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Ambala News: रामलीला में 15 साल से चरित्रों को जीवंत कर रहे कलाकार
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अंबाला। छावनी के खुखरैन भवन में चल रही श्रीराम लीला के कलाकार वृंदावन से पिछले 15 वर्षों से अंबाला में रामलीला का मंचन करने के लिए अपने परिवार के साथ आ रहे हैं। प्रभु की भक्ति में वे इतना लीन है कि उनका पूरा परिवार ही रामलीला, रासलीला और श्रीमद्भागवत के मंचन से जुड़कर अपनी जीविका चला रहा है।
उनकी टीम में 21 कलाकार हैं। अब तक वह नेपाल, मुंबई, कोलकाता, बिहार, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में रामलीला, रासलीला और भागवत कर चुके हैं।
नीलांचल मंडल की शुरुआत
वृंदावन के गौरा नगर निवासी 49 वर्षीय प्रेमचंद वशिष्ठ ने बताया कि अंग्रेजों के समय में उनके दादा स्वामी फतेहराम वशिष्ठ ने सात साल की आयु में बृजलाल बोहरे के मंडल में रासलीला में श्रीकृष्ण का किरदार निभाते हुए मंचन शुरू कर दिया था। 16 साल की आयु में दादा ने अपना नीलांचल मंडल बनाया। रासलीला में कृष्ण के अभिनय के साथ साथ स्वामी फतेहराम वशिष्ठ ने बाजा, सारंगी, मृदंग और तबला बजाना भी सीखा और 98 वर्ष की आयु में रामलीला करते रहे। उन्होंने बताया कि दूसरी पीढ़ी में उनके पिता सुखदेव वशिष्ठ ने मंडल को आगे बढ़ाया और वह भी रासलीला में कृष्ण का किरदार निभाते हुए मंचन करते रहे।
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प्रेमचंद वशिष्ठ के अनुसार तीसरी पीढ़ी में उनके पहले नंबर के बडे़ भाई देवदत्त वशिष्ठ सुदामा और नारद का अभिनय करते थे। अब वह नीलांचल मंडल की व्यवस्था की देखरेख कर रहे हैं, दूसरे नंबर के बडे़ भाई सोहन लाल हास्य कलाकार हैं और वह रामलीला में हास्य कलाकार की भूमिका निभा रहे हैं। प्रेमचंद वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने सात साल की आयु में मंचन शुरू किया था सबसे पहले राधा रानी के किरदार में चार साल तक मंचन करते रहे। इसके बाद वह श्रीकृष्ण का किरदार निभाने लगे। इसके साथ ही उन्होंने वृंदावन में रामानुजन आचार्य से भागवत सीखी।
भागवत सीखने के बाद उन्होंने भागवत कथा करना और रामलीला में अभिनय करना शुरू कर दिया। वह मंच पर रावण, दशरथ, परशुराम, नारद, सुदामा, राजा हरिशचंद्र के अभिनय में करने लगे। मौजूद समय में वह रामलीला और भागवत कथा में बखान करते हैं। मौजूदा पीढ़ी में उनका बड़ा बेटा गगन श्रीराम का किरदार तथा छोटा बेटा गौरव लक्ष्मण के किरदार में अभिनय कर रहे हैं।
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उनकी टीम में 21 कलाकार हैं। अब तक वह नेपाल, मुंबई, कोलकाता, बिहार, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में रामलीला, रासलीला और भागवत कर चुके हैं।
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नीलांचल मंडल की शुरुआत
वृंदावन के गौरा नगर निवासी 49 वर्षीय प्रेमचंद वशिष्ठ ने बताया कि अंग्रेजों के समय में उनके दादा स्वामी फतेहराम वशिष्ठ ने सात साल की आयु में बृजलाल बोहरे के मंडल में रासलीला में श्रीकृष्ण का किरदार निभाते हुए मंचन शुरू कर दिया था। 16 साल की आयु में दादा ने अपना नीलांचल मंडल बनाया। रासलीला में कृष्ण के अभिनय के साथ साथ स्वामी फतेहराम वशिष्ठ ने बाजा, सारंगी, मृदंग और तबला बजाना भी सीखा और 98 वर्ष की आयु में रामलीला करते रहे। उन्होंने बताया कि दूसरी पीढ़ी में उनके पिता सुखदेव वशिष्ठ ने मंडल को आगे बढ़ाया और वह भी रासलीला में कृष्ण का किरदार निभाते हुए मंचन करते रहे।
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प्रेमचंद वशिष्ठ के अनुसार तीसरी पीढ़ी में उनके पहले नंबर के बडे़ भाई देवदत्त वशिष्ठ सुदामा और नारद का अभिनय करते थे। अब वह नीलांचल मंडल की व्यवस्था की देखरेख कर रहे हैं, दूसरे नंबर के बडे़ भाई सोहन लाल हास्य कलाकार हैं और वह रामलीला में हास्य कलाकार की भूमिका निभा रहे हैं। प्रेमचंद वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने सात साल की आयु में मंचन शुरू किया था सबसे पहले राधा रानी के किरदार में चार साल तक मंचन करते रहे। इसके बाद वह श्रीकृष्ण का किरदार निभाने लगे। इसके साथ ही उन्होंने वृंदावन में रामानुजन आचार्य से भागवत सीखी।
भागवत सीखने के बाद उन्होंने भागवत कथा करना और रामलीला में अभिनय करना शुरू कर दिया। वह मंच पर रावण, दशरथ, परशुराम, नारद, सुदामा, राजा हरिशचंद्र के अभिनय में करने लगे। मौजूद समय में वह रामलीला और भागवत कथा में बखान करते हैं। मौजूदा पीढ़ी में उनका बड़ा बेटा गगन श्रीराम का किरदार तथा छोटा बेटा गौरव लक्ष्मण के किरदार में अभिनय कर रहे हैं।