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Ambala News: 67 फीसदी लोगों ने डाले वोट, 20 वर्षों में सबसे कम
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अंबाला। अंबाला लोकसभा में 67 फीसदी लोगों ने अपने मत का इस्तेमाल किया। नोतपा की धूप में मतदाताओं का उत्साह देखते ही बनता था। सुबह के समय मतदाताओं का उत्साह देखते ही बनता था, जो दोपहर के समय कुछ कम हुआ तो शाम होते-होते एकदम तेज हो गया।
यदि बात करें आंकड़ों की तो अंबाला लोकसभा सीट पर बीते 20 वर्षों में सबसे कम मतदान इस बार दर्ज किया है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2004 में 70.5 फीसदी मत प्रतिशत रहा, वर्ष 2009 में 68.5 फीसदी, वर्ष 2014 में 72 फीसदी तो वर्ष 2019 में 71 फीसदी मतदान दर्ज किया था। जबकि इस बार शाम साढ़े आठ बजे तक आए निर्वाचन आयाेग के आंकड़ों के अनुसार 67 फीसदी मतदान रहा।
लोकसभा में कुल 19 लाख 96 हजार 708 मतदाता हैं। इसमें से 13 लाख 38 हजार 235 मतदाताओं ने मत दिए। यानी पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में तीन से चार फीसदी की कमी देखने को मिली है। सुबह सात बजे जब मतदान करने को बूथों पर लोगों की भीड़ उमड़ी तो एक बार तो ऐसा ही लग रहा था कि इस बार पिछले रिकॉर्ड टूट सकते हैं, मगर जैसे जैसे धूप से तपिश बढ़ी बूथों पर भी लोगों की लाइन कम होती दिखाई दी।
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एक दिन पहले जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम बना था मगर नौतपा के पहले दिन शनिवार को तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिससे लोगों का लाइन में खड़े होकर मतदान करना भी मुश्किल हो रहा था। यही कारण था कि दोपहर को कई पार्टियों के एजेंटों के कैंप खाली दिखे।
वर्षों में सबसे अधिक मोदी लहर में वोट पोल हुए
आंकड़ों पर गौर करें तो इन 20 वर्षों में मोदी लहर में (वर्ष 2014 और 2019) सबसे अधिक मतदान लोगों ने किया था। मगर इस बार मत फीसद का कम होना मतदाताओं की चुनाव के प्रति रुझान को दर्शा रहा है। चुनाव विश्लेषक मतदान फीसद के कम होने के अलग अलग तर्क दे रहे हैं मगर हैरानी की बात तो यह है कि इस बार वोटर बढ़े भी हैं इसके बावजूद मतदान फीसद कम होना हर किसी को हैरान कर रहा है।
वर्ष 2019 और 2024 के चुनाव से तुलना
विधानसभा क्षेत्र- वर्ष 2019 में मत प्रतिशत- वर्ष 2024 में मत प्रतिशत- अंतर (कम हुई वोटिंग प्रतिशत)
कालका- 73.14- 67.2- 5.94
पंचकूला- 65.48- 60.2- 5.28
नारायणगढ़- 74.55- 69.6- 4.95
अंबाला कैंट- 64.15- 61.2- 3.03
अंबाला सिटी- 63.92- 61.7- 2.22
मुलाना- 73.16- 69.7- 3.09
सढ़ौरा- 79.25- 74.9- 4.35
जगाधरी- 77.88- 74.2- 3.68
यमुनानगर- 70.02- 65.1- 4. 92
ओवरऑल अंबाला लोकसभा- 72- 67- 5
नोट : साढ़े आठ बजे तक के मतदान के आंकड़ों के अनुसार।
एक्सपर्ट व्यू : नौतपा की गर्मी और कम उत्साह बड़ी वजह
चुनाव विश्लेषक और अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि मतदान प्रतिशत के कम होने का एक कारण नौतपा की गर्मी है। जिसके कारण भी कई लोग अपने घरों से नहीं निकल सके होंगे। वहीं दूसरा कारण मतदाताओं में उत्साह की कमी भी हो सकती है। अक्सर देखा गया है कि चुनावों में अगर वोटिंग प्रतिशत कम होता है तो एक कारण यह भी माना जाता है कि मतदाताओं में चुनाव के प्रति उत्साह की कमी है। ऐसी स्थिति तो तब है जब पिछले लोकसभा चुनावों के बाद डेढ़ लाख मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। जबकि गत चार माह में ही 25 हजार से अधिक मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। इस हिसाब वोटिंग प्रतिशत का कम होना हैरान करता है।
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यदि बात करें आंकड़ों की तो अंबाला लोकसभा सीट पर बीते 20 वर्षों में सबसे कम मतदान इस बार दर्ज किया है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2004 में 70.5 फीसदी मत प्रतिशत रहा, वर्ष 2009 में 68.5 फीसदी, वर्ष 2014 में 72 फीसदी तो वर्ष 2019 में 71 फीसदी मतदान दर्ज किया था। जबकि इस बार शाम साढ़े आठ बजे तक आए निर्वाचन आयाेग के आंकड़ों के अनुसार 67 फीसदी मतदान रहा।
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लोकसभा में कुल 19 लाख 96 हजार 708 मतदाता हैं। इसमें से 13 लाख 38 हजार 235 मतदाताओं ने मत दिए। यानी पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में तीन से चार फीसदी की कमी देखने को मिली है। सुबह सात बजे जब मतदान करने को बूथों पर लोगों की भीड़ उमड़ी तो एक बार तो ऐसा ही लग रहा था कि इस बार पिछले रिकॉर्ड टूट सकते हैं, मगर जैसे जैसे धूप से तपिश बढ़ी बूथों पर भी लोगों की लाइन कम होती दिखाई दी।
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एक दिन पहले जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम बना था मगर नौतपा के पहले दिन शनिवार को तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिससे लोगों का लाइन में खड़े होकर मतदान करना भी मुश्किल हो रहा था। यही कारण था कि दोपहर को कई पार्टियों के एजेंटों के कैंप खाली दिखे।
वर्षों में सबसे अधिक मोदी लहर में वोट पोल हुए
आंकड़ों पर गौर करें तो इन 20 वर्षों में मोदी लहर में (वर्ष 2014 और 2019) सबसे अधिक मतदान लोगों ने किया था। मगर इस बार मत फीसद का कम होना मतदाताओं की चुनाव के प्रति रुझान को दर्शा रहा है। चुनाव विश्लेषक मतदान फीसद के कम होने के अलग अलग तर्क दे रहे हैं मगर हैरानी की बात तो यह है कि इस बार वोटर बढ़े भी हैं इसके बावजूद मतदान फीसद कम होना हर किसी को हैरान कर रहा है।
वर्ष 2019 और 2024 के चुनाव से तुलना
विधानसभा क्षेत्र- वर्ष 2019 में मत प्रतिशत- वर्ष 2024 में मत प्रतिशत- अंतर (कम हुई वोटिंग प्रतिशत)
कालका- 73.14- 67.2- 5.94
पंचकूला- 65.48- 60.2- 5.28
नारायणगढ़- 74.55- 69.6- 4.95
अंबाला कैंट- 64.15- 61.2- 3.03
अंबाला सिटी- 63.92- 61.7- 2.22
मुलाना- 73.16- 69.7- 3.09
सढ़ौरा- 79.25- 74.9- 4.35
जगाधरी- 77.88- 74.2- 3.68
यमुनानगर- 70.02- 65.1- 4. 92
ओवरऑल अंबाला लोकसभा- 72- 67- 5
नोट : साढ़े आठ बजे तक के मतदान के आंकड़ों के अनुसार।
एक्सपर्ट व्यू : नौतपा की गर्मी और कम उत्साह बड़ी वजह
चुनाव विश्लेषक और अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि मतदान प्रतिशत के कम होने का एक कारण नौतपा की गर्मी है। जिसके कारण भी कई लोग अपने घरों से नहीं निकल सके होंगे। वहीं दूसरा कारण मतदाताओं में उत्साह की कमी भी हो सकती है। अक्सर देखा गया है कि चुनावों में अगर वोटिंग प्रतिशत कम होता है तो एक कारण यह भी माना जाता है कि मतदाताओं में चुनाव के प्रति उत्साह की कमी है। ऐसी स्थिति तो तब है जब पिछले लोकसभा चुनावों के बाद डेढ़ लाख मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। जबकि गत चार माह में ही 25 हजार से अधिक मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। इस हिसाब वोटिंग प्रतिशत का कम होना हैरान करता है।