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गुस्साए लोगों ने बैंक ब्रांच पर जड़ा ताला
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Thu, 24 Nov 2016 12:25 AM IST
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बैंक पर ताला जड़ते लोग
- फोटो : amar ujala
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बुधवार को कैश निकलवाने में आ रही दिक्कत के चलते जहां गांव अंबली के लोगों ने बैंक पर ही ताला जड़ दिया, वहीं नोटबंदी के 15वें दिन कांग्रेसियों ने सड़क पर प्रदर्शन कर सरकार का पुतला फूंका। बुधवार को भी नोटबंदी का असर देखने को मिला, जबकि बैंकों के बाहर एटीएम पर लंबी लाइनें लगी रहीं। वहीं, बड़े नोटों ने अब लोगों की दिक्कतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं।
सेंट्रल बैंक पर ग्रामीणों ने जड़ा ताला
गांव अंबली में सेंट्रल बैंक की शाखा में लोगों ने बैंक कर्मियों की मनमानी के चलते ताला जड़ दिया। इस कारण बैंक कर्मचारी भीतर ही रह गए, जबकि सूचना पाकर थाना प्रभारी कमलदीप मौके पर पहुंचे। बैंक पर ताला जड़ने वाले लोगों का कहना है कि हम तीन दिन से लाइन में लगे हुए हैं लेकिन हमें कैश नहीं मिल रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी अपने जान पहचान वालों को कैश देकर अपनी लिहाज पूरी कर रहे हैं, जिस कारण परेशान होकर हमें यह कदम उठाना पड़ा। बैंक मैनेजर गजानंद परेवा का कहना है कि उच्चाधिकारियों को सूचित कर बैंक में अधिक कैश मंगवाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि सोमवार को बैंक में 12 लाख व मंगलवार को 5 लाख कैश आया था जोकि खाता धारकों को आरबीआई के निर्देशानुसार बांट दिया था। बैंक में कैश कम आने की दिक्कत जरूर है लेकिन लोगों को भी संयम से काम लेना चाहिए।
सरकार का पुतला फूंका
नोटबंदी के 15वें दिन ब्लॉक कांग्रेस अंबाला कैंट इकाई ने बुधवार को केंद्र सरकार का पुतला फूंका। इस दौरान ब्लाक कांग्रेस कैंट के पूर्व प्रधान हीरालाल यादव, डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल, दर्शन लाल दुआ, हरविंदर सिंह नीटू, रघुवीर यादव, वीरेंद्र कनौजिया, सुरेंद्र शर्मा, सुरेंद्र चांवरिया, अशोक बुद्धिराजा, जयदीप भल्ला, संजय, सचिन, विशाल शर्मा, हुकमचंद, अरुण बागड़ी, कमल धीमान, गुलशन कुमार, मिंटू यादव, महेंद्र सोनकर, डिंपल, गौरव, धर्मेंद्र, प्रेमपंचद, फूलचंद, डालचंद पासी, विपिन कनोजिया, विपिन भट्ट, अक्षय वैश आदि ने कहा कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर केंद्र सरकार ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार ने अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया है। जिन नोटों को बंद किया गया है, उसमें यही नोट सबसे ज्यादा प्रचलित थे। लोगों को अपना कैश निकलवाने के लिए परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। बुजुर्गों को उनकी पूरी पेंशन तक बैंक से नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है, जबकि अपनी विफलताओं को छिपा रही है।
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आज रात के बाद पुरानी करेंसी पर लग सकता है ब्रेक
नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को लेकर दी गई छूट की समय सीमा 24 नवंबर रात्रि 12 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में लोगों की धड़कनें भी बढ़ती जा रही हैं। यह समय सीमा सरकार द्वारा दूसरी बार बढ़ाई गई थी, जबकि अब सरकार पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। कैंट के रहने वाले दीपक कनौयिजा, रंजीत सिंह, पंकज मल्होत्रा, दीपक रस्तोगी, मोहिंदर पाल सिंह, हेमंत शर्मा का कहना है कि अभी लोग 500 या 1000 रुपये के नोट लेकर घूम रहे हैं, जबकि बैंक में भी इनको बदलवाने में नियम कानून आड़े आ रहे हैं। ऐसे में अब 24 नवंबर रात्रि 12 बजे से पहले इनको कैसे चलाएं समझ नहीं आ रहा है। यदि इस बार यह समय सीमा न बढ़ाई गई तो खासी परेशानियां झेलनी पड़ेगी। अधिकतर घरों में स्कूटर अथवा बाइक है, जबकि यदि समय सीमा न बढ़ी तो फिर दिक्कतें बढ़ेंगी।
पुरानी करेंसी पर नहीं जमा हुए बिल
मुलाना डाकखाने में टेलीफोन का बिल जमा करने गए ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। मामला पुराने 500 व 1000 रूपये के नोट न लेने का था। श्रीपाल जैन, सुरिंद्र, अंकित व राकेश ने बताया कि वे बीएसएनएल लैंडलाइन का बिल भरने जैसे ही मुलाना डाकखाने पहुंचे तो उनके हाथों में 500 और 1000 रुपये के नोट देखकर पोस्ट मास्टर ने नियमों का हवाला देते हुए पुरानी करेंसी लेने से इनकार कर दिया।
सहकारी बैंकों में कैश कम
सहकारी बैंकों में भी उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी बैंकों को कैश दिया गया है, जबकि पुरानी करेंसी को नहीं लिया जा रहा है। इन बैंकों में खाताधारकों से लेनदेन नई करंसी के साथ ही हो रहा है, जबकि इनमें पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं मिल रहा है। इन बैंकों को भी सीमित मात्रा में ही कैश दे रहे हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक है। कम कैश होने के कारण यह जल्द खत्म हो रहा है, जिससे दिक्कतें बढ़ रही हैं।
कैश के लिए बैंक अधिकारियों की दौड़
कैश लेने के लिए भी बैंक अधिकारियों की दौड़ चंडीगढ़ करनाल तक लग रही है। अंबाला में पीएनबी और एसबीआई की चेस्ट है, जबकि अन्य बैंकों की नहीं है। इन दोनों चेस्ट से वे अपनी शाखाओं को कैश दे रहे हैं, जबकि अन्य बैंकों को कैश के लिए चंडीगढ़ अथवा करनाल तक दौड़ लगानी पड़ रही है। इसी कारण सुबह कैश देरी से पहुंचता है, जबकि ग्राहकों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
एटीएम के बाहर लग रही लाइनें
लोगों को अभी भी बैंकों से कैश निकासी में दिक्कत आ रही है, जबकि एटीएम के बाहर लाइनें लगी हैं। हालांकि कुछ बैंकों के एटीएम पर यह कम हुई हैं, लेकिन कई एटीएम बंद होने के कारण लोगों को दिक्कतें आ रही हैं। सिटी के बनारसी दास, गोपाल दास, मनोज शर्मा, राकेश कुमार, सतीश, जसकरण सिंह का कहना है कि कई एटीएम तो सर्विस में नहीं हैं, जबकि कइयों का तो शटर ही नहीं उठता। जिनमें कैश होता है, वहां पर भीड़ लगी रहती है। यही स्थिति रही तो परेशानियां बढ़ सकती हैं।
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सेंट्रल बैंक पर ग्रामीणों ने जड़ा ताला
गांव अंबली में सेंट्रल बैंक की शाखा में लोगों ने बैंक कर्मियों की मनमानी के चलते ताला जड़ दिया। इस कारण बैंक कर्मचारी भीतर ही रह गए, जबकि सूचना पाकर थाना प्रभारी कमलदीप मौके पर पहुंचे। बैंक पर ताला जड़ने वाले लोगों का कहना है कि हम तीन दिन से लाइन में लगे हुए हैं लेकिन हमें कैश नहीं मिल रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी अपने जान पहचान वालों को कैश देकर अपनी लिहाज पूरी कर रहे हैं, जिस कारण परेशान होकर हमें यह कदम उठाना पड़ा। बैंक मैनेजर गजानंद परेवा का कहना है कि उच्चाधिकारियों को सूचित कर बैंक में अधिक कैश मंगवाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि सोमवार को बैंक में 12 लाख व मंगलवार को 5 लाख कैश आया था जोकि खाता धारकों को आरबीआई के निर्देशानुसार बांट दिया था। बैंक में कैश कम आने की दिक्कत जरूर है लेकिन लोगों को भी संयम से काम लेना चाहिए।
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सरकार का पुतला फूंका
नोटबंदी के 15वें दिन ब्लॉक कांग्रेस अंबाला कैंट इकाई ने बुधवार को केंद्र सरकार का पुतला फूंका। इस दौरान ब्लाक कांग्रेस कैंट के पूर्व प्रधान हीरालाल यादव, डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल, दर्शन लाल दुआ, हरविंदर सिंह नीटू, रघुवीर यादव, वीरेंद्र कनौजिया, सुरेंद्र शर्मा, सुरेंद्र चांवरिया, अशोक बुद्धिराजा, जयदीप भल्ला, संजय, सचिन, विशाल शर्मा, हुकमचंद, अरुण बागड़ी, कमल धीमान, गुलशन कुमार, मिंटू यादव, महेंद्र सोनकर, डिंपल, गौरव, धर्मेंद्र, प्रेमपंचद, फूलचंद, डालचंद पासी, विपिन कनोजिया, विपिन भट्ट, अक्षय वैश आदि ने कहा कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर केंद्र सरकार ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार ने अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया है। जिन नोटों को बंद किया गया है, उसमें यही नोट सबसे ज्यादा प्रचलित थे। लोगों को अपना कैश निकलवाने के लिए परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। बुजुर्गों को उनकी पूरी पेंशन तक बैंक से नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है, जबकि अपनी विफलताओं को छिपा रही है।
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आज रात के बाद पुरानी करेंसी पर लग सकता है ब्रेक
नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को लेकर दी गई छूट की समय सीमा 24 नवंबर रात्रि 12 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में लोगों की धड़कनें भी बढ़ती जा रही हैं। यह समय सीमा सरकार द्वारा दूसरी बार बढ़ाई गई थी, जबकि अब सरकार पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। कैंट के रहने वाले दीपक कनौयिजा, रंजीत सिंह, पंकज मल्होत्रा, दीपक रस्तोगी, मोहिंदर पाल सिंह, हेमंत शर्मा का कहना है कि अभी लोग 500 या 1000 रुपये के नोट लेकर घूम रहे हैं, जबकि बैंक में भी इनको बदलवाने में नियम कानून आड़े आ रहे हैं। ऐसे में अब 24 नवंबर रात्रि 12 बजे से पहले इनको कैसे चलाएं समझ नहीं आ रहा है। यदि इस बार यह समय सीमा न बढ़ाई गई तो खासी परेशानियां झेलनी पड़ेगी। अधिकतर घरों में स्कूटर अथवा बाइक है, जबकि यदि समय सीमा न बढ़ी तो फिर दिक्कतें बढ़ेंगी।
पुरानी करेंसी पर नहीं जमा हुए बिल
मुलाना डाकखाने में टेलीफोन का बिल जमा करने गए ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। मामला पुराने 500 व 1000 रूपये के नोट न लेने का था। श्रीपाल जैन, सुरिंद्र, अंकित व राकेश ने बताया कि वे बीएसएनएल लैंडलाइन का बिल भरने जैसे ही मुलाना डाकखाने पहुंचे तो उनके हाथों में 500 और 1000 रुपये के नोट देखकर पोस्ट मास्टर ने नियमों का हवाला देते हुए पुरानी करेंसी लेने से इनकार कर दिया।
सहकारी बैंकों में कैश कम
सहकारी बैंकों में भी उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी बैंकों को कैश दिया गया है, जबकि पुरानी करेंसी को नहीं लिया जा रहा है। इन बैंकों में खाताधारकों से लेनदेन नई करंसी के साथ ही हो रहा है, जबकि इनमें पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं मिल रहा है। इन बैंकों को भी सीमित मात्रा में ही कैश दे रहे हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक है। कम कैश होने के कारण यह जल्द खत्म हो रहा है, जिससे दिक्कतें बढ़ रही हैं।
कैश के लिए बैंक अधिकारियों की दौड़
कैश लेने के लिए भी बैंक अधिकारियों की दौड़ चंडीगढ़ करनाल तक लग रही है। अंबाला में पीएनबी और एसबीआई की चेस्ट है, जबकि अन्य बैंकों की नहीं है। इन दोनों चेस्ट से वे अपनी शाखाओं को कैश दे रहे हैं, जबकि अन्य बैंकों को कैश के लिए चंडीगढ़ अथवा करनाल तक दौड़ लगानी पड़ रही है। इसी कारण सुबह कैश देरी से पहुंचता है, जबकि ग्राहकों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
एटीएम के बाहर लग रही लाइनें
लोगों को अभी भी बैंकों से कैश निकासी में दिक्कत आ रही है, जबकि एटीएम के बाहर लाइनें लगी हैं। हालांकि कुछ बैंकों के एटीएम पर यह कम हुई हैं, लेकिन कई एटीएम बंद होने के कारण लोगों को दिक्कतें आ रही हैं। सिटी के बनारसी दास, गोपाल दास, मनोज शर्मा, राकेश कुमार, सतीश, जसकरण सिंह का कहना है कि कई एटीएम तो सर्विस में नहीं हैं, जबकि कइयों का तो शटर ही नहीं उठता। जिनमें कैश होता है, वहां पर भीड़ लगी रहती है। यही स्थिति रही तो परेशानियां बढ़ सकती हैं।