{"_id":"587bc7164f1c1bd103efe8aa","slug":"blind-soldier-for-24-years-waiting-for-the-pension-ambala-cantt","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेत्रहीन फौजी को 24 साल से है पेंशन का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेत्रहीन फौजी को 24 साल से है पेंशन का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Mon, 16 Jan 2017 12:31 AM IST
विज्ञापन
नेत्रहीन फौजी को 24 साल से है पेंशन का इंतजार
- फोटो : Amar Ujala
सेना में बतौर टीएस नायक तैनात रहे एक फौजी को रिटायरमेंट के 24 साल बीत जाने के बाद भी पेंशन का इंतजार है। यह इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है, जबकि उसकी आंखों की रोशनी खत्म हो चुकी है।
रिटायर्ड फौजी सुरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने इंडियन आर्मी में टीएस नायक पद पर 1977 में कार्यभार संभाला था। इसके बाद से उन्होंने देश के कई स्थानों पर जाकर अपनी सेवा दी है। अपने कार्यकाल के दौरान वह लेह लद्दाख चीन बार्डर, नागालैंड, असम, अहमदाबाद व अन्य स्थानों पर अपनी सेवाएं दे चुके है। उन्होंने सेना में 15 साल 4 महीने और 9 दिन अपने देश के लिए सेवा दी, जबकि 1993 में उनकी रिटायरमेंट हुई। इसके बाद लगा कि पेंशन मिलेगी, जिसके बाद परिवार का गुजर बसर होगा। लेकिन इसके साथ ही पेंशन के लिए ऐसी जंग लडनी पड़ी, जो आज भी जारी है।
उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के बाद उनको आर्मी आफिस बैंगलोर से फोन आया, जिस पर वे कार्यालय गए, लेकिन उनको यह कहते हुए वापस भेज दिया गया कि उनके कागजात अभी तैयार नहीं हैं। इसके बाद पेंशन का ऐसा लंबा इंतजार शुरु हुआ, जो 24 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ। हां, इस दौरान उनकी आंखों से आंसू सूख चुके हैं और आंखों की रोशनी जवाब दे चुकी है। स्थिति यह है कि परिवार की आर्थिक हालत दयनीय है और गुजर बसर के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि आज भी सेना की वर्दी पर भरेसा करता हूं, लेकिन पेंशन न मिलने के कारण काफी परेशानियां झेलनी पड़ रहीं हैं। ऐसा शायद ही कोई दरवाजा होगा, जहां पर उन्होंने दस्तक नहीं दी, लेकिन उनकी सुनवाई किसी ने नहीं की। उनकी पत्नी शशिबाला का कहना है कि पेंशन का हक हासिल करने के लिए घर जमीन सब कुछ गंवा चुके हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। सुरेश कुमार व उनकी पत्नी ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी पेंशन लगवाई जाए, ताकि उम्र के इस पड़ाव पर गुजर बसर तो ठीक से कर सकें।
विज्ञापन
रिटायर्ड फौजी सुरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने इंडियन आर्मी में टीएस नायक पद पर 1977 में कार्यभार संभाला था। इसके बाद से उन्होंने देश के कई स्थानों पर जाकर अपनी सेवा दी है। अपने कार्यकाल के दौरान वह लेह लद्दाख चीन बार्डर, नागालैंड, असम, अहमदाबाद व अन्य स्थानों पर अपनी सेवाएं दे चुके है। उन्होंने सेना में 15 साल 4 महीने और 9 दिन अपने देश के लिए सेवा दी, जबकि 1993 में उनकी रिटायरमेंट हुई। इसके बाद लगा कि पेंशन मिलेगी, जिसके बाद परिवार का गुजर बसर होगा। लेकिन इसके साथ ही पेंशन के लिए ऐसी जंग लडनी पड़ी, जो आज भी जारी है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के बाद उनको आर्मी आफिस बैंगलोर से फोन आया, जिस पर वे कार्यालय गए, लेकिन उनको यह कहते हुए वापस भेज दिया गया कि उनके कागजात अभी तैयार नहीं हैं। इसके बाद पेंशन का ऐसा लंबा इंतजार शुरु हुआ, जो 24 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ। हां, इस दौरान उनकी आंखों से आंसू सूख चुके हैं और आंखों की रोशनी जवाब दे चुकी है। स्थिति यह है कि परिवार की आर्थिक हालत दयनीय है और गुजर बसर के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि आज भी सेना की वर्दी पर भरेसा करता हूं, लेकिन पेंशन न मिलने के कारण काफी परेशानियां झेलनी पड़ रहीं हैं। ऐसा शायद ही कोई दरवाजा होगा, जहां पर उन्होंने दस्तक नहीं दी, लेकिन उनकी सुनवाई किसी ने नहीं की। उनकी पत्नी शशिबाला का कहना है कि पेंशन का हक हासिल करने के लिए घर जमीन सब कुछ गंवा चुके हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। सुरेश कुमार व उनकी पत्नी ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी पेंशन लगवाई जाए, ताकि उम्र के इस पड़ाव पर गुजर बसर तो ठीक से कर सकें।