फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Campaign paid off, the 30 detainees left prison intoxication

रंग लाई मुहिम, जेल में 30 बंदियों ने छोड़ा नशा

Mon, 14 Sep 2015 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला,अंबाला Updated Mon, 14 Sep 2015 12:43 AM IST
विज्ञापन
Campaign paid off, the 30 detainees left prison intoxication

इंसान में अपनी बुराई छोड़ने का हौसला जरूर होता है, लेकिन उसे इसके लिए विशेष प्रोत्साहन की जरूरत होती है। सही वक्त पर उसकी काउंसिलिंग हो जाए और उसे प्रोत्साहन मिल जाए तो वे अपनी बुराई छोड़ने में वक्त नहीं लगाता। ऐसा ही इन दिनों अंबाला सेंट्रल जेल में देखने को मिल रहा है।

विज्ञापन


अंबाला सेंट्रल जेल में करीबन साढ़े ग्यारह सौ बंदियों व कैदियों में से नशा गस्त बंदियों व कैदियों की संख्या बहुत ज्यादा है। इन्ही बंदियों व कैदियों से नशा छुड़वाने की मुहिम जिला स्वास्थ्य महकमे ने पिछले दिनों अंबाला सेंट्रल जेल में छेड़ी थी। इसकी कमान डाक्टर मनमीत सिंह को सौंपी गई थी। जबकि चीफ मेडिकल अफसर डाक्टर विनोद गुप्ता की इस मुहिम पर पूरी सुपरविजन है।
विज्ञापन


स्वास्थ्य महकमे का यही अभियान अब रंग लाने लगा है। अंबाला सेंट्रल जेल में अब 30 बंदियों व कैदियों ने नशे को पूरी तरह से छोड़ दिया है।  ये लोग कई सालों से नशे से बुरी तरह ग्रस्त थे। कई लोग तो ऐसे हैं, जो पिछले चालीस सालों से नशा कर रहे थे और आज उन्होंने नशे को ही अपनी जिंदगी बना लिया था। इसी नशे के चक्कर में वे आज सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन अब इन सभी तीस बंदियों व कैदियों ने न केवल नशा छोड़ दिया है, बल्कि स्वास्थ्य महकमे की जेल में छेड़ी गई नशा छोड़ों मुहिम के लिए नशा छोडने वाले ये बंदी एक मिसाल बन गए हैं। जिन्हे आगे रखकर स्वास्थ्य महकमा जेल में अपनी इस मुहिम को और तेज किए हुए हैं। नशा छोड़ चुके हैं ये लोग अब जेल में अपने अन्य साथियों को नशा छोडने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इस तरह से बंदियों ने छोड़ा नशा
डाक्टर मनमीत सिंह के नेतृत्व में पहले जेल अस्पताल में अलग-अलग इलाज के दौरान आने वाले नशेडिय़ों की काउंसलिंग की गई। एक-एक मरीज पर घंटों फोकस किया गया और बैरकों तक जा-जाकर उसे एक बार नशा छोडने की हिम्मत करने की प्रेरणा दी गई।

अंतत: जैसे-जैसे बंदियों व कैदियों ने नशा पूरी तरह छोड़ दिया, वैसे-वैसे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ती गई। सभी तीस लोगों को नशा छोडने के लिए जेल अस्पताल में बकायदा एक माह तक इलाज दिया गया। इस दौरान उन्हे नशा छोडने की दवाएं भी दी गई। लेकिन आखिर में बंदियों व कैदियों का दृढ़ संकल्प उनके नशे पर भारी पड़ा और उन्होंने नशा छोड़ दिया।


डाक्टर को तस्वीर सौंपकर दी गुरु दक्षिणा
कई दशकों से नशे से ग्रस्त एक कैदी ने जब अंबाला सेंट्रल जेल में नशा छोड़ा तो उसने नशा छुड़वाने में मदद करने वाले डाक्टर मनमीत सिंह को बकायदा उनकी स्कैच करवाई तस्वीर फ्रेम में जड़वाकर बतौर गुरु दक्षिणा भेंट की। इस दौरान जेल अफसर व अन्य स्टाफ भी वहां मौजूद रहे और ये पल खासा भावुक भरा रहा। इस मुहिम की जेल अधीक्षक एआर बिश्रोई, उप अधीक्षक भूपेंद्र सिंह, विशाल छिब्बर, सीएमओ डाक्टर विनोद गुप्ता ने भी खूब सराहना की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed