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भरपेट खाने को मोहताज, बासी रोटियों को सूखाकर चूरा बनाकर खाने को मजबूर कुष्ठ रोगी
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:09 AM IST
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भरपेट खाने को मोहताज, बासी रोटियों को सूखाकर चूरा बनाकर खाने को मजबूर कुष्ठ रोगी
फोटो नंबर------52 से 55
कुष्ठ आश्रम में सुविधाएं न मिलने से कुष्ठ रोगियों में रोष, टूटे पड़े कमरे, सीलन और दरारें आईं
कुष्ठ रोगी बोले- नजदीकी आश्रम को सरकार दे रही हर प्रकार की मदद, उनके साथ हो रहा भेदभाव
मुनीष कुमार
अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर-7 में स्थित इंदिरा चक्रवर्ती कुष्ठ आश्रम में रहने वाले रोगियों ने आश्रम में किसी भी तरह की सुविधा न मिलने पर रोष जताया है। उनका कहना है कि यहां पर भरपेट खाना भी नहीं मिलता है। बासी रोटियों को सुखाकर चूरा बनाकर चाय के साथ खाना पड़ता है। वहीं आश्रम में इस वक्त 15 कमरे हैं, जिनमें सीलन व दरारें आई हुई हैं। इनमें से कई कमरे टूटे पड़े हैं।
कुष्ठ रोगियों का कहना है कि आश्रम में कुल 50 लोग रहते हैं, जिनमें 24 पुरुष व 26 महिलाएं हैं। यह आश्रम करीब 52 साल पुराना है। इसमें रहने वाला कोई भी कुष्ठ रोगी दान मांगने के लिए आश्रम से बाहर नहीं जाता। जब भी कोई आश्रम में दान देने आता है तो वह उसी के सहारे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उनके साथ सरकार भेदभाव कर रही है। उक्त आश्रम के अलावा वहीं नजदीक में भी एक कुष्ठ आश्रम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से हर प्रकार की मदद उस आश्रम में दी जा रही है, चाहे ग्रांट हो या अन्य सुविधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नजदीकी कुष्ठ आश्रम में रहने वाले लोग करीब 20-25 वर्ष पूर्व ही अन्य शहरों से आकर यहां बसे हैं और वह सभी पढ़े-लिखे होने के कारण उनके हक को भी दबा लेते हैं। उनका कहना है कि जब भी सरकार किसी तरह की सुविधा देती है तो नजदीकी कुष्ठ आश्रम वाले इस सुविधा का प्रयोग कर लेते हैं और संबंधित अधिकारियों को झूठा विश्वास दिला देते हैं कि वह उनकी भी मदद कर रहे हैं। हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं है।
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दरारों व सीलन भरे कमरों में सोने को मजबूर
आश्रम में रहने वाले प्रधान देवी राम, कुष्ठ रोगी मोहन सिंह, दीनानाथा, अर्जुन दास शास्त्री, कैलाश सेठी, प्रह्लाद त्रिपाठी, बीरू लाल, लंका सिंह, ओम बहादुर, राम प्यारी, गुमा देवी, सरला देवी, सरस्वती देवी, परवती देवी, मानिक देवी, मंजू देवी व अन्य ने बताया कि आश्रम में इस वक्त 15 कमरे हैं, जिनमें सीलन व दरारें आई हुई हैं। इसके अलावा कई कमरे टूटे पड़े हैं। आश्रम में 50 लोगों की संख्या है, जिस हिसाब से 26-27 कमरों की जरूरत है, लेकिन आश्रम में किसी भी तरह का सहयोग न मिलने से वह दरारों व सीलन भरे कमरों में सोने को मजबूर है। कुछ समय पहले ही आश्रम में एक कमरा ढह गया था, हालांकि उस वक्त कमरे में कोई नहीं था, नहीं तो बड़ा हादसा हो जाता।
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जमीन पर कब्जे की दी थी शिकायत
लोगों ने बताया कि उनके आश्रम की कुछ जमीन पर नजदीक में रहने वाले एक व्यक्ति ने कब्जा कर लिया, जिस पर उन्होंने इसकी शिकायत डीसी को भी दी, लेकिन डीसी ने यह शिकायत पुलिस को सौंपी। कुष्ठ रोगियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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जरूरत के सामान की केवल आस
कुष्ठ रोगियों का कहना है कि कुष्ठ आश्रम में किसी भी तरह के जरूरत के सामान के लिए उन्हें केवल दानियों पर निर्भर रहना पड़ता है। उनका कहना है कि सर्दियों में कुष्ठ रोगियों को कंबल, गर्म वस्त्र व अन्य जरूरत का सामान भी दानी लोग ही दे जाएं तो दे जाएं, सरकार की ओर से ऐसी कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही।
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हर माह दिया जा रहा खर्च
सेक्टर-7 में स्थित इंदिरा चक्रवर्ती कुष्ठ आश्रम के अकाउंटेंट रजनीश ने बताया कि उक्त आश्रम में 41 सदस्य ऐसे हैं, जो रजिस्टर हैं। आश्रम में रहने वाले सभी 41 रोगियों को प्रति माह 1100 रुपये खर्चे के रूप में दिए जाते हैं, जोकि प्रत्येक रोगी के खाते में डाल दिए जाते हैं। इसके अलावा 7 हजार रुपये पूरे आश्रम का बिजली बिल भी हिंद कुष्ठ निवारण संघ की ओर से सरकार के सहयोग से दिया जाता है। वहीं आश्रम की जमीन कब्जाने के मामले में बताया कि यह जमीन एक कुष्ठ रोगी इंद्रा देवी की थी, जिसकी मौत के बाद यह जमीन उसके बेटे के नाम हो गई, लेकिन उसकी भी मौत होने पर उसकी पत्नी ने अपने हिस्से की यह जमीन बेच दी, जिसके बाद से उस महिला का कुछ पता नहीं है कि वह कहां गई।
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फोटो नंबर------52 से 55
कुष्ठ आश्रम में सुविधाएं न मिलने से कुष्ठ रोगियों में रोष, टूटे पड़े कमरे, सीलन और दरारें आईं
कुष्ठ रोगी बोले- नजदीकी आश्रम को सरकार दे रही हर प्रकार की मदद, उनके साथ हो रहा भेदभाव
मुनीष कुमार
अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर-7 में स्थित इंदिरा चक्रवर्ती कुष्ठ आश्रम में रहने वाले रोगियों ने आश्रम में किसी भी तरह की सुविधा न मिलने पर रोष जताया है। उनका कहना है कि यहां पर भरपेट खाना भी नहीं मिलता है। बासी रोटियों को सुखाकर चूरा बनाकर चाय के साथ खाना पड़ता है। वहीं आश्रम में इस वक्त 15 कमरे हैं, जिनमें सीलन व दरारें आई हुई हैं। इनमें से कई कमरे टूटे पड़े हैं।
कुष्ठ रोगियों का कहना है कि आश्रम में कुल 50 लोग रहते हैं, जिनमें 24 पुरुष व 26 महिलाएं हैं। यह आश्रम करीब 52 साल पुराना है। इसमें रहने वाला कोई भी कुष्ठ रोगी दान मांगने के लिए आश्रम से बाहर नहीं जाता। जब भी कोई आश्रम में दान देने आता है तो वह उसी के सहारे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उनके साथ सरकार भेदभाव कर रही है। उक्त आश्रम के अलावा वहीं नजदीक में भी एक कुष्ठ आश्रम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से हर प्रकार की मदद उस आश्रम में दी जा रही है, चाहे ग्रांट हो या अन्य सुविधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नजदीकी कुष्ठ आश्रम में रहने वाले लोग करीब 20-25 वर्ष पूर्व ही अन्य शहरों से आकर यहां बसे हैं और वह सभी पढ़े-लिखे होने के कारण उनके हक को भी दबा लेते हैं। उनका कहना है कि जब भी सरकार किसी तरह की सुविधा देती है तो नजदीकी कुष्ठ आश्रम वाले इस सुविधा का प्रयोग कर लेते हैं और संबंधित अधिकारियों को झूठा विश्वास दिला देते हैं कि वह उनकी भी मदद कर रहे हैं। हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं है।
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दरारों व सीलन भरे कमरों में सोने को मजबूर
आश्रम में रहने वाले प्रधान देवी राम, कुष्ठ रोगी मोहन सिंह, दीनानाथा, अर्जुन दास शास्त्री, कैलाश सेठी, प्रह्लाद त्रिपाठी, बीरू लाल, लंका सिंह, ओम बहादुर, राम प्यारी, गुमा देवी, सरला देवी, सरस्वती देवी, परवती देवी, मानिक देवी, मंजू देवी व अन्य ने बताया कि आश्रम में इस वक्त 15 कमरे हैं, जिनमें सीलन व दरारें आई हुई हैं। इसके अलावा कई कमरे टूटे पड़े हैं। आश्रम में 50 लोगों की संख्या है, जिस हिसाब से 26-27 कमरों की जरूरत है, लेकिन आश्रम में किसी भी तरह का सहयोग न मिलने से वह दरारों व सीलन भरे कमरों में सोने को मजबूर है। कुछ समय पहले ही आश्रम में एक कमरा ढह गया था, हालांकि उस वक्त कमरे में कोई नहीं था, नहीं तो बड़ा हादसा हो जाता।
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जमीन पर कब्जे की दी थी शिकायत
लोगों ने बताया कि उनके आश्रम की कुछ जमीन पर नजदीक में रहने वाले एक व्यक्ति ने कब्जा कर लिया, जिस पर उन्होंने इसकी शिकायत डीसी को भी दी, लेकिन डीसी ने यह शिकायत पुलिस को सौंपी। कुष्ठ रोगियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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जरूरत के सामान की केवल आस
कुष्ठ रोगियों का कहना है कि कुष्ठ आश्रम में किसी भी तरह के जरूरत के सामान के लिए उन्हें केवल दानियों पर निर्भर रहना पड़ता है। उनका कहना है कि सर्दियों में कुष्ठ रोगियों को कंबल, गर्म वस्त्र व अन्य जरूरत का सामान भी दानी लोग ही दे जाएं तो दे जाएं, सरकार की ओर से ऐसी कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही।
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हर माह दिया जा रहा खर्च
सेक्टर-7 में स्थित इंदिरा चक्रवर्ती कुष्ठ आश्रम के अकाउंटेंट रजनीश ने बताया कि उक्त आश्रम में 41 सदस्य ऐसे हैं, जो रजिस्टर हैं। आश्रम में रहने वाले सभी 41 रोगियों को प्रति माह 1100 रुपये खर्चे के रूप में दिए जाते हैं, जोकि प्रत्येक रोगी के खाते में डाल दिए जाते हैं। इसके अलावा 7 हजार रुपये पूरे आश्रम का बिजली बिल भी हिंद कुष्ठ निवारण संघ की ओर से सरकार के सहयोग से दिया जाता है। वहीं आश्रम की जमीन कब्जाने के मामले में बताया कि यह जमीन एक कुष्ठ रोगी इंद्रा देवी की थी, जिसकी मौत के बाद यह जमीन उसके बेटे के नाम हो गई, लेकिन उसकी भी मौत होने पर उसकी पत्नी ने अपने हिस्से की यह जमीन बेच दी, जिसके बाद से उस महिला का कुछ पता नहीं है कि वह कहां गई।