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Ambala News: पासपोर्ट बनवाने के लिए दिया अप्वाइंटमेंट, आधी रात को मैसेज भेज किया रद
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अंबाला सिटी। अप्वाइंटमेंट मिलने के बाद सुबह ही धूलकोट स्थित पासपोर्ट कार्यालय पहुंचे लोगाें को कार्यालय बंद मिला। अमृतसर, कुरुक्षेत्र, करनाल, चरखी दादरी आदि क्षेत्रों से आए लोगों ने पता किया तो पाया कि कार्यालय में छुट्टी है। यह पता चलते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने सरकार व पासपोर्ट कार्यालय के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध जताया और छुट्टी होने की जानकारी न देने पर रोष व्यक्त किया।
साथ ही बताया कि उनकी पहले अप्वाइंटमेंट एक बार रद कर दी गई थी। इसके बाद दोबारा से विभाग ने मैसेज भेजते हुए समय दिया। वह सारे काम-काज छोड़कर निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचे तो उन्हें कार्यालय बंद मिला। इस दौरान उन्होंने अगले एक सप्ताह में अप्वाइंटमेंट देने की मांग की। सूचना पर बलदेव नगर चौकी से पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया परंतु गुस्साए लोगों ने पुलिस के समक्ष रोष व्यक्त करते हुए कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों से बात करवाने की मांग की। पुलिस भी कुछ नहीं कर सकी और लोगों को सड़क से दूर करवाने का प्रयास करती रही।
स्थिति यह थी कि कार्यालय के आसपास पीने के पानी तक की सुविधा नहीं थी। इस कारण लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों ने बताया कि कार्यालय एक अप्वाइंटमेंट के रुपये लेती है। वह काफी समय से चिलचिलाती धूप में खड़े हुए हैं। यहां तक कि कई लोग तो चक्कर खाकर गिर पड़े। जिन्हें किसी तरह से संभाला। इसमें न केवल बच्चे हैं, बल्कि बुजुर्ग व बीमार लोग भी शामिल हैं। विभाग के पास सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। उन्हें विभाग की गलती के कारण खासी परेशानी झेलनी पड़ी है। वहीं अभी अगले अप्वाइंटमेंट को लेकर भी कोई सहमति नहीं बनी है।
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पहले सूचना देनी थी
अमृतसर से आए हैं, हमें अप्वाइंटमेंट के लिए मैसेज आया था। सुबह ही निकल पड़े थे। कार्यालय पहुंचे तो बंद पड़ा था। वहीं अब कोई जवाब देने वाला भी यहां पर नहीं है। अगर छुट्टी ही करनी थी तो लोगों को एक दिन पहले सूचना देनी चाहिए थी। -अर्शदीप।
कोई पूछने नहीं आया
विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सुबह से खड़े हैं परंतु न कोई पूछने आया है और न ही कोई जवाब दे रहा है। अगर टोलफ्री नंबर पर बात करने का प्रयास करते हैं तो वह चंडीगढ़ आने का कह रहे हैं। चंडीगढ़ जाना कैसे संभव है। - अनिता।
विभाग को अगर छुट्टी ही करनी तो अप्वाइंटमेंट देटी ही नहीं चाहिए थी। आधी रात को कौन मैसेज भेजता और देखता है। ऐसा तो नहीं था कि एक दम से विभाग की छुट्टी का प्लान बना होगा। विभाग के कारण परेशानी लोगों को झेलनी पड़ रही है। - अनिल कुमार।
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साथ ही बताया कि उनकी पहले अप्वाइंटमेंट एक बार रद कर दी गई थी। इसके बाद दोबारा से विभाग ने मैसेज भेजते हुए समय दिया। वह सारे काम-काज छोड़कर निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचे तो उन्हें कार्यालय बंद मिला। इस दौरान उन्होंने अगले एक सप्ताह में अप्वाइंटमेंट देने की मांग की। सूचना पर बलदेव नगर चौकी से पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया परंतु गुस्साए लोगों ने पुलिस के समक्ष रोष व्यक्त करते हुए कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों से बात करवाने की मांग की। पुलिस भी कुछ नहीं कर सकी और लोगों को सड़क से दूर करवाने का प्रयास करती रही।
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स्थिति यह थी कि कार्यालय के आसपास पीने के पानी तक की सुविधा नहीं थी। इस कारण लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों ने बताया कि कार्यालय एक अप्वाइंटमेंट के रुपये लेती है। वह काफी समय से चिलचिलाती धूप में खड़े हुए हैं। यहां तक कि कई लोग तो चक्कर खाकर गिर पड़े। जिन्हें किसी तरह से संभाला। इसमें न केवल बच्चे हैं, बल्कि बुजुर्ग व बीमार लोग भी शामिल हैं। विभाग के पास सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। उन्हें विभाग की गलती के कारण खासी परेशानी झेलनी पड़ी है। वहीं अभी अगले अप्वाइंटमेंट को लेकर भी कोई सहमति नहीं बनी है।
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पहले सूचना देनी थी
अमृतसर से आए हैं, हमें अप्वाइंटमेंट के लिए मैसेज आया था। सुबह ही निकल पड़े थे। कार्यालय पहुंचे तो बंद पड़ा था। वहीं अब कोई जवाब देने वाला भी यहां पर नहीं है। अगर छुट्टी ही करनी थी तो लोगों को एक दिन पहले सूचना देनी चाहिए थी। -अर्शदीप।
कोई पूछने नहीं आया
विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सुबह से खड़े हैं परंतु न कोई पूछने आया है और न ही कोई जवाब दे रहा है। अगर टोलफ्री नंबर पर बात करने का प्रयास करते हैं तो वह चंडीगढ़ आने का कह रहे हैं। चंडीगढ़ जाना कैसे संभव है। - अनिता।
विभाग को अगर छुट्टी ही करनी तो अप्वाइंटमेंट देटी ही नहीं चाहिए थी। आधी रात को कौन मैसेज भेजता और देखता है। ऐसा तो नहीं था कि एक दम से विभाग की छुट्टी का प्लान बना होगा। विभाग के कारण परेशानी लोगों को झेलनी पड़ रही है। - अनिल कुमार।