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लावारिस पशुओं से निजात मिलने की उम्मीद जागी, धरपकड़ शुरू
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। लंबे समय से लावारिस पशुओं का दंश झेल रहे शहरवासियों को भविष्य में इनसे निजात मिलने की उम्मीद जगी है। नगर निगम मंगलवार को शहर के अंदर सड़कों, बाजारों, मोहल्लों आदि में घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़ने का विशेष अभियान शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों लावारिस पशुओं के कारण हो रहे हादसों को लेकर अमर उजाला ने अभियान शुरू किया था। इसके तहत उन सभी बिंदुओं को उठाया गया था और इसके समाधान के बारे में बताया गया था।
सीनियर सेनेटरी इंस्पेक्टर साधुराम ने बताया कि शहर वासियों के लिए लावारिस पशु बड़ी समस्या बने हुए हैं। इसे देखते हुए दो टीमें इन्हें पकडने का काम कर ही हैं। पहले दिन टीम के द्वारा कड़ी मेहनत के बाद 20 पशु ही पकड़े जा सके हैं। सभी पकड़े गए पशुओं को सुल्लर गोशाला में छोड़ दिया गया है।
सड़कों के अलावा गलियों, बाजारों व मोहल्लों में घूमते लावारिस पशु शहरवासियों के लिए ही नहीं बल्कि किसानों के लिए भी मुसीबत बन रहे हैं। इन लावारिस पशुओं में वो गाय भी हैं जो दूध देना छोड़ जाती है तथा जन्म लेने वाले बछड़े भी लोग लावारिस छोडने लगे हैं। यही कारण है कि शहर अंदर आवारा पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है।
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अब तक हो चुके हैं अनेकों हादसे
आंकड़ों की बात करें तो पिछले पांच सालों में 85 से अधिक लोग लावारिस पशुओं के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। आए दिन लावारिस पशुओं के कारण होने वाले हादसों से खफा लोग लंबे समय से निजात दिलाने की गुहार लगाते आ रहे हैं।
अब तक इतने मामले हुए दर्ज
लावारिस पशुओं की चपेट में आने से मौत होने व नुकसान होने पर अक्सर मामले दर्ज होते हैं। अगर बात की जाए पिछले कुछ वर्ष 2014 की तो 9, 2015 में 16, 2016 में 20, 2017 में 22 व 2018 (सितंबर तक) में 16 मामले दर्ज हुए हैं।
गोशाला में आर्थिक मदद की लगाई गुहार
सुल्लर गांव के सरपंच पति हरकेश सिंह का कहना है कि यह गोशाला गांव वालों की मदद से चल रही है। प्रशासन की ओर से 10 माह से कोई मदद नहीं मिली है। तूरी का रेट 650 रुपये है, ऐसे में इनका खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि सबसे बड़ी समस्या शहर में स्थित तीन गोशालाओं की है, जहां करीब 1500 गायें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन गोशालाओं में बछड़े पैदा नहीं होते। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
नगर निगम के अधिकारियों को लावारिस पशुओं के बारे में बोल दिया था। उन्हें पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में भिजवाया जा रहा है।
- शरणदीप कौर बराड़, उपायुक्त
नगर निगम की दो टीमें अंबाला कैंट व सिटी में काम कर रही हैं। दो ट्रालियों में भरकर लावारिस पशुओं को सुल्लर गोशाला में पहुंचाया जा रहा है। जल्द ही लावारिस पशुओं की समस्या समाप्त हो जाएगी।
- मीनाक्षी दहिया, कमिश्नर, नगर निगम
लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान नगर निगम को लगातार चलाना चाहिए। टीम को ध्यान रखना चाहिए कि डेयरी पालक पशुओं को बाहर न छोड़ें। अगर ऐसा करता कोई पाया गया तो उन पर जुर्माना करना चाहिए।
- रोहित जैन, अधिवक्ता।
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अंबाला कैंट। लंबे समय से लावारिस पशुओं का दंश झेल रहे शहरवासियों को भविष्य में इनसे निजात मिलने की उम्मीद जगी है। नगर निगम मंगलवार को शहर के अंदर सड़कों, बाजारों, मोहल्लों आदि में घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़ने का विशेष अभियान शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों लावारिस पशुओं के कारण हो रहे हादसों को लेकर अमर उजाला ने अभियान शुरू किया था। इसके तहत उन सभी बिंदुओं को उठाया गया था और इसके समाधान के बारे में बताया गया था।
सीनियर सेनेटरी इंस्पेक्टर साधुराम ने बताया कि शहर वासियों के लिए लावारिस पशु बड़ी समस्या बने हुए हैं। इसे देखते हुए दो टीमें इन्हें पकडने का काम कर ही हैं। पहले दिन टीम के द्वारा कड़ी मेहनत के बाद 20 पशु ही पकड़े जा सके हैं। सभी पकड़े गए पशुओं को सुल्लर गोशाला में छोड़ दिया गया है।
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सड़कों के अलावा गलियों, बाजारों व मोहल्लों में घूमते लावारिस पशु शहरवासियों के लिए ही नहीं बल्कि किसानों के लिए भी मुसीबत बन रहे हैं। इन लावारिस पशुओं में वो गाय भी हैं जो दूध देना छोड़ जाती है तथा जन्म लेने वाले बछड़े भी लोग लावारिस छोडने लगे हैं। यही कारण है कि शहर अंदर आवारा पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है।
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अब तक हो चुके हैं अनेकों हादसे
आंकड़ों की बात करें तो पिछले पांच सालों में 85 से अधिक लोग लावारिस पशुओं के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। आए दिन लावारिस पशुओं के कारण होने वाले हादसों से खफा लोग लंबे समय से निजात दिलाने की गुहार लगाते आ रहे हैं।
अब तक इतने मामले हुए दर्ज
लावारिस पशुओं की चपेट में आने से मौत होने व नुकसान होने पर अक्सर मामले दर्ज होते हैं। अगर बात की जाए पिछले कुछ वर्ष 2014 की तो 9, 2015 में 16, 2016 में 20, 2017 में 22 व 2018 (सितंबर तक) में 16 मामले दर्ज हुए हैं।
गोशाला में आर्थिक मदद की लगाई गुहार
सुल्लर गांव के सरपंच पति हरकेश सिंह का कहना है कि यह गोशाला गांव वालों की मदद से चल रही है। प्रशासन की ओर से 10 माह से कोई मदद नहीं मिली है। तूरी का रेट 650 रुपये है, ऐसे में इनका खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि सबसे बड़ी समस्या शहर में स्थित तीन गोशालाओं की है, जहां करीब 1500 गायें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन गोशालाओं में बछड़े पैदा नहीं होते। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
नगर निगम के अधिकारियों को लावारिस पशुओं के बारे में बोल दिया था। उन्हें पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में भिजवाया जा रहा है।
- शरणदीप कौर बराड़, उपायुक्त
नगर निगम की दो टीमें अंबाला कैंट व सिटी में काम कर रही हैं। दो ट्रालियों में भरकर लावारिस पशुओं को सुल्लर गोशाला में पहुंचाया जा रहा है। जल्द ही लावारिस पशुओं की समस्या समाप्त हो जाएगी।
- मीनाक्षी दहिया, कमिश्नर, नगर निगम
लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान नगर निगम को लगातार चलाना चाहिए। टीम को ध्यान रखना चाहिए कि डेयरी पालक पशुओं को बाहर न छोड़ें। अगर ऐसा करता कोई पाया गया तो उन पर जुर्माना करना चाहिए।
- रोहित जैन, अधिवक्ता।