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Ambala News: गंगा दशहरे पर समलेहड़ी में लगाया भंडारा
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अंबाला सिटी। गंगा दशहरे के उपलक्ष्य पर समलहेड़ी गांव में वार्षिक भंडारा लगाया। भंडारे में आयोजकों की ओर से संत समाज को देसी घी व बादाम वाली विशेष प्रकार की चाय पिलाई। संतों की पंगत शुरू होने से पहले सनातन धर्म के सभी संत महापुरुषों देवो भगवान के सभी अवतारों के जयकारे लगाए।
इसके बाद राम चौक मंदिर के महंत मुरारी दास ने सभी को वस्त्र व धनराशि के रूप में दक्षिण प्रदान की गांव के ही एक आध्यात्मिक मार्ग में जुड़े व्यक्ति ने बताया कि भगवान राम किसी समय में इस जगह से होकर गुजरे थे। इसलिए इस चौक का नाम राम चौक प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां पर एक विशाल पीपल का वृक्ष है जिसे पांच पांडव नाम से जाना जाता है। क्योंकि अन्य पीपल पेड़ों की अपेक्षा इसके पांच मूल हैं, साथ ही राम तालवी नाम से सरोवर भी है। मान्यता है कि इस तालवी के जल से लोगों के दूध पुत्र व पशुधन में बरकत होती है। इन्हें विशेष कर्म के कारण इस मंदिर की आज के समय में भी बहुत मानता है।
इस मंदिर के महंत मुरारी दास ने बताया कि उनके गुरु बाबा भरत दास ने इसी स्थान पर बहुत तपस्या की जिसके कारण इस स्थान का प्रभाव और यहां के स्पंदन बहुत ही आध्यात्मिक है। बाबा भरत दास जी के तत्कालीन समय में इसी स्थान पर एक गौशाला मौजूद थी, उसी समय रात को गायों को चोरी करने के लिए चोर मंदिर में आए थे।
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इसके बाद राम चौक मंदिर के महंत मुरारी दास ने सभी को वस्त्र व धनराशि के रूप में दक्षिण प्रदान की गांव के ही एक आध्यात्मिक मार्ग में जुड़े व्यक्ति ने बताया कि भगवान राम किसी समय में इस जगह से होकर गुजरे थे। इसलिए इस चौक का नाम राम चौक प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां पर एक विशाल पीपल का वृक्ष है जिसे पांच पांडव नाम से जाना जाता है। क्योंकि अन्य पीपल पेड़ों की अपेक्षा इसके पांच मूल हैं, साथ ही राम तालवी नाम से सरोवर भी है। मान्यता है कि इस तालवी के जल से लोगों के दूध पुत्र व पशुधन में बरकत होती है। इन्हें विशेष कर्म के कारण इस मंदिर की आज के समय में भी बहुत मानता है।
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इस मंदिर के महंत मुरारी दास ने बताया कि उनके गुरु बाबा भरत दास ने इसी स्थान पर बहुत तपस्या की जिसके कारण इस स्थान का प्रभाव और यहां के स्पंदन बहुत ही आध्यात्मिक है। बाबा भरत दास जी के तत्कालीन समय में इसी स्थान पर एक गौशाला मौजूद थी, उसी समय रात को गायों को चोरी करने के लिए चोर मंदिर में आए थे।
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