें में आने वाले बच्चों की भी नियमित जांच करेगा। अगले सप्ताह से जांच कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान विभाग की टीमें छोटे बच्चों में होने वाली सामान्य और जन्मजात बीमारियों की जांच करेगी।
जांच के बाद जिन बच्चों को उपचार की आवश्यकता है। उनके अभिभावकों को उपचार के लिए परामर्श देंगी। विभाग की ओर से इस कार्यक्रम के लिए टीमें लगा दी गई है। प्रत्येक वर्ष स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक बार स्कूलों और दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच अभियान चलाया जाता है।
खुद ही करवाते हैं उपचार
जांच अभियान के दौरान जिन बच्चों में कोई भी परेशानी या फिर किसी भी प्रकार की बीमारी मिलती है तो उसका उपचार भी विभाग अपने स्तर पर ही करवाता है। इसमें दिल की कमजोर धड़कन, आंखों में कमी सहित अन्य गंभीर बीमारियों का उपचार भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही कराया जाता है। इसका सारा खर्च भी विभाग और राज्य सरकार ही उठाती है।
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43 फीसदी बच्चे बीमारियों से ग्रस्त
बीते वर्ष हुई जांच में देखने को मिला था कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्राें के 43 फीसदी बच्चों में कमजोरी, आंखों की रोशनी सहित कुपोषण की समस्याएं हैं। इस दौरान लगभग एक लाख बच्चों की जांच की गई थी। जिसमें 18 हजार से अधिक बच्चे आंगनबाड़ी के थे जिनमें कोई न कोई बीमारी थी।
वर्जन
वर्ष में दो आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच अभियान चलाया जाता है। अगले सप्ताह से अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए टीमें भी नियुक्त कर दी गई हैं।
-डॉ मंयक, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम।
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जांच के बाद जिन बच्चों को उपचार की आवश्यकता है। उनके अभिभावकों को उपचार के लिए परामर्श देंगी। विभाग की ओर से इस कार्यक्रम के लिए टीमें लगा दी गई है। प्रत्येक वर्ष स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक बार स्कूलों और दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच अभियान चलाया जाता है।
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खुद ही करवाते हैं उपचार
जांच अभियान के दौरान जिन बच्चों में कोई भी परेशानी या फिर किसी भी प्रकार की बीमारी मिलती है तो उसका उपचार भी विभाग अपने स्तर पर ही करवाता है। इसमें दिल की कमजोर धड़कन, आंखों में कमी सहित अन्य गंभीर बीमारियों का उपचार भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही कराया जाता है। इसका सारा खर्च भी विभाग और राज्य सरकार ही उठाती है।
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43 फीसदी बच्चे बीमारियों से ग्रस्त
बीते वर्ष हुई जांच में देखने को मिला था कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्राें के 43 फीसदी बच्चों में कमजोरी, आंखों की रोशनी सहित कुपोषण की समस्याएं हैं। इस दौरान लगभग एक लाख बच्चों की जांच की गई थी। जिसमें 18 हजार से अधिक बच्चे आंगनबाड़ी के थे जिनमें कोई न कोई बीमारी थी।
वर्जन
वर्ष में दो आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच अभियान चलाया जाता है। अगले सप्ताह से अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए टीमें भी नियुक्त कर दी गई हैं।
-डॉ मंयक, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम।