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- एक माह पहले ही भर्ती हुआ था केंद्र में
Updated Sun, 11 Mar 2018 01:08 AM IST
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खिड़की की ग्रिल तोड़ आधी रात नशा मुक्ति केंद्र से भागे 13 मरीज, रोड क्रॉस करते समय एक वाहन की चपेट में आया, मौत
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
शाहपुर में जीटी रोड के पास स्थित एक संस्था द्वारा संचालित नई किरण नशा मुक्ति एवं परामर्श केंद्र से शुक्रवार मध्य रात 13 मरीज भाग गए। हॉल कमरे में लगी खिड़की की ग्रिल तोड़ने के बाद भागे 13 लोगों के बारे में रात को भनक तक नहीं लगी। वहीं यहां से भागे हरीश नामक व्यक्ति की जीटी रोड क्रॉस करते हुए वाहन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। केंद्र में शनिवार सुबह वार्ड ब्वॉय ने जब खिड़की टूटी देखी तो मामले की जानकारी प्रबंधन और पुलिस को दी। पुलिस के पास पहले ही अज्ञात व्यक्ति के हादसे में मरने की सूचना थी और बाद में मालूम हुआ कि केंद्र से भागा युवक ही वाहन की चपेट में आया है। पुलिस की प्राथमिक जांच में केंद्र संचालकों की लापरवाही सामने आई है, वहीं केंद्र के कई मरीजों ने संचालकों पर मारपीट करने और परिजनों को गुमराह करने संबंधी आरोप लगाए हैं। वहीं केंद्र इंचार्ज ने शनिवार रात दावा किया है कि भागे 13 मरीजों में से नौ अपने घर पहुंच चुके हैं। केंद्र संचालक ने भी मरीजों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
उधर, कैंट डीएसपी सुरेश कौशिक, मोहड़ा चौकी प्रभारी जोराजीत और अन्य स्टाफ ने मौके का मुआयना किया। पुलिस अब स्वास्थ्य विभाग से केंद्र संचालन को लेकर नियमों की जानकारी लेगी जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उधर, शाम कैंट सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद हरीश का शव परिवार को सौंप दिया गया।
केवल तीन वार्ड ब्वॉयज के सहारे थे 21 मरीज
नशा मुक्ति केंद्र में पहली लापरवाही सामने आई कि यहां पर रात के समय 21 मरीजों पर महज तीन वार्ड ब्वॉय थे जबकि दिन में 16 होते हैं। इसका फायदा उठाकर रात को मरीजों ने हॉल कमरे की ग्रिल तोड़ी। उस समय मौके पर मरीजों में से ही सुरक्षा के लिए बनाए गए दो नाइटमैन सुरेंद्र और हैप्पी भी मौजूद थे। उन्होंने भी किसी को रोकने का प्रयास नहीं किया जिसके बाद खिड़की की ग्रिल तोड़ दोनों नाइटमैन सहित 13 मरीज भाग गए। सुबह ड्यूटी दे रहे वार्ड ब्वॉय रजनीश पुरी ने खिड़की टूटी देखी और मरीजों को गायब पाया तो उन्होंने केंद्र संचालकों और मोहड़ा पुलिस को मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रात को ग्रिल तोड़ने की कोई आवाज नहीं आई। हो सकता है कि पहले से ही ग्रिल धीरे-धीरे तोड़ी जा रही हो।
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केंद्र के सामने ही जीटी रोड पर हादसा
आशंका है कि केंद्र से भागने के बाद सिटी निवासी 37 वर्षीय हरीश कुमार जीटी रोड पर वाहन की चपेट में आ गया। मोहड़ा पुलिस को रात करीब दो बजे सूचना मिली थी कि जीटी रोड पर टांगरी पुल के पास शव पड़ा है। जहां शव था वह स्थान नशा मुक्ति केंद्र से करीब 70 मीटर की दूरी पर है। हरीश कुमार को उसके परिवार ने 12 फरवरी को केंद्र में भर्ती कराया था, वह नशे का आदि था। वार्ड ब्वॉय रजनीश ने बताया कि पहले हरीश पर नशे के केस दर्ज थे और उसे केंद्र में छोड़ने के लिए उसके परिवार सदस्य सहित पुलिस भी आई थी।
केंद्र संचालक करते हैं मारपीट, परिजन लेने आते हैं तो करते गुमराह
डीएसपी सुरेश कौशिक ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की। 20 मरीजों की क्षमता वाले केंद्र में मिले 21 मरीज मिले। इस दौरान सुरक्षा को लेकर खामियां भी मिली। रात के समय महज तीन वार्ड ब्वॉय मिले जबकि दिन में 16 होते हैं। इसी बीच केंद्र में मौजूद मरीजों ने डीएसपी कौशिक को बताया कि उन्हें रात के समय नहीं पता कि शेष मरीज कब भागे। उन्होंने बताया कि केंद्र संचालक उन पर जुल्म करते हैं। उनसे मारपीट की जाती है और उन्हें यदि परिजन लेने आते हैं तो उन्हें गुमराह किया जाता है और बाहर तक नहीं निकलने दिया जाता।
पहले एग्जॉस्ट फेन तोड़कर भागे थे 11 मरीज
बता दें कि इसी नशा मुक्ति केंद्र से पूर्व में एग्जॉस्ट फेन तोड़कर मरीज भागे थे। साल 2008 में यह घटना हुई थी और तब करीब 11 मरीज भागे थे। नई किरण नशा मुक्ति केंद्र वर्ष 2005 से शाहपुर में चल रहा है जबकि इससे पहले यह शाहाबाद में था।
नौ मरीज घर पहुंचे, तीन अभी भी लापता
उधर, शनिवार देर रात नशा मुक्ति केंद्र इंचार्ज एवं वार्ड ब्वॉय रजनीश राय ने अमर उजाला को बताया कि भागे 13 मरीजों में से नौ अपने घर पहुंच चुके हैं और मरीजों के परिवार के सदस्यों ने उन्हें इसकी फोन पर जानकारी दी है। तीन मरीज के संबंध में कोई जानकारी नहीं है कि वह कहां गए। मामले की जानकारी क्षेत्र की मोहड़ा पुलिस चौकी को दी गई है।
हरीश कुमार का चार वर्ष पहले हो चुका था तलाक
मृतक हरीश कुमार की करीब 13 साल पहले शादी हुई थी। हरीश के जीजा नरेंद्र ने बताया कि हरीश नशे का आदि था और करीब चार साल पहले उसका तलाक हो गया था। उसका एक बच्चा भी है। तलाक के बाद से वह अकेला रहने लगा और तनाव में आ गया था। वह दिमागी तौर पर भी ठीक नहीं था। नशे की लत ने उसे और बर्बाद कर दिया था। बताते हैं कि वह नशे का इतना आदि हो चुका था कि घर की छोटी से छोटी वस्तु बेच देता था। इसी को लेकर परिवार सदस्यों ने उसे नशा मुक्ति केंद्र में भेजा था। मगर उन्हें क्या मालूम था कि यहां उसे पूरे जीवन से ही मुक्ति मिल जाएगी। मां के अलावा हरीश की तीन बहने भी हैं जोकि विवाहित है।
संचालकों ने नकारे आरोप
केंद्र इंचार्ज सतबीर डब्बास ने कहा कि मरीजों ने मारपीट करने सहित जो आरोप लगाए हैं, वह पूरी तरह से बेबुनियाद है। केंद्र को पूरे नियम व कायदे से बीते 18 सालों से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र से भागे अधिकतर मरीज अपने घरों में पहुंच चुके हैं और इसकी जानकारी उन्हें मरीजों के परिवार सदस्यों से मिल गई है।
सुरक्षा को लेकर कमियां मिली है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग से नशा मुक्ति केंद्र को लेकर तय मापदंड व कानूनों की जानकारी ली जाएगी। यदि खामियां मिली तो केंद्र संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यहां से भागे मरीज हरीश की मौत के मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। -सुरेश कौशिक, डीएसपी, अंबाला कैंट।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
शाहपुर में जीटी रोड के पास स्थित एक संस्था द्वारा संचालित नई किरण नशा मुक्ति एवं परामर्श केंद्र से शुक्रवार मध्य रात 13 मरीज भाग गए। हॉल कमरे में लगी खिड़की की ग्रिल तोड़ने के बाद भागे 13 लोगों के बारे में रात को भनक तक नहीं लगी। वहीं यहां से भागे हरीश नामक व्यक्ति की जीटी रोड क्रॉस करते हुए वाहन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। केंद्र में शनिवार सुबह वार्ड ब्वॉय ने जब खिड़की टूटी देखी तो मामले की जानकारी प्रबंधन और पुलिस को दी। पुलिस के पास पहले ही अज्ञात व्यक्ति के हादसे में मरने की सूचना थी और बाद में मालूम हुआ कि केंद्र से भागा युवक ही वाहन की चपेट में आया है। पुलिस की प्राथमिक जांच में केंद्र संचालकों की लापरवाही सामने आई है, वहीं केंद्र के कई मरीजों ने संचालकों पर मारपीट करने और परिजनों को गुमराह करने संबंधी आरोप लगाए हैं। वहीं केंद्र इंचार्ज ने शनिवार रात दावा किया है कि भागे 13 मरीजों में से नौ अपने घर पहुंच चुके हैं। केंद्र संचालक ने भी मरीजों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
उधर, कैंट डीएसपी सुरेश कौशिक, मोहड़ा चौकी प्रभारी जोराजीत और अन्य स्टाफ ने मौके का मुआयना किया। पुलिस अब स्वास्थ्य विभाग से केंद्र संचालन को लेकर नियमों की जानकारी लेगी जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उधर, शाम कैंट सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद हरीश का शव परिवार को सौंप दिया गया।
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केवल तीन वार्ड ब्वॉयज के सहारे थे 21 मरीज
नशा मुक्ति केंद्र में पहली लापरवाही सामने आई कि यहां पर रात के समय 21 मरीजों पर महज तीन वार्ड ब्वॉय थे जबकि दिन में 16 होते हैं। इसका फायदा उठाकर रात को मरीजों ने हॉल कमरे की ग्रिल तोड़ी। उस समय मौके पर मरीजों में से ही सुरक्षा के लिए बनाए गए दो नाइटमैन सुरेंद्र और हैप्पी भी मौजूद थे। उन्होंने भी किसी को रोकने का प्रयास नहीं किया जिसके बाद खिड़की की ग्रिल तोड़ दोनों नाइटमैन सहित 13 मरीज भाग गए। सुबह ड्यूटी दे रहे वार्ड ब्वॉय रजनीश पुरी ने खिड़की टूटी देखी और मरीजों को गायब पाया तो उन्होंने केंद्र संचालकों और मोहड़ा पुलिस को मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रात को ग्रिल तोड़ने की कोई आवाज नहीं आई। हो सकता है कि पहले से ही ग्रिल धीरे-धीरे तोड़ी जा रही हो।
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केंद्र के सामने ही जीटी रोड पर हादसा
आशंका है कि केंद्र से भागने के बाद सिटी निवासी 37 वर्षीय हरीश कुमार जीटी रोड पर वाहन की चपेट में आ गया। मोहड़ा पुलिस को रात करीब दो बजे सूचना मिली थी कि जीटी रोड पर टांगरी पुल के पास शव पड़ा है। जहां शव था वह स्थान नशा मुक्ति केंद्र से करीब 70 मीटर की दूरी पर है। हरीश कुमार को उसके परिवार ने 12 फरवरी को केंद्र में भर्ती कराया था, वह नशे का आदि था। वार्ड ब्वॉय रजनीश ने बताया कि पहले हरीश पर नशे के केस दर्ज थे और उसे केंद्र में छोड़ने के लिए उसके परिवार सदस्य सहित पुलिस भी आई थी।
केंद्र संचालक करते हैं मारपीट, परिजन लेने आते हैं तो करते गुमराह
डीएसपी सुरेश कौशिक ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की। 20 मरीजों की क्षमता वाले केंद्र में मिले 21 मरीज मिले। इस दौरान सुरक्षा को लेकर खामियां भी मिली। रात के समय महज तीन वार्ड ब्वॉय मिले जबकि दिन में 16 होते हैं। इसी बीच केंद्र में मौजूद मरीजों ने डीएसपी कौशिक को बताया कि उन्हें रात के समय नहीं पता कि शेष मरीज कब भागे। उन्होंने बताया कि केंद्र संचालक उन पर जुल्म करते हैं। उनसे मारपीट की जाती है और उन्हें यदि परिजन लेने आते हैं तो उन्हें गुमराह किया जाता है और बाहर तक नहीं निकलने दिया जाता।
पहले एग्जॉस्ट फेन तोड़कर भागे थे 11 मरीज
बता दें कि इसी नशा मुक्ति केंद्र से पूर्व में एग्जॉस्ट फेन तोड़कर मरीज भागे थे। साल 2008 में यह घटना हुई थी और तब करीब 11 मरीज भागे थे। नई किरण नशा मुक्ति केंद्र वर्ष 2005 से शाहपुर में चल रहा है जबकि इससे पहले यह शाहाबाद में था।
नौ मरीज घर पहुंचे, तीन अभी भी लापता
उधर, शनिवार देर रात नशा मुक्ति केंद्र इंचार्ज एवं वार्ड ब्वॉय रजनीश राय ने अमर उजाला को बताया कि भागे 13 मरीजों में से नौ अपने घर पहुंच चुके हैं और मरीजों के परिवार के सदस्यों ने उन्हें इसकी फोन पर जानकारी दी है। तीन मरीज के संबंध में कोई जानकारी नहीं है कि वह कहां गए। मामले की जानकारी क्षेत्र की मोहड़ा पुलिस चौकी को दी गई है।
हरीश कुमार का चार वर्ष पहले हो चुका था तलाक
मृतक हरीश कुमार की करीब 13 साल पहले शादी हुई थी। हरीश के जीजा नरेंद्र ने बताया कि हरीश नशे का आदि था और करीब चार साल पहले उसका तलाक हो गया था। उसका एक बच्चा भी है। तलाक के बाद से वह अकेला रहने लगा और तनाव में आ गया था। वह दिमागी तौर पर भी ठीक नहीं था। नशे की लत ने उसे और बर्बाद कर दिया था। बताते हैं कि वह नशे का इतना आदि हो चुका था कि घर की छोटी से छोटी वस्तु बेच देता था। इसी को लेकर परिवार सदस्यों ने उसे नशा मुक्ति केंद्र में भेजा था। मगर उन्हें क्या मालूम था कि यहां उसे पूरे जीवन से ही मुक्ति मिल जाएगी। मां के अलावा हरीश की तीन बहने भी हैं जोकि विवाहित है।
संचालकों ने नकारे आरोप
केंद्र इंचार्ज सतबीर डब्बास ने कहा कि मरीजों ने मारपीट करने सहित जो आरोप लगाए हैं, वह पूरी तरह से बेबुनियाद है। केंद्र को पूरे नियम व कायदे से बीते 18 सालों से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र से भागे अधिकतर मरीज अपने घरों में पहुंच चुके हैं और इसकी जानकारी उन्हें मरीजों के परिवार सदस्यों से मिल गई है।
सुरक्षा को लेकर कमियां मिली है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग से नशा मुक्ति केंद्र को लेकर तय मापदंड व कानूनों की जानकारी ली जाएगी। यदि खामियां मिली तो केंद्र संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यहां से भागे मरीज हरीश की मौत के मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। -सुरेश कौशिक, डीएसपी, अंबाला कैंट।