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Ambala News: एक्यूआई 429 तक पहुंचा बिगड़ रही आबोहवा
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। अंबाला में शुक्रवार को अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 429 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। जिसमें पीएम 2.5 के साथ पीएम 10 भी बढ़ा हुआ दिखाई दिया। यहां वायु प्रदूषण में पीएम 10 के कण 380 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किए गए।
वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्य सचिव हरियाणा ने सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ शुक्रवार को समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अंबाला में पराली जलाने की स्थिति पर चिंता जाहिर की और अंबाला के उपायुक्त डॉ शालीन को इस संबंध में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक के बाद उपायुक्त ने पुलिस अधीक्षक और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को 11 बजे से लेकर 4 बजे तक विशेष निगरानी कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी प्रति कृषि विभाग और सभी संबंधित एसडीएम को भी भेजी गई है।
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प्रत्येक गांव में चौकी इंचार्ज, डॉयल 112 रहेगी सक्रिय : उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपनी पूरी टीम फील्ड में लगाएं ताकि प्रत्येक गांव में निगरानी का कार्य हो सके। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रत्येक गांव में सरपंचों, नंबरदारों व पंचों को कड़े निर्देश दें कि अपने गांव में आगजनी की घटनाओं को रोकें। पुलिस अधीक्षक को सभी चौकी इंचार्ज व डॉयल 112 को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। यहां तक कि उपायुक्त ने अपने आदेशों में आखिर में लिखा है कि आदेशों का पालन दृढ़ता से
सुनिश्चित कराएं।
शुक्रवार को पराली एक स्थान पर
जली : पराली का सीजन 15 सितंबर से शुरू हुआ है। तब से लेकर अब तक 166 मामले सामने आ चुके हैं। इतने दिनों में अभी तक 1 नवंबर को सर्वाधिक 13 मामले आगजनी के सेटेलाइट से चिह्नित किए गए थे।
आठ शहर ऐसे जहां पर प्रदूषण की स्थिति गंभीर
अंबाला। पटियाला स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पर्यावरण विभाग में प्रोफेसर व पर्यावरणविद् डॉ वीके गर्ग बताते हैं कि वायु प्रदूषण अब सरकार ही नहीं वैज्ञानिकों के लिए भी चुनौती बन गया है। प्रयास चल रहे हैं मगर अब युद्ध की तरह इस समस्या के लिए काम करने की आवश्यकता है। पहले से ही ऑटोमोबाइल, फैक्ट्रियों का प्रदूषण पर्यावरण में है। इस सीजन में पराली, कचरे को खुले में जलाना जैसे मानव निर्मित प्रदूषण इसको बढ़ाने का काम कर रहे हैं। हवा का धीमा चलना, सूर्य की रोशनी ठीक से न पहुंचना और वातावरण का ठंडा होना इस समस्या को विकराल बना देता है। दीपावली पर इसके और बढ़ने की संभावना है। अब बारिश ही इस प्रदूषण को कम कर सकती है। प्रदेश में आठ शहर ऐसे हैं जहां पर प्रदूषण की गंभीर स्थिति है। इसमें रोहतक, बहादुरगढ़, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, अंबाला, भिवानी और कुरुक्षेत्र शामिल हैं।
लगातार बन रहे गैस चैंबर जैसे हालात
हरियाणा में बीते चार वर्षों में पर्यावरणीय बदलावों को देखते हुए लग रहा है कि अब सितंबर से लेकर जनवरी तक वायु प्रदूषण का खतरा लोगों के सिर पर हर साल मंडराता है। अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर तक तो गैस चैंबर जैसे हालात बन जाते हैं। दीपावली के आने के बाद से इसकी स्थिति और भी खराब होनी तय है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अंबाला में पराली के मामलों की समीक्षा की थी। जिसके बाद उपायुक्त ने पुलिस और डीडीपीओ को 11 बजे से 4 बजे तक निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। कृषि विभाग और संबंधित एसडीएम भी इसमें सहयोग करेंगे। -जसविंदर सैनी, जिला कृषि उप निदेशक, अंबाला
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अंबाला सिटी। अंबाला में शुक्रवार को अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 429 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। जिसमें पीएम 2.5 के साथ पीएम 10 भी बढ़ा हुआ दिखाई दिया। यहां वायु प्रदूषण में पीएम 10 के कण 380 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किए गए।
वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्य सचिव हरियाणा ने सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ शुक्रवार को समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अंबाला में पराली जलाने की स्थिति पर चिंता जाहिर की और अंबाला के उपायुक्त डॉ शालीन को इस संबंध में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
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बैठक के बाद उपायुक्त ने पुलिस अधीक्षक और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को 11 बजे से लेकर 4 बजे तक विशेष निगरानी कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी प्रति कृषि विभाग और सभी संबंधित एसडीएम को भी भेजी गई है।
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प्रत्येक गांव में चौकी इंचार्ज, डॉयल 112 रहेगी सक्रिय : उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपनी पूरी टीम फील्ड में लगाएं ताकि प्रत्येक गांव में निगरानी का कार्य हो सके। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रत्येक गांव में सरपंचों, नंबरदारों व पंचों को कड़े निर्देश दें कि अपने गांव में आगजनी की घटनाओं को रोकें। पुलिस अधीक्षक को सभी चौकी इंचार्ज व डॉयल 112 को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। यहां तक कि उपायुक्त ने अपने आदेशों में आखिर में लिखा है कि आदेशों का पालन दृढ़ता से
सुनिश्चित कराएं।
शुक्रवार को पराली एक स्थान पर
जली : पराली का सीजन 15 सितंबर से शुरू हुआ है। तब से लेकर अब तक 166 मामले सामने आ चुके हैं। इतने दिनों में अभी तक 1 नवंबर को सर्वाधिक 13 मामले आगजनी के सेटेलाइट से चिह्नित किए गए थे।
आठ शहर ऐसे जहां पर प्रदूषण की स्थिति गंभीर
अंबाला। पटियाला स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पर्यावरण विभाग में प्रोफेसर व पर्यावरणविद् डॉ वीके गर्ग बताते हैं कि वायु प्रदूषण अब सरकार ही नहीं वैज्ञानिकों के लिए भी चुनौती बन गया है। प्रयास चल रहे हैं मगर अब युद्ध की तरह इस समस्या के लिए काम करने की आवश्यकता है। पहले से ही ऑटोमोबाइल, फैक्ट्रियों का प्रदूषण पर्यावरण में है। इस सीजन में पराली, कचरे को खुले में जलाना जैसे मानव निर्मित प्रदूषण इसको बढ़ाने का काम कर रहे हैं। हवा का धीमा चलना, सूर्य की रोशनी ठीक से न पहुंचना और वातावरण का ठंडा होना इस समस्या को विकराल बना देता है। दीपावली पर इसके और बढ़ने की संभावना है। अब बारिश ही इस प्रदूषण को कम कर सकती है। प्रदेश में आठ शहर ऐसे हैं जहां पर प्रदूषण की गंभीर स्थिति है। इसमें रोहतक, बहादुरगढ़, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, अंबाला, भिवानी और कुरुक्षेत्र शामिल हैं।
लगातार बन रहे गैस चैंबर जैसे हालात
हरियाणा में बीते चार वर्षों में पर्यावरणीय बदलावों को देखते हुए लग रहा है कि अब सितंबर से लेकर जनवरी तक वायु प्रदूषण का खतरा लोगों के सिर पर हर साल मंडराता है। अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर तक तो गैस चैंबर जैसे हालात बन जाते हैं। दीपावली के आने के बाद से इसकी स्थिति और भी खराब होनी तय है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अंबाला में पराली के मामलों की समीक्षा की थी। जिसके बाद उपायुक्त ने पुलिस और डीडीपीओ को 11 बजे से 4 बजे तक निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। कृषि विभाग और संबंधित एसडीएम भी इसमें सहयोग करेंगे। -जसविंदर सैनी, जिला कृषि उप निदेशक, अंबाला