{"_id":"6a42dfb76d2532f579086a56","slug":"aluminium-and-brass-prices-rise-traders-face-increased-difficulties-ambala-news-c-36-1-amb1002-165511-2026-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: एल्युमीनियम, पीतल महंगा, कारोबारियों की बढ़ी परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: एल्युमीनियम, पीतल महंगा, कारोबारियों की बढ़ी परेशानी
विज्ञापन
माइक्रोस्कोप । संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने साइंस सिटी अंबाला के विज्ञान उपकरण उद्योग की कमर तोड़ दी है। तीन से चार महीनों से एल्युमीनियम, पीतल और प्लास्टिक के दामों में आई भारी तेजी के कारण शैक्षणिक और मेडिकल उपकरणों की निर्माण लागत काफी बढ़ गई है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा में टिके रहना स्थानीय कारोबारियों के लिए चुनौती बन गया है।
धातुओं के रेट बढ़ने का सबसे सीधा असर शैक्षणिक और मेडिकल माइक्रोस्कोप पर पड़ा है, जिनकी कीमतों में 300 से 400 रुपये तक का उछाल आ चुका है। एल्को साइंटिफिक के संचालक अश्वनी नागपाल का कहना है कि अकेले माइक्रोस्कोप को तैयार करने में 10 से 12 अलग-अलग पार्ट लगते हैं, जिन्हें विभिन्न धातुओं से ढाला जाता है। ऐसे में एक-एक धातु के दाम बढ़ने से अंतिम उत्पाद की लागत काफी ऊपर चली गई है।
धातु महंगी होने से ढलाई (कास्टिंग) का काम भी बेहद खर्चीला हो गया है। पहले शैक्षणिक माइक्रोस्कोप 1500 रुपये के आसपास बेचते थे अब 1900 तक बेचना पड़ रहा है। इसमें दिक्कत यह है कि शैक्षणिक संस्थान रेट अधिक होने से सस्ती गुणवत्ता का माल खरीदने की तरफ देखता है। इससे घरेलू निर्माताओं को नुकसान होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला। कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने साइंस सिटी अंबाला के विज्ञान उपकरण उद्योग की कमर तोड़ दी है। तीन से चार महीनों से एल्युमीनियम, पीतल और प्लास्टिक के दामों में आई भारी तेजी के कारण शैक्षणिक और मेडिकल उपकरणों की निर्माण लागत काफी बढ़ गई है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा में टिके रहना स्थानीय कारोबारियों के लिए चुनौती बन गया है।
धातुओं के रेट बढ़ने का सबसे सीधा असर शैक्षणिक और मेडिकल माइक्रोस्कोप पर पड़ा है, जिनकी कीमतों में 300 से 400 रुपये तक का उछाल आ चुका है। एल्को साइंटिफिक के संचालक अश्वनी नागपाल का कहना है कि अकेले माइक्रोस्कोप को तैयार करने में 10 से 12 अलग-अलग पार्ट लगते हैं, जिन्हें विभिन्न धातुओं से ढाला जाता है। ऐसे में एक-एक धातु के दाम बढ़ने से अंतिम उत्पाद की लागत काफी ऊपर चली गई है।
विज्ञापन
धातु महंगी होने से ढलाई (कास्टिंग) का काम भी बेहद खर्चीला हो गया है। पहले शैक्षणिक माइक्रोस्कोप 1500 रुपये के आसपास बेचते थे अब 1900 तक बेचना पड़ रहा है। इसमें दिक्कत यह है कि शैक्षणिक संस्थान रेट अधिक होने से सस्ती गुणवत्ता का माल खरीदने की तरफ देखता है। इससे घरेलू निर्माताओं को नुकसान होता है।
विज्ञापन