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शहीद बाबा बंदा ङ्क्षसह बहादर के जीवन पर आधारित लाइट साइट एंड साउंड शो का देर शाम हुआ आयोजन
Updated Sun, 16 Jul 2017 01:10 AM IST
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अंबाला सिटी। पुलिस ऑडिटोरियम में महान शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन पर आधारित नाटक ने न केवल दर्शकों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी बल्कि इस नाटक के माध्यम से लोगों को धर्म की रक्षा के लिए व अन्याय के विरुद्ध लड़ने वाले वीर शहीदों के बलिदानों बारे भी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई। इस शो के उस दृश्य पर दर्शक भाव विभोर हो उठे जब शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर के बेटे अजय सिंह का कलेजा चीर कर उनके मुंह में डालने की घटना का मंचन किया गया।
हरियाणा स्वर्ण जयंती आयोजन समिति तथा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से आयोजित पंजाबी कला केंद्र चंडीगढ़ द्वारा निर्मित इस लाइट-साइट एंड साउंड शो को एसएम विगल द्वारा प्रस्तुत किया गया। शनिवार शाम दो घंटे तक चले इस नाटक को बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने बड़ी ही श्रद्धा और तनमयता के साथ देखा। नाटक का उद्घाटन विधायक असीम गोयल व एडीसी आरके सिंह ने किया।
विधायक असीम गोयल ने इस अवसर पर कहा कि बंदा सिंह बहादुर ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए मुगलों के 700 वर्ष पुराने और अत्याचारी राज को समाप्त किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे शहीदों और बहादुरों के जीवन से भावी पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा मिलती है। इस मौके पर पंजाबी कला केंद्र के चेयरमैन डॉ. एसके पूनिया ने बताया कि यह शो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दिखाया जा रहा है और यह शो हरियाणा के स्वर्ण जयंती वर्ष को समर्पित है। इस अवसर पर पूर्व विधायक वीना छिब्बड़, एपीआरओ हरदीप सिंह, शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता संत सिंह कंधारी, अकाली दल के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़, सदस्य एसजीपीसी हरपाल सिंह पाली व अन्य मौजूद रहे
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यह दर्शाया नाटक में
नाटक में दिखाया गया कि वर्ष 1710 में बंदा सिंह बहादर राजस्थान से होते हुए पंजाब पहुंचे, जिस समय हरियाणा भी पंजाब का हिस्सा था। उनकी फौजों ने सढौरा, कैथल, रोहतक, पानीपत, सोनीपत क्षेत्रों में फतेह हासिल करते हुए समाना पर धावा बोला, जहां पर गुरू गोविंद सिंह के छोटे साहिबजादे तथा गुरू तेग बहादुर को शहीद करने वाले जल्लाद रहते थे।
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हरियाणा स्वर्ण जयंती आयोजन समिति तथा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से आयोजित पंजाबी कला केंद्र चंडीगढ़ द्वारा निर्मित इस लाइट-साइट एंड साउंड शो को एसएम विगल द्वारा प्रस्तुत किया गया। शनिवार शाम दो घंटे तक चले इस नाटक को बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने बड़ी ही श्रद्धा और तनमयता के साथ देखा। नाटक का उद्घाटन विधायक असीम गोयल व एडीसी आरके सिंह ने किया।
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विधायक असीम गोयल ने इस अवसर पर कहा कि बंदा सिंह बहादुर ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए मुगलों के 700 वर्ष पुराने और अत्याचारी राज को समाप्त किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे शहीदों और बहादुरों के जीवन से भावी पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा मिलती है। इस मौके पर पंजाबी कला केंद्र के चेयरमैन डॉ. एसके पूनिया ने बताया कि यह शो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दिखाया जा रहा है और यह शो हरियाणा के स्वर्ण जयंती वर्ष को समर्पित है। इस अवसर पर पूर्व विधायक वीना छिब्बड़, एपीआरओ हरदीप सिंह, शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता संत सिंह कंधारी, अकाली दल के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़, सदस्य एसजीपीसी हरपाल सिंह पाली व अन्य मौजूद रहे
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यह दर्शाया नाटक में
नाटक में दिखाया गया कि वर्ष 1710 में बंदा सिंह बहादर राजस्थान से होते हुए पंजाब पहुंचे, जिस समय हरियाणा भी पंजाब का हिस्सा था। उनकी फौजों ने सढौरा, कैथल, रोहतक, पानीपत, सोनीपत क्षेत्रों में फतेह हासिल करते हुए समाना पर धावा बोला, जहां पर गुरू गोविंद सिंह के छोटे साहिबजादे तथा गुरू तेग बहादुर को शहीद करने वाले जल्लाद रहते थे।