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अंकुश ने जर्मनी में जीता सोना
अमर उजाला अंबाला
Updated Sun, 18 May 2014 12:07 AM IST
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अंबाला कैंट। अंबाला के एक छोटे से गांव चुड़ियाली के युवा अंकुश ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
पिछले दिनों जर्मनी में हुई अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता में अंकुश भारद्वाज ने जीत दर्ज कर अंबाला और देश का नाम रोशन किया है। इस मुकाबले में अंकुश ने गोल्ड मेडल पर निशाना साधा। अंकुश की इस जीत से उसके परिजन और प्रशिक्षक खासे उत्साहित हैं।
यह शूटिंग प्रतियोगिता 28 अप्रैल से 4 मई तक जर्मनी में हुई। अंकुश ने प्रतियोगिता के सेंटर फायर, रैपिड फायर वर्गों में भाग लिया था जिसमें सेंटर फायर पिस्टल में अंकुश ने टीम का गोल्ड मेडल तथा व्यक्तिगत कांस्य पदक प्राप्त किया। अंकुश सेंटर फायर पिस्टल में कांस्य पदक प्राप्त करने वाला एकमात्र इंडियन पिस्टल शूटर बना।
उसने 45वीं अंतरराष्ट्रीय ग्रांडप्रिक्स लिबरेशन शूटिंग प्रतियोगिता में चैक गणराज्य पलैजन में 6 मई से 13 मई तक हुई प्रतियोगिता में में सेंटर फायर पिस्टल, रैपिड फायर पिस्टल, स्टैंर्ड पिस्टल में भाग लिया था।
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इससे पहले भी कामनवेल्थ यूथ गेम्स 2008 में भी गोल्ड व कांस्य पदक हासिल कर चुका है। अंकुश हर रोज दिल्ली में 10-12 घंटे तक अभ्यास करता है। अंकुश ने अपनी जीत का श्रेय परिजनों, गुरुजनों को दिया। अब वह ओलंपिक गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहता है।
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पिछले दिनों जर्मनी में हुई अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता में अंकुश भारद्वाज ने जीत दर्ज कर अंबाला और देश का नाम रोशन किया है। इस मुकाबले में अंकुश ने गोल्ड मेडल पर निशाना साधा। अंकुश की इस जीत से उसके परिजन और प्रशिक्षक खासे उत्साहित हैं।
यह शूटिंग प्रतियोगिता 28 अप्रैल से 4 मई तक जर्मनी में हुई। अंकुश ने प्रतियोगिता के सेंटर फायर, रैपिड फायर वर्गों में भाग लिया था जिसमें सेंटर फायर पिस्टल में अंकुश ने टीम का गोल्ड मेडल तथा व्यक्तिगत कांस्य पदक प्राप्त किया। अंकुश सेंटर फायर पिस्टल में कांस्य पदक प्राप्त करने वाला एकमात्र इंडियन पिस्टल शूटर बना।
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उसने 45वीं अंतरराष्ट्रीय ग्रांडप्रिक्स लिबरेशन शूटिंग प्रतियोगिता में चैक गणराज्य पलैजन में 6 मई से 13 मई तक हुई प्रतियोगिता में में सेंटर फायर पिस्टल, रैपिड फायर पिस्टल, स्टैंर्ड पिस्टल में भाग लिया था।
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इससे पहले भी कामनवेल्थ यूथ गेम्स 2008 में भी गोल्ड व कांस्य पदक हासिल कर चुका है। अंकुश हर रोज दिल्ली में 10-12 घंटे तक अभ्यास करता है। अंकुश ने अपनी जीत का श्रेय परिजनों, गुरुजनों को दिया। अब वह ओलंपिक गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहता है।