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सेना के लिए सिरदर्द बना गुड़गुड़िया नाला
Ambala
Updated Wed, 15 May 2013 05:30 AM IST
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अंबाला। छावनी का सबसे बड़ा ‘गुड़गुड़िया नाला’ सेना के लिए सिरदर्द बन गया है। यह नाला सेना, सिविल और रेलवे क्षेत्र से होता हुआ फिर सैन्य क्षेत्र में ही प्रवेश करता है। लेकिन दोबारा सैन्य क्षेत्र में पहुंचते-पहुंचते यह नाला इतना गंदा हो जाता है कि इसकी सफाई सेना के लिए सिरदर्द बन जाती है।
सेना अफसरों ने इस मुद्दे को कैंटोनमेंट बोर्ड की बैठक में प्रमुखता से उठाया था। सेना अफसराें का कहना था कि सैन्य क्षेत्र में ये नाला जब निकलता है, तो वहां इसकी नियमित सफाई होती है। लेकिन सिविल और रेलवे क्षेत्र से गुजर6ने के बाद नाला जब दोबारा सैन्य क्षेत्र में पहुंचता है, तो उसमें इतनी गंदगी होती है कि उसे साफ करवाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं बरसातों के दिनों में यही गाद सैन्य क्षेत्र में जबरदस्त जलभराव की वजह बनती है। वर्ष 2010 की बाढ़ के दौरान गुड़गुड़िया नाले की इसी गंदगी की वजह से एलनबाईलाइन से उगाड़ा की ओर जाने वाली सड़क का संपर्क नाले के तेज बहाव की वजह से कट गया था। जबकि यहां रहने वाले सैन्य अफसरों व यूनिटों के भीतर तक नाले का पानी घुस गया था।
बारिश में फिर डूबने का खतरा
सेना अफसरों का आरोप है कि सिविल क्षेत्र में जिला प्रशासन इस नाले की सुध गंभीरता से नहीं लेते। इसी वजह से फिर से मानसून आने वाला है और फिर से इन नाले के हालात सैन्य क्षेत्र के लिए खतरनाक बन सकते हैं। हालांकि सेना अफसरों ने बोर्ड की सीईओ से आग्रह किया है कि वे अपने स्तर पर अपने क्षेत्र में नाले की सफाई की तैयारी करें। सीईओ ने आश्वस्त किया है कि वे जल्द ही सैन्य क्षेत्र में नाले की सफाई का काम मानसून से पहले करवा देंगी।
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अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड का प्रेसिडेंट पद संभालने के बाद सड़के और ड्रेनेज ये दोनों मामले उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। मालूम चला है कि इस वक्त गुड़गुड़िया नाला सैन्य क्षेत्र में बड़ी समस्या है। इसकी वजह से सिविल प्रशासन द्वारा सहयोग न करना। क्योंकि जब तक सिविल क्षेत्र से ये साफ नहीं होगा और इस नाले के पानी का उचित जगह पर निस्तारण नहीं होगा। तब तक सैन्य क्षेत्र को खतरा रहेगा। डीसी से जल्द ही बैठक कर इस मसले पर बात की जाएगी और उनसे आग्रह किया जाएगा कि इस नाले की सफाई नियमित करवाई जाए।
-ब्रिगेडियर ए. उप्पल, बोर्ड प्रेसिडेंट, कैंटोनमेंट बोर्ड-
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सेना अफसरों ने इस मुद्दे को कैंटोनमेंट बोर्ड की बैठक में प्रमुखता से उठाया था। सेना अफसराें का कहना था कि सैन्य क्षेत्र में ये नाला जब निकलता है, तो वहां इसकी नियमित सफाई होती है। लेकिन सिविल और रेलवे क्षेत्र से गुजर6ने के बाद नाला जब दोबारा सैन्य क्षेत्र में पहुंचता है, तो उसमें इतनी गंदगी होती है कि उसे साफ करवाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं बरसातों के दिनों में यही गाद सैन्य क्षेत्र में जबरदस्त जलभराव की वजह बनती है। वर्ष 2010 की बाढ़ के दौरान गुड़गुड़िया नाले की इसी गंदगी की वजह से एलनबाईलाइन से उगाड़ा की ओर जाने वाली सड़क का संपर्क नाले के तेज बहाव की वजह से कट गया था। जबकि यहां रहने वाले सैन्य अफसरों व यूनिटों के भीतर तक नाले का पानी घुस गया था।
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बारिश में फिर डूबने का खतरा
सेना अफसरों का आरोप है कि सिविल क्षेत्र में जिला प्रशासन इस नाले की सुध गंभीरता से नहीं लेते। इसी वजह से फिर से मानसून आने वाला है और फिर से इन नाले के हालात सैन्य क्षेत्र के लिए खतरनाक बन सकते हैं। हालांकि सेना अफसरों ने बोर्ड की सीईओ से आग्रह किया है कि वे अपने स्तर पर अपने क्षेत्र में नाले की सफाई की तैयारी करें। सीईओ ने आश्वस्त किया है कि वे जल्द ही सैन्य क्षेत्र में नाले की सफाई का काम मानसून से पहले करवा देंगी।
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अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड का प्रेसिडेंट पद संभालने के बाद सड़के और ड्रेनेज ये दोनों मामले उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। मालूम चला है कि इस वक्त गुड़गुड़िया नाला सैन्य क्षेत्र में बड़ी समस्या है। इसकी वजह से सिविल प्रशासन द्वारा सहयोग न करना। क्योंकि जब तक सिविल क्षेत्र से ये साफ नहीं होगा और इस नाले के पानी का उचित जगह पर निस्तारण नहीं होगा। तब तक सैन्य क्षेत्र को खतरा रहेगा। डीसी से जल्द ही बैठक कर इस मसले पर बात की जाएगी और उनसे आग्रह किया जाएगा कि इस नाले की सफाई नियमित करवाई जाए।
-ब्रिगेडियर ए. उप्पल, बोर्ड प्रेसिडेंट, कैंटोनमेंट बोर्ड-