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Ambala News: 7वीं कोशिश में हासिल की सफलता, राहुल बने सेना में लेफ्टिनेंट
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राहुल।
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। हौसले बुलंद हों और मंजिल पाने का जुनून हो, तो असफलताओं की कोई भी दीवार आपका रास्ता नहीं रोक सकती। इस कहावत को सिटी के जग्गी गार्डन निवासी अंबाला के राहुल धाकड़ ने सच कर दिखाया है। सातवें प्रयास में सफलता हासिल कर राहुल भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट बने हैं। उनकी इस उपलब्धि पर मोहल्ले में जश्न का माहौल है। प्रशिक्षण केंद्र से पास आउट होकर जब लेफ्टिनेंट राहुल धाकड़ अपने गृहनगर पहुंचे, तो परिजनों और मोहल्लावासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। माता-पिता ने बेटे का मुंह मीठा कराया और आरती उतारकर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
लेफ्टिनेंट राहुल धाकड़ ने बताया कि उनका बचपन से ही उन्होंने देश सेवा का सपना देखा था। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम करते हुए सीडीएस की तैयारी की। कई बार एसएसबी इंटरव्यू में स्क्रीन-आउट और कॉन्फ्रेंस-आउट का सामना करना पड़ा, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि 7वें प्रयास में मुझे सफलता मिली और मैंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई में प्रशिक्षण पूरा किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को खेल-कूद, अनुशासन, किताबों के अध्ययन और अपने संचार कौशल पर निरंतर ध्यान देना चाहिए।
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अंबाला सिटी। हौसले बुलंद हों और मंजिल पाने का जुनून हो, तो असफलताओं की कोई भी दीवार आपका रास्ता नहीं रोक सकती। इस कहावत को सिटी के जग्गी गार्डन निवासी अंबाला के राहुल धाकड़ ने सच कर दिखाया है। सातवें प्रयास में सफलता हासिल कर राहुल भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट बने हैं। उनकी इस उपलब्धि पर मोहल्ले में जश्न का माहौल है। प्रशिक्षण केंद्र से पास आउट होकर जब लेफ्टिनेंट राहुल धाकड़ अपने गृहनगर पहुंचे, तो परिजनों और मोहल्लावासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। माता-पिता ने बेटे का मुंह मीठा कराया और आरती उतारकर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
लेफ्टिनेंट राहुल धाकड़ ने बताया कि उनका बचपन से ही उन्होंने देश सेवा का सपना देखा था। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम करते हुए सीडीएस की तैयारी की। कई बार एसएसबी इंटरव्यू में स्क्रीन-आउट और कॉन्फ्रेंस-आउट का सामना करना पड़ा, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि 7वें प्रयास में मुझे सफलता मिली और मैंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई में प्रशिक्षण पूरा किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को खेल-कूद, अनुशासन, किताबों के अध्ययन और अपने संचार कौशल पर निरंतर ध्यान देना चाहिए।
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