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अटूट आस्था का केंद्र है सिटी का शीशगंज गुरुद्वारा
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Thu, 17 Dec 2015 12:46 AM IST
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सिटी दो खंभा चौक के पास स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब में बुधवार को समागम का आयोजन किया गया। समागम में आए कीर्तनी जत्थों और स्कूली बच्चों ने गुरु तेग बहादुर के जीवन पर शब्द कीर्तन के माध्यम से प्रकाश डाला।
गुरुद्वारा साहिब में सुबह से ही संगत का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। यहां दूर-दराज से पहुंची संगत ने गुरू तेग बहादुर का शहीदी दिवस मनाया। विगत दिवस गुरुद्वारा से नगर कीर्तन निकाला गया था। इसके पश्वात बुधवार शाम को सात बजे से रात ग्यारह बजे तक दीवान सजाए जाएंगे। वहीं, 17 दिसंबर को भी रात को दीवान का आयोजन किया जाएगा। शब्द कीर्तन के बाद दोपहर को लंगर भी बरताया गया।
रात भर के लिए रखा गया था गुरु का शीश
दिल्ली में गुरु की शहीदी के बाद भाई जैता सिंह गुरु तेग बहादुर के पावन शीश को दिल्ली के चांदनी चौक से आनंदपुर साहिब ले जाने के लिए तरावड़ी से होते हुए अंबाला की ओर रवाना हुए थे। भाई जैता ने जब दिल्ली से चलते हुए टांगरी नदी पार कर अंबाला में प्रवेश किया तो उन्होंने गुरु तेग बहादुर के शीश का टोकरा जंडी के पेड़ के नीचे रखकर विश्राम किया था। जहां आज सतसंगत साहिब बना हुआ है। उधर, कैथ माजरी में बसने वाले पीर तव्वकुल शाह ने भाई जैता को भाई राम देवा के घर ठहराया। तब भाई राम देवा ने सारी रात गुरु तेग बहादुर के पावन शीश पर पहरा दिया और आनंदपुर साहिब प्रस्थान करने के लिए उपरांत इस स्थान की उम्रभर पूजा की थी। आज इस पवित्र जगह पर गुरुद्वारा शीशगंज साहिब बनाया गया है।
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गुरुद्वारा साहिब में सुबह से ही संगत का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। यहां दूर-दराज से पहुंची संगत ने गुरू तेग बहादुर का शहीदी दिवस मनाया। विगत दिवस गुरुद्वारा से नगर कीर्तन निकाला गया था। इसके पश्वात बुधवार शाम को सात बजे से रात ग्यारह बजे तक दीवान सजाए जाएंगे। वहीं, 17 दिसंबर को भी रात को दीवान का आयोजन किया जाएगा। शब्द कीर्तन के बाद दोपहर को लंगर भी बरताया गया।
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रात भर के लिए रखा गया था गुरु का शीश
दिल्ली में गुरु की शहीदी के बाद भाई जैता सिंह गुरु तेग बहादुर के पावन शीश को दिल्ली के चांदनी चौक से आनंदपुर साहिब ले जाने के लिए तरावड़ी से होते हुए अंबाला की ओर रवाना हुए थे। भाई जैता ने जब दिल्ली से चलते हुए टांगरी नदी पार कर अंबाला में प्रवेश किया तो उन्होंने गुरु तेग बहादुर के शीश का टोकरा जंडी के पेड़ के नीचे रखकर विश्राम किया था। जहां आज सतसंगत साहिब बना हुआ है। उधर, कैथ माजरी में बसने वाले पीर तव्वकुल शाह ने भाई जैता को भाई राम देवा के घर ठहराया। तब भाई राम देवा ने सारी रात गुरु तेग बहादुर के पावन शीश पर पहरा दिया और आनंदपुर साहिब प्रस्थान करने के लिए उपरांत इस स्थान की उम्रभर पूजा की थी। आज इस पवित्र जगह पर गुरुद्वारा शीशगंज साहिब बनाया गया है।
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