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दूसरों की प्रगति को देखकर प्रसन्न होना सच्चा धर्म : शशांक महाराज
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अंबाला छावनी के श्री बांके बिहारी मंदिर में कथा श्रवण करते श्रद्धालु। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर शशांक महाराज ने भक्ति और कर्म की प्रधानता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मृत्यु के समय व्यक्ति के वही संस्कार सामने आते हैं, जो उसने जीवनभर जिए हैं। दुर्योधन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अंत समय निकट होने पर भी जिसका द्वेष नहीं जाता, उसकी दुर्गति निश्चित है।
शशांक ने कहा कि आज के समय में लोग दूसरों के सुख से दुखी हैं। सच्चा धर्म वही है जिसमें हम दूसरों की प्रगति देख प्रसन्न हों। उन्होंने सकारात्मकता के लिए प्रतिदिन सुबह डायरी में भगवान को धन्यवाद लिखने का सुझाव दिया। अर्जुन और दुर्योधन के प्रसंग पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान के द्वार पर वही पहुंचता है, जो समर्पण करना जानता है। अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने और माता कुंती के संवाद पर महाराज ने भावुक कर देने वाली व्याख्या की। उन्होंने बताया कि कुंती ने दुख इसलिए मांगा ताकि प्रभु सदैव याद रहें। कथा के बीच भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। सभा के प्रधान दिनेश बहल ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान संजीव भाटिया, संजय गौरी और भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर शशांक महाराज ने भक्ति और कर्म की प्रधानता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मृत्यु के समय व्यक्ति के वही संस्कार सामने आते हैं, जो उसने जीवनभर जिए हैं। दुर्योधन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अंत समय निकट होने पर भी जिसका द्वेष नहीं जाता, उसकी दुर्गति निश्चित है।
शशांक ने कहा कि आज के समय में लोग दूसरों के सुख से दुखी हैं। सच्चा धर्म वही है जिसमें हम दूसरों की प्रगति देख प्रसन्न हों। उन्होंने सकारात्मकता के लिए प्रतिदिन सुबह डायरी में भगवान को धन्यवाद लिखने का सुझाव दिया। अर्जुन और दुर्योधन के प्रसंग पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान के द्वार पर वही पहुंचता है, जो समर्पण करना जानता है। अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने और माता कुंती के संवाद पर महाराज ने भावुक कर देने वाली व्याख्या की। उन्होंने बताया कि कुंती ने दुख इसलिए मांगा ताकि प्रभु सदैव याद रहें। कथा के बीच भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। सभा के प्रधान दिनेश बहल ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान संजीव भाटिया, संजय गौरी और भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

अंबाला छावनी के श्री बांके बिहारी मंदिर में कथा श्रवण करते श्रद्धालु। प्रवक्ता
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