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गोली लगने के बाद लहूलुहान मां को थी अपने से ज्यादा तीनों बच्चों की चिंता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 12:15 AM IST
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After being shot, the bleeding mother was more worried about the three children than herself
राजेश शांडिल्य
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अंबाला। जब देवर ने रचना को गोली मारी तो लहूलुहान अवस्था में वह अपने दर्द से ज्यादा इसलिए चीख पुकार कर रही थी कि कहीं उसे कुछ हो गया तो उसके तीनों बच्चों का क्या होगा? खुद रचना के सिर से करीब 13 वर्ष की उम्र में पिता का साया उठ गया था और एक साल पहले उसके तीनों बच्चों के सिर से भी।
घटनाक्रम को बताते समय रचना की ममेरी बहन किरण फफक पड़ी। उसने कहा कि रचना लगातार यही बोल रही थी कि मुझे बचा लो... मुझे बचा लो...। बता दें कि रचना के पिता गुरमीत सिंह का 20 साल पहले स्वर्गवास हो चुका है। परिवार ने 2004 में छोटी उम्र में एक रिश्तेदार के कहने पर रचना के हाथ पीले कर दिये थे। उसका विवाह गाजियाबाद वासी नीलेश के साथ हुआ था।
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रचना के मायके वालों का कहना है कि नशे और बुरी आदतों का शिकार होने के कारण 19 सितंबर 2020 को नीलेश का निधन हो गया था। उसे हार्ट अटैक हुआ था। अब पति की मृत्यु के बाद 33 वर्षीया रचना के कंधों पर 16 वर्षीया बेटी दीपिका, 14 वर्षीय पुत्र शिवा और 10 वर्षीय पुत्र पूर्व का जिम्मा है। मगर ससुराल पक्ष की ओर से रचना को सहायता देना तो दूर, उलटा देवर ने उसे गोली मार दी। परिवार ने बताया कि रचना के पति की मृत्यु के बाद से ही उसका देवर संदीप उस पर गलत निगाह रखे हुए था और उसे परेशान करता था। बताया गया है कि संदीप नोएडा की तहसील में प्राईवेट काम धंधा करता है। अब पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वह रिवाल्वर कहां से लेकर आया था।
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पिता का था हैदराबाद में ढाबा, जिसका सामान तक बेच दिया था पति ने
रचना के मामा रवि ने बताया कि उसके पिता गुरमीत सिंह का हैदराबाद में हाईवे पर पंजाबी ढाबा था। उनकी मौत के बाद यह ढाबा उनके नौकर चला रहे थे। नीलेश को प्रापर्टी डीलर बता कर रचना का विवाह किया गया था। वह शादी के बाद स्वर्गीय ससुर के ढाबे पर जाकर काबिज हो गया। उसने ढाबे का सामान तक बेच डाला। रचना के मायके वालों का कहना है कि उनके परिवार के लिए जो आय का एकमात्र साधन था, वह भी उसने खत्म कर दिया था।

भाभी को गोली मारने के बाद निजी अस्पतालों में ले गया था आरोपी देवर
भाभी को गोली मारने के बाद आरोपी संदीप उसे खुद गोद में उठाकर निजी अस्पताल तक ले गया था। बताया गया है कि वह लहूलुहान हुई भाभी रचना को सरकारी अस्पताल की बजाए तीन निजी अस्पतालों में ले गया था, लेकिन पुलिस केस की वजह से तीनों जगह पर उसका उपचार नहीं हुआ। आखिरकार रचना का उपचार सिविल अस्पताल में शुरू हुआ था। जहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। इसके बाद चर्चा यही थी कि उसे पुलिस ने काबू कर लिया है, लेकिन थाना प्रभारी ने बताया कि संदीप फरार है, उसकी तलाश जारी है।
घटनाक्रम
सुबह पौने आठ बजे गोली मारी
घायल भाभी को इलाज के लिए पौने 10 बजे तक निजी अस्पतालों में पहुंचा
करीब 10 बजे सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया
सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया
शाम चार बजे रचना का चंडीगढ़ पीजीआई में ऑपरेशन हुआ
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