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Ambala News: संसाधनों में बढ़ोतरी कर घटाई मृत्यु दर, 14 से हुई 12
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अंबाला सिटी। जिला अंबाला में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बीते एक वर्ष में विभिन्न संसाधनों को बढ़ाया है। प्रसव के दौरान औसत मौत का आंकड़ा देखें तो जिले में करीब 14 महिलाएं और शिशु प्रसव के दौरान मर जाते थे। जो घटकर अब 12 हो गया है। इस आंकड़े में कमी लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से ऑक्सीजन और अन्य सुविधाओं का स्तर बढ़ाया गया है।
जिससे बीते एक वर्ष में बच्चों और महिलाओं को रेफर करने की संख्या भी घट रही है। पहले बच्चों को ऑक्सीजन की कमी के कारण रेफर करना पड़ता था। अब यहां पर लेवल टू की सुविधाएं मिल रही हैं। जिससे रेफर रेट में भी कमी आई है। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से भी इस आंकड़े को 10 से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस तरह कमियों का लगाया पता
सोसाइटी फॉर एप्लाइड स्टडीज की ओर से मातृ और शिशु मृत्य दर में कमी लाने के लिए पॉयलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। जांच में देखने को मिला कि कई बच्चों को आक्सीजन के अभाव में रेफर करना पड़ता था। इस कारण उनकी मौत हो जाती थी। इसके साथ ही स्वच्छता का स्तर पर भी इतना बेहतर नहीं था। जिसके कारण भी शिशु व माता को बीमारी हो जाती थी। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए यह पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
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निजी अस्पतालों से किया अनुबंध
डॉ मयंक ने बताया कि इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवतियों के लिए दो निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया है। इससे पहले गर्भवतियों को पीजीआई भेजा जाता था, लेकिन लंबी दूरी के कारण कई बार महिलाओं की मौत हो जाती थी। अब विभाग ने अंबाला सिटी के लिए एमएम अस्पताल और छावनी के लिए आदेश अस्पताल के साथ अनुबंध किया है। जहां पर गर्भवतियों को रेफर किया जाता है। जिससे समय पर उन्हें बेहतर उपचार मिल सके।
बच्चों के लिए बनाया एमएसएनसीयू
अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में नवजातों के लिए विशेष तौर पर एमएसएनसीयू की व्यवस्था की गई है। जिसमें बीमार शिशु को कंगारू मदर केयर देकर उपचार दिया जाता है। इस तकनीक से शिशु जल्दी ठीक होता है। इसके साथ ही दिल्ली की एक विशेष टीम भी शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से एक जांच अभियान भी चला रहा है। जिसमें एमएसएनसीयू बनने के बाद होने वाली मौतों का आंकड़ा और उनके कारणों को खोजा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में कमी लाने प्रयास जारी है। इसके लिए बीते वर्ष ही अस्पताल को बेहतर सुविधाओं के लिए प्रमाण पत्र भी मिला था। जिसमें प्रसव के दौरान मिलने वाली सुविधाओं की जांच हुई थी।
-डॉ़ मयंक अग्रवाल, नोडल अधिकारी, प्रसव विंग स्वास्थ्य विभाग अंबाला।
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जिससे बीते एक वर्ष में बच्चों और महिलाओं को रेफर करने की संख्या भी घट रही है। पहले बच्चों को ऑक्सीजन की कमी के कारण रेफर करना पड़ता था। अब यहां पर लेवल टू की सुविधाएं मिल रही हैं। जिससे रेफर रेट में भी कमी आई है। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से भी इस आंकड़े को 10 से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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इस तरह कमियों का लगाया पता
सोसाइटी फॉर एप्लाइड स्टडीज की ओर से मातृ और शिशु मृत्य दर में कमी लाने के लिए पॉयलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। जांच में देखने को मिला कि कई बच्चों को आक्सीजन के अभाव में रेफर करना पड़ता था। इस कारण उनकी मौत हो जाती थी। इसके साथ ही स्वच्छता का स्तर पर भी इतना बेहतर नहीं था। जिसके कारण भी शिशु व माता को बीमारी हो जाती थी। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए यह पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
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निजी अस्पतालों से किया अनुबंध
डॉ मयंक ने बताया कि इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवतियों के लिए दो निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया है। इससे पहले गर्भवतियों को पीजीआई भेजा जाता था, लेकिन लंबी दूरी के कारण कई बार महिलाओं की मौत हो जाती थी। अब विभाग ने अंबाला सिटी के लिए एमएम अस्पताल और छावनी के लिए आदेश अस्पताल के साथ अनुबंध किया है। जहां पर गर्भवतियों को रेफर किया जाता है। जिससे समय पर उन्हें बेहतर उपचार मिल सके।
बच्चों के लिए बनाया एमएसएनसीयू
अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में नवजातों के लिए विशेष तौर पर एमएसएनसीयू की व्यवस्था की गई है। जिसमें बीमार शिशु को कंगारू मदर केयर देकर उपचार दिया जाता है। इस तकनीक से शिशु जल्दी ठीक होता है। इसके साथ ही दिल्ली की एक विशेष टीम भी शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से एक जांच अभियान भी चला रहा है। जिसमें एमएसएनसीयू बनने के बाद होने वाली मौतों का आंकड़ा और उनके कारणों को खोजा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में कमी लाने प्रयास जारी है। इसके लिए बीते वर्ष ही अस्पताल को बेहतर सुविधाओं के लिए प्रमाण पत्र भी मिला था। जिसमें प्रसव के दौरान मिलने वाली सुविधाओं की जांच हुई थी।
-डॉ़ मयंक अग्रवाल, नोडल अधिकारी, प्रसव विंग स्वास्थ्य विभाग अंबाला।