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Ambala News: आठ आरोपियों सहित चार पुलिस अधिकारियों पर केस
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अंबाला। पांच हजार रुपये उधार देने का मामला इतना तूल पकड़ गया कि जटवाड़ गांव निवासी हरजिंदर सिंह पर कातिलाना हमला हो गया। उसे मरा समझकर आरोपी घर के बाहर छोड़कर फरार हो गए।
हद तो तब हुई जब पीड़ित ने न्याय पाने के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया तो पुलिस वालों ने ही हमलावरों के साथ मिलकर पीड़ित के खिलाफ ही षड्यंत्र रच दिया, लेकिन हाईकोर्ट में जैसे ही मामला पहुंचा तो तथ्यों की जांच के आधार पर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
मामले में संझान लेते हुए मुख्य आठ आरोपियों सहित चार तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और उन्हें नौकरी से निकालने के आदेश जारी कर दिए। इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेशों पर पंजोखरा थाने में विभिन्न धाराओं के तहत सभी 12 आरोपियाें के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पीड़ित हरजिंदर सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि आरोपी जसबीर सिंह और गुरदीप सिंह, उससे पांच हजार रुपये लिए थे। जब पैसे वापस मांगे तो आरोपी व्यक्तियों ने बहाना बनाकर टाल दिया।
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इसके अलावा आरोपियों ने उसके परिवार को परेशान करने के उद्देश्य से पीड़ित के खेतों में अतिरिक्त पानी बहाकर उसमें पानी भरना शुरू कर दिया। जब आवेदक ने इसका विरोध किया तो आरोपी जसबीर सिंह, गुरदीप सिंह, राजिंदर कौर और हरजिंदर कौर ने आवेदक की हत्या करने के लिए आरोपी डालमिक सिंह, गुरप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह और दिलबाग सिंह के साथ साजिश रची ली। इस साजिश को सिरे चढ़ाने के लिए 15 सितंबर 2021 को रात्रि लगभग साढ़े नौ बजे घर लौट रहे पीड़ित हरजिंदर सिंह और उसके दोस्त गुरजिंदर को आरोपियों ने घेर लिया।
इसके बाद पीड़ित हरजिंदर सिंह पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। जब उसके दोस्त गुरजिंदर ने बचाने की कोशिश की तो उस पर भी हमला कर दिया। इसके बाद गुरजिंदर मौके से मदद बुलाने के लिए भाग गया। जब तक वह वापस आया तब तक आरोपियों ने हरजिंदर को मर समझकर उसके घर के ही नजदीक फेंक दिया था। इस दौरान आरोपियों ने हरजिंदर की जेब से तीन हजार रुपये और हाथ में पहनी हुई सोने की अंगूठी भी निकाल ली। इसके बाद घायल हरजिंदर को परिचितों द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया। जहां गंभीर हालत के चलते उसे चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
इस संबंध में बाकायदा एमएलआर भी काटी गई। बावदूर इसके पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।पीड़ित का आरोप है कि इसमें तत्कालीन एएसआई बलकार, तत्कालीन एसएचओ पंजोखरा मोहन लाल, तत्कालीन डीएसपी अंबाला कैंट राम कुमार और डीएसपी के रीडर चमन लाल को भी इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
हरजिंदर ने बताया कि मेडिकर रिपोर्ट होने के बावजूद उक्त पुलिस अधिकारियों ने आठों आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई की और न ही एफआईआर दर्ज की। उल्टा पीड़ित को ही झूठे मामलों में फंसाने का डर दिखाकर समझौते का दबाव बनाते रहे। हालांकि इस दौरान आरोपी गुरदीप सिंह की पत्नी रंजीत कौर ने पुलिस की मदद से उसके खिलाफ पंजोखरा थाने में एक झूठी एफआईआर भी दर्ज कराई। वहीं न्याय न मिलता देखकर पीड़ित ने हाईकोर्ट की शरण ली और सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ललित कुमारी वर्सेज गवर्नमेंट ऑफ उत्तर प्रदेश वर्ष 2014 का हवाला देकर न्याय की गुहार लगाई।
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हद तो तब हुई जब पीड़ित ने न्याय पाने के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया तो पुलिस वालों ने ही हमलावरों के साथ मिलकर पीड़ित के खिलाफ ही षड्यंत्र रच दिया, लेकिन हाईकोर्ट में जैसे ही मामला पहुंचा तो तथ्यों की जांच के आधार पर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
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मामले में संझान लेते हुए मुख्य आठ आरोपियों सहित चार तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और उन्हें नौकरी से निकालने के आदेश जारी कर दिए। इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेशों पर पंजोखरा थाने में विभिन्न धाराओं के तहत सभी 12 आरोपियाें के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पीड़ित हरजिंदर सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि आरोपी जसबीर सिंह और गुरदीप सिंह, उससे पांच हजार रुपये लिए थे। जब पैसे वापस मांगे तो आरोपी व्यक्तियों ने बहाना बनाकर टाल दिया।
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इसके अलावा आरोपियों ने उसके परिवार को परेशान करने के उद्देश्य से पीड़ित के खेतों में अतिरिक्त पानी बहाकर उसमें पानी भरना शुरू कर दिया। जब आवेदक ने इसका विरोध किया तो आरोपी जसबीर सिंह, गुरदीप सिंह, राजिंदर कौर और हरजिंदर कौर ने आवेदक की हत्या करने के लिए आरोपी डालमिक सिंह, गुरप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह और दिलबाग सिंह के साथ साजिश रची ली। इस साजिश को सिरे चढ़ाने के लिए 15 सितंबर 2021 को रात्रि लगभग साढ़े नौ बजे घर लौट रहे पीड़ित हरजिंदर सिंह और उसके दोस्त गुरजिंदर को आरोपियों ने घेर लिया।
इसके बाद पीड़ित हरजिंदर सिंह पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। जब उसके दोस्त गुरजिंदर ने बचाने की कोशिश की तो उस पर भी हमला कर दिया। इसके बाद गुरजिंदर मौके से मदद बुलाने के लिए भाग गया। जब तक वह वापस आया तब तक आरोपियों ने हरजिंदर को मर समझकर उसके घर के ही नजदीक फेंक दिया था। इस दौरान आरोपियों ने हरजिंदर की जेब से तीन हजार रुपये और हाथ में पहनी हुई सोने की अंगूठी भी निकाल ली। इसके बाद घायल हरजिंदर को परिचितों द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया। जहां गंभीर हालत के चलते उसे चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
इस संबंध में बाकायदा एमएलआर भी काटी गई। बावदूर इसके पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।पीड़ित का आरोप है कि इसमें तत्कालीन एएसआई बलकार, तत्कालीन एसएचओ पंजोखरा मोहन लाल, तत्कालीन डीएसपी अंबाला कैंट राम कुमार और डीएसपी के रीडर चमन लाल को भी इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
हरजिंदर ने बताया कि मेडिकर रिपोर्ट होने के बावजूद उक्त पुलिस अधिकारियों ने आठों आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई की और न ही एफआईआर दर्ज की। उल्टा पीड़ित को ही झूठे मामलों में फंसाने का डर दिखाकर समझौते का दबाव बनाते रहे। हालांकि इस दौरान आरोपी गुरदीप सिंह की पत्नी रंजीत कौर ने पुलिस की मदद से उसके खिलाफ पंजोखरा थाने में एक झूठी एफआईआर भी दर्ज कराई। वहीं न्याय न मिलता देखकर पीड़ित ने हाईकोर्ट की शरण ली और सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ललित कुमारी वर्सेज गवर्नमेंट ऑफ उत्तर प्रदेश वर्ष 2014 का हवाला देकर न्याय की गुहार लगाई।